भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) में जुर्म (Offence) और उसकी सजा (Punishment) के प्रावधान (Provision) के साथ-साथ अन्य कानूनी जानकारी (legal Information) भी मिलती हैं. इसी तरह से आईपीसी (IPC) की धारा 69 (Section 69) में बताया गया है कि जुर्माने के आनुपातिक भाग के भुगतान के मामले में कारावास की समाप्ति हो जाएगी. आइए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 69 इस बारे में क्या कहती है?
आईपीसी की धारा 69 (IPC Section 69)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 69 (Section 69) में जुर्माने के आनुपातिक भाग (proportionate portion of the fine) का भुगतान (pay) किए जाने पर कारावास की सजा (sentence of imprisonment) खत्म (terminate) हो जाएगी. IPC की धारा 69 के अनुसार, यदि जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा के लिए नियत की गई कारावास की अवधि का अवसान (Expiration of fixed term of imprisonment) होने से पूर्व जुर्माने का ऐसा अनुपात चुका दिया (paid such proportion of the fine) या उद्गॄहीत (unanswered) कर लिया जाए कि देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास की जो अवधि भोगी जा चुकी हो, वह जुर्माने के तब तक न चुकाए गए भाग के आनुपातिक से कम न हो तो कारावास पर्यवसित (prison terminate) हो जाएगा.
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क्या होती है आईपीसी (IPC)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.
अंग्रेजों ने लागू की थी IPC
ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.
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