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IPC Section 86: नशे में किए गए अपराध के बारे में बताती है आईपीसी की धारा 86

आईपीसी (IPC) की धारा 86 (Section 86) में किसी व्यक्ति द्वारा नशे की हालत (Drunk mode) में किया गए अपराध को परिभाषित (Define crime) करती है, जिसमें विशेष आशय या ज्ञान का होना अपेक्षित है. तो आइए जानते हैं कि आईपीसी की धारा 86 इस बारे में क्या कहती है?

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IPC की धारा 86 नशे में किए गए अपराध को परिभाषित करती है
IPC की धारा 86 नशे में किए गए अपराध को परिभाषित करती है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नशे में चूर व्यक्ति के अपराध से जुड़ी है धारा 86
  • अंग्रेजी शासनकाल में लागू हुई थी आईपीसी

इंडियन पीनल कोड (Indian Penal Code) की अलग-अलग धाराएं कई प्रकार के कानूनी प्रावधानों (Legal provisions) की जानकारी देती हैं. जिनका इस्तेमाल पुलिस और अदालत की कार्य प्रणाली के दौरान होता है. इसी तरह से आईपीसी (IPC) की धारा 86 (Section 86) में किसी व्यक्ति द्वारा नशे की हालत (Drunk mode) में किया गए अपराध को परिभाषित (Define crime) करती है, जिसमें विशेष आशय या ज्ञान का होना अपेक्षित है. तो आइए जानते हैं कि आईपीसी की धारा 86 इस बारे में क्या कहती है?

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आईपीसी की धारा 86 (Indian Penal Code Section 86)
भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 86 (Section 86) में ऐसे अपराध (Offence) के बारे में बताया गया है, जिसके लिए किसी विशेष आशय या ज्ञान (Special intent or knowledge) की आवश्यकता होती है. IPC की धारा 86 के अनुसार, उन हालात में, जहां कि कोई किया गया कार्य अपराध नहीं होता जब तक कि वह किसी विशिष्ट ज्ञान या आशय से न किया गया हो, कोई व्यक्ति, जो वह कार्य मत्तता की हालत (State of intoxication) में करता है, इस प्रकार बरते जाने के दायित्व के अधीन (Subject to liability) होगा मानो उसे वही ज्ञान (knowledge) था जो उसे होता यदि वह मत्तता में न होता जब तक कि वह चीज, जिससे उसे मत्तता हुई थी, उसे उसके ज्ञान के बिना (Without knowledge) या उसकी इच्छा के विरुद्ध (Against the will) न दी गई हो.

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इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि ऐसे हालात जिसमे किया गया कोई कार्य अपराध नहीं है, जब तक कि वह किसी विशेष ज्ञान या इरादे से नहीं किया जाता है, एक व्यक्ति जो नशे की स्थिति में कार्य करता है, उसके साथ ऐसा व्यवहार किया जाएगा जैसे कि उसके पास वही ज्ञान था जो उसे होता यदि वह नशे में नहीं था.

इसे भी पढ़ें--- IPC Section 85: अपनी मर्जी के खिलाफ नशे में किए गए कार्य से संबंधित है धारा 85 

क्या होती है आईपीसी (IPC)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.

अंग्रेजों ने लागू की थी IPC
ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.

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