scorecardresearch
 

IPC Section 55: क्या है 'आजीवन कारावास के आदेश का रूपान्तरण', जानें आईपीसी की धारा 55 में

आईपीसी (IPC) की धारा 55 (Section 55) 'आजीवन कारावास के दण्डादेश के लघुकरण' को परिभाषित (defined) करती है. तो चलिए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 55 इस बारे में क्या कहती है?

Advertisement
X
IPC की धारा 55 आजीवन कारावास में बदलाव को परिभाषित करती है
IPC की धारा 55 आजीवन कारावास में बदलाव को परिभाषित करती है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आजीवन कारावास से संबंधित है IPC की धारा 55
  • आजीवन कारावास में बदलाव को परिभाषित करती है धारा 55
  • 1862 में लागू की गई थी आईपीसी

भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) में कई अध्याय (Chapter) हैं. उनमें कई धाराएं (Section) मौजूद हैं, जो हमें अपराध (Offence) और उनके दंड (Punishment) के साथ-साथ कई मामलों की कानूनी जानकारी भी देती हैं. ऐसे ही आईपीसी (IPC) की धारा 55 (Section 55) 'आजीवन कारावास के दण्डादेश के लघुकरण' को परिभाषित (defined) करती है. तो चलिए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 55 इस बारे में क्या कहती है?

Advertisement

आईपीसी की धारा 55 (IPC Section 55) 

भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 55 (Section 55) में आजीवन कारावास (imprisonment for life) की सजा (sentence) को बदले जाने के बारे में बताया गया है. IPC की धारा 55 के अनुसार 'हर उस मामले में (In every case), जिसमें आजीवन कारावास का दण्डादेश (sentence) दिया गया हो, अपराधी (offender) की सम्मति के बिना (without the consent) भी समुचित सरकार (appropriate Government) उस दण्ड (punishment) को ऐसी अवधि के लिए, जो चौदह वर्ष से अधिक न हो, दोनों में से किसी भी भांति के कारावास (imprisonment) में लघुकॄत (Commutation) कर सकेगी.

इसे भी पढ़ें--- IPC Section 54: क्या है 'मौत की सजा के रूपान्तरण' का प्रावधान, जानें आईपीसी की धारा 54 में 

क्या होती है आईपीसी (IPC)

भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी, लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.

Advertisement

अंग्रेजों ने लागू की थी IPC

ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.

ये भी पढ़ेंः

 

Advertisement
Advertisement