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मोसाद: फोन बम, जहर की सुई...बदले के लिए हर हद पार करती है इजरायली एजेंसी

मोसाद अपने दुश्मनों को मौत देती है. दुनिया की इस सबसे घातक इस खुफिया एजेंसी ने अपने इस सिद्धांत को कई बार सही साबित किया है. 1972 में म्यूनिख ओलंपिक में जब आतंकियों ने इजरायल के 11 खिलाड़ियों की हत्या कर दी थी तो मोसाद ने 20 साल लंबा ऑपरेशन चलाकर एक आतंकी को चुन चुनकर मारा था. 

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मोसाद बेहद खतरनाक एजेंसी मानी जाती है
मोसाद बेहद खतरनाक एजेंसी मानी जाती है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 2012 हमले की जांच कर चुका है मोसाद
  • शुक्रवार के हमले पर मोसाद की नजर

दिल्ली में इजरायली दूतावास के पास IED धमाके ने दुनिया भर में फैले इजरायलियों को आतंक के खतरे के प्रति फिर से आगाह कर दिया है. इजरायल ने इन्ही खतरों से निपटने के लिए और इजरायली संसाधनों की रक्षा के लिए दुनिया की सबसे तेज तर्रार और खतरनाक खुफिया एजेंसी का गठन किया है.  

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अभी तो भारत की एजेंसियां ही इस विस्फोट की जांच कर रही है, लेकिन इस धमाके और इसके जांच के नतीजों पर मोसाद की भी नजर है. रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में कहीं भी इजरायली ठिकानों या व्यक्तियों पर हमला होता है तो मोसाद इसकी समानांतर जांच करती है. अभी ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस मामले की जांच के लिए मोसाद के एजेंट घटनास्थल पर पहुंचेंगे या नहीं. लेकिन इस जांच की अपडेट पर मोसाद की नजर है.

इजरायली हितों की रक्षा करना मोसाद का सुप्रीम लक्ष्य है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए इसके एजेंट डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल तोड़ने में भी पीछे रहते हैं. 

मोसाद का मतलब मौत

मोसाद अपने दुश्मनों को मौत देती है. दुनिया की इस सबसे घातक इस खुफिया एजेंसी ने अपने इस सिद्धांत को कई बार सही साबित किया है. 1972 में म्यूनिख ओलंपिक में जब आतंकियों ने इजरायल के 11 खिलाड़ियों की हत्या कर दी थी तो मोसाद ने 20 साल लंबा ऑपरेशन चलाकर एक आतंकी को चुन चुनकर मारा था. 

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बदला लेने दुनिया के हर कोने में पहुंच जाते हैं

दरअसल एक बार जो मोसाद की निगाह में चढ़ गया, उसका बचना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है. मोसाद के खूंखार एजेंट उसे दुनिया के किसी भी कोने से ढूंढ निकालने का दमखम रखते हैं. यही वजह है कि इजरायल की इस खुफिया एजेंसी को दुनिया की सबसे खतरनाक एजेंसी कहा जाता है. मोसाद की पहुंच हर उस जगह तक है जहां इजरायल या उसके नागरिकों के खिलाफ कोई भी साजिश रची जा रही हो. मोसाद का इतिहास 63 साल पुराना है. इसका मुख्यालय इजरायल के तेल अवीव शहर में है.

मोसाद यानी इंस्टीट्यूट फॉर इंटेलीजेंस एंड स्पेशल ऑपरेशन. ये इजरायल की नेशनल इंटेलीजेंस एजेंसी है. इजरायल की स्थापना के तुरंत बाद 13 दिसंबर 1949 को 'सेंट्रल इंस्टीट्यूशन फॉर को-ऑर्डिनेशन' के बतौर इसका गठन हुआ था. इस एजेंसी को बनाने का प्रस्ताव रियुवैन शिलोह द्वारा प्रधानमंत्री डेविड बैन गुरैना के कार्यकाल में दिया गया था. उन्हें ही मोसाद का डायरेक्टर बनाया गया. 

फोन बम, उड़ती हुई कारें, जहर की सुई...बदले के लिए कुछ भी 

बात 1972 की है. जर्मनी के म्यूनिख में ओलंपिक चल रहा था. यहां पर आतंकियों ने इजरायल के 11  खिलाड़ियों की हत्या कर दी थी. इस घटना के बाद इजरायल में शोक और गुस्से लहर दौड़ गई. इजरायली सरकार ने अपने देशवासियों से वादा किया और एक एक आतंकी को चुन-चुनकर मारा.

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इजरायल ने अपनी खुफिया एजेंसी मोसाद की मदद से उन सभी लोगों के कत्ल की योजना बनाई, जिनका वास्ता इस घटना से था. इस मिशन को नाम दिया गया 'रैथ ऑफ गॉड' यानी ईश्वर का कहर.

इसके बाद मोसाद ने जो किया वो जासूसी की दुनिया का सबसे खौफनाक बदला बन गया. मोसाद ने दुनिया में घूम-घूमकर अपने दुश्मनों को मौत बांटे. इसके लिए मोसाद ने फोन बम, नकली पासपोर्ट, जहर की सूई, बम, कार बम का इस्तेमाल किया.  20 साल तक चले इस ऑपरेशन में मोसाद ने लगभग 9 फिलीस्तीनियों को मार डाला. इस अभियान में इटली के नागरिक की मौत हुई. मोसाद के एजेंट महिलाएं बनें. 

अपना इंतकाम पूरा होने के बाद मोसाद अपने टारगेट के परिवार को एक बुके भेजते थे. जिसपर लिखा होता था- 'ये याद दिलाने के लिए कि हम ना तो भूलते हैं, ना ही माफ करते हैं.'

13 फरवरी 2012 का हमला

बता दें कि साल 2012 में जब भारत में इजरायली दूतावास की कार पर हमला हुआ था तो मोसाद इस जांच में शामिल हुआ था. मोसाद की जांच के बाद ही पता चला था कि इस हमले के पीछे ईरान के रेव्यूलेशनरी गार्ड्स कॉप्स और कुद्स फोर्स का हाथ है.  

पुरानी है मोसाद और ईरान की अदावत

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ईरान और इजरायल की एजेंसी मोसाद की अदावत पुरानी है. साल 2012 में ईरान ने अपने परमाणु वैज्ञानिक मसूद अली-मोहम्मदी की हत्या में दोषी करार दिए गए इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के एक जासूस को फांसी दे दी थी.  ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक 2011 में ईरान के परमाणु वैज्ञानिक मोहम्मदी की हत्या के आरोप में मोसाद के जासूस माजिद जमाली फैशी को दोषी ठहराया गया था. 

 

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