Indian Penal Code: भारतीय दंड संहिता में अपराध (Offence) और उसकी सजा (Punishment) के प्रावधान (Provision) के साथ-साथ अन्य कानूनी जानकारी (legal Information) भी मौजूद है. इसी तरह से आईपीसी (IPC) की धारा 68 (Section 68) जुर्माना भर दिए जाने पर कारावास की समाप्ति को परिभाषित करती है. आइए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 68 इस बारे में क्या कहती है?
आईपीसी की धारा 68 (IPC Section 68)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 68 (Section 68) में आर्थिक दण्ड (monetary penalty) के भुगतान (payment) किए जाने या जुर्माना (fine) वसूल कर लिए जाने पर कारावास का समाप्त (end of imprisonment) हो जाना बताया गया है. IPC की धारा 68 के अनुसार, आर्थिक दण्ड के भुगतान में चूक होने की दशा के लिए अधिरोपित कारावास (imposed imprisonment) तब समाप्त हो जाएगा, जब वह आर्थिक दण्ड या तो चुका दिया जाए या विधि की प्रक्रिया द्वारा वसूल (recovered by process of law) कर लिया जाए.
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क्या होती है आईपीसी (IPC)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.
अंग्रेजों ने लागू की थी IPC
ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.