झारखंड में कानून व्यवस्था की कमान 1987 बैच के तेज-तर्रार आईपीएस अफसर नीरज सिन्हा को सौंपी गई है. इससे पहले वे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में डीजी के पद पर तैनात थे. आईपीएस नीरज सिन्हा ने पदभार ग्रहण करते ही क्राइम कंट्रोल को अपनी प्राथमिकता बताया है. आजतक से एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने कहा कि अपराध पर लगाम लगाना उनकी पहली प्राथमिकता तो होगी ही, साथ ही उग्रवाद पर नियंत्रण और लॉ एंड ऑर्डर को मेंटेन करना भी उनकी विशेष प्राथमिकता होगी.
नये डीजीपी नीरज सिन्हा ने यह भी कहा कि पुलिस की कार्रवाई का रिजल्ट अनुसंधान से सामने आता है, तो बेहतर क्वालिटी का अनुसंधान हो, ताकि अपराधियों को जल्द पकड़ा जा सके. नये डीजीपी ने कहा कि अभियोजन को भी बेहतर, त्वरित और सशक्त बनाना है, ताकि जिनको सजा मिलनी है, उन्हें जल्द सजा मिल जाए.
नए डीजीपी ने सब इंस्पेक्टर से लेकर कॉन्स्टेबल तक से अपील की है कि वे आम आदमी के साथ शालीनता से व्यवहार करें. उन्होंने कहा कि राज्य पर जो साइबर क्राइम का धब्बा लगा है, उसे मिटाने की पूरी कोशिश करेंगे. साइबर क्राइम पर लगाम लगाया जाएगा, साथ ही उन्होंने उग्रवादियों और नक्सलियों के लिए बनी सरेंडर नीति को प्रमोट करने की भी बात कही.
बता दें कि साइबर क्राइम के मामले में झारखंड का जामताड़ा देश का नंबर एक जिला बन चुका है. देश के किसी भी कोने में साइबर ठगी होती है, तो 80 फीसदी मामलों में जामताड़ा के करमाटांड़ का मोबाइल लोकेशन आता है. ठगी किसी भी राज्य में हो, वहां की पुलिस यहां जरूर आती है. यहां के मनी हैकर पूरे देश के लिए चुनौती बने हुए है.