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दरिंदगी के 11 सबूत, 45 पन्नों की चार्जशीट और संजय रॉय के गुनाह... कोलकाता कांड के विलेन की पूरी कहानी

जूनियर डॉक्टर रेप और मर्डर केस में अगर सीबीआई ने सबसे ज़्यादा दिन और सबसे ज़्यादा घंटे किसी से पूछताछ की तो वो संदीप घोष है. लेकिन हैरत की बात है कि 58 दिनों बाद जूनियर डॉक्टर केस में सीबीआई ने जो चार्जशीट पेश की है, उसमें कहीं दूर-दूर तक इनका नाम ही नहीं है.

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CBI ने संजय रॉय के खिलाफ 11 अहम सबूत पेश किए हैं
CBI ने संजय रॉय के खिलाफ 11 अहम सबूत पेश किए हैं

Junior Doctor Rape Murder Case Chargesheet: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल और अस्पताल की जूनियर डॉक्टर के रेप और मर्डर केस की पहली चार्जशीट सीबीआई विशेष अदालत में दाखिल कर चुकी है. इससे पहले करीब सप्ताहभर तक हर न्यूज़ चैनल की स्क्रीन पर दिन रात आरजी कर मेडिलक कॉलेज अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को दिखाया गया. उसके बारे में हर बात की जानकारी दी गई और संदीप घोष को सबसे बड़ा विलन बनाकर पेश किया गया था. लेकिन हैरत की बात ये है कि सीबीआई की चार्जशीट में कहीं उसका नाम तक नहीं है.

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चार्जशीट में नहीं है संदीप घोष का नाम
जूनियर डॉक्टर रेप और मर्डर केस में अगर सीबीआई ने सबसे ज़्यादा दिन और सबसे ज़्यादा घंटे किसी से पूछताछ की तो वो यही संदीप घोष है. लेकिन हैरत की बात है कि 58 दिनों बाद जूनियर डॉक्टर केस में सीबीआई ने जो चार्जशीट पेश की है, उसमें कहीं दूर-दूर तक इनका नाम ही नहीं है और इसी एक चीज़ ने कोलकाता पुलिस को नाराज़ कर दिया है. नाराज़गी की वजह ये कि संदीप घोष के साथ-साथ सीबीआई ने इसी केस में ताला पुलिस स्टेशन के इंचार्ज अभिजीत मंडल को भी गिरफ़्तार किया था. पर कमाल ये कि अभिजीत मंडल का नाम भी चार्जशीट में कहीं नहीं है जबकि दोनों इस वक़्त जेल में बंद हैं.

इस आरोप में हुई थी संदीप घोष और अभिजीत की गिरफ्तारी
दरअसल सोमावर को सियालदह की जिस स्पेशल कोर्ट में सीबीआई ने चार्जशीट दाख़िल की है उस चार्जशीट में जूनियर डॉक्टर के रेप और मर्डर के लिए सिर्फ और सिर्फ एक शख़्स को ही आरोपी बनाया है और वो है कोलकाता पुलिस का सिविक वॉलेंटियर संजय रॉय. हालाकि इसी केस में सीबीआई ने मौका-ए-वारदात से सबूतों को मिटाने, क्राइम सीन से छेड़छाड़ करने, पुलिस को वारदात की सूचना देरी से देने और पुलिस को एक्शन देरी से लेने के लिए संदीप घोष और अभिजीत मंडल को गिरफ़्तार किया था.

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चार्जशीट ने चौंकाया 
संदीप घोष पर इन इल्ज़ामों के अलावा बतौर प्रिंसिपल अस्पताल में घोटाला करने का भी इल्ज़ाम है. जिसकी सीबीआई के साथ-साथ ईडी भी जांच कर रही है. लेकिन घोटाले से हटकर क्राइम सीन के सबूतों से छेड़छाड़ के मामले में संदीप घोष का चार्जशीट में ना होना सचमुच चौंकाने वाला है. क्योंकि इससे ऐसा लगता है जैसे क्राइम सीन के साथ छेड़छाड़ के तमाम इल्ज़ाम ग़लत थे. हालाकि ये भी मुमकिन है कि शायद आगे चलकर सीबीआई इसी मामले में दूसरी चार्जशीट दाखिल करे और उसमें इन दोनों के नाम हो.

संजय रॉय के खिलाफ 11 अहम सबूत
45 पन्नों की इस चार्जशीट में सीबीआई ने ये साफ कर दिया है कि ट्रेनी जूनियर डॉक्टर के साथ गैंगरेप ने बल्कि रेप हुआ था. रेप के बाद गला घोंट कर उसकी हत्या कर दी गई थी. और ये दोनों काम अकेले संजय रॉय ने किए थे. सीबीआई ने चार्जशीट में कुल 11 ऐसे सबूत पेश किए जो संजय रॉय के ख़िलाफ हैं. और इन्हीं 11 सबूते के बिना पर संजय रॉय के ख़िलाफ़ रेप और मर्डर के चार्जेज़ लगाए हैं. आइए देखते हैं कि आखिर सीबीआई की चार्जशीट में संजय रॉय के ख़िलाफ वो 11 सबसे बड़े सबूत कौन-कौन से हैं-

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संजय रॉय के ख़िलाफ पहला सबूत
8 और 9 अगस्त की रात आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के तीसरी मंज़िल के उस इमरजेंसी बिल्डिंग में जिसके सेमिनार हॉल में वारदात हुई, सीसीटीवी कैमरों में संजय रॉय की मौजूदगी.

संजय रॉय के ख़िलाफ दूसरा सबूत
संजय रॉय के मोबाइल के कॉल डिटेल रिकार्ड यानि सीडीआर और उसके मोबाइल के लोकेशन से भी ये साबित होना कि 8 और 9 अगस्त की रात वो आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बिल़्डिंग के अदंर था.

संजय रॉय के ख़िलाफ तीसरा सबूत
पोस्टमॉर्टम के दौरान ट्रेनी जूनियर डॉक्टर की लाश से संजय रॉय का डीएनए पाया जाना.

संजय रॉय के ख़िलाफ चौथा सबूत
संजय रॉय के जीन्स पैंट और चप्पल से ट्रेनी जूनियर डॉक्टर के ख़ून के निशान मिलना. वारदात के बाद कोलकाता पुलिस ने संजय ऱॉय से उसके कपड़े और चप्पल जो उसने छुपा दिए थे, उसकी बताई हुई जगह से 12 अगस्त को बरामद की थी.

संजय रॉय के ख़िलाफ पांचवा सबूत
आरजी कर अस्पताल के सेमिनार हॉल में जिस जगह से ट्रेनी जूनियर डॉक्टर की लाश मिली थी वहां से कुछ बाल के टुकड़े मिले थे, जो बहुत छोटे थे. फ़ॉरेसिंक जांच में बाल के ये टुकड़े संजय रॉय के ही पाए गए.

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संजय रॉय के ख़िलाफ छठा सबूत
क्राइम सीन से एक ब्लूटूथ इयरफ़ोन नेकबैंड मिला था. 8 और 9 अगस्त की रात अस्पताल के जितने सीसीटीवी कैमरे में संजय रॉय क़ैद हुआ था उन सभी में उसके गले में वो ब्लूटूथ इयरफ़ोन नेकबैंड दिख रहा था. लेकिन वारदात के बाद आख़िरी बार जब वो सेमिनार हॉल और अस्पताल से बाहर निकल रहा था तब उसके गले में वो इयरफ़ोन नेकबैंड नहीं था. संजय रॉय की गिरफ़्तारी के बाद जब उसके फ़ोन से उस ब्लूटूथ इयरफ़ोन को कनेक्ट किया गया तो वो फ़ौरन कनेक्ट हो गया. यानि क्राइम सीन से मिला इयरफ़ोन संजय रॉय का ही था.

संजय रॉय के ख़िलाफ सातवां सबूत
सजंय रॉय के जिस्म पर चोट के कई निशान मिले थे. 10 अगस्त को उसकी गिरफ़्तारी के बाद जब उसका एमएलसी कराया गया तो उस एमएलसी के मुताबिक वो ज़ख़्म 24 से 48 घंटे पुराने थे. एमएलसी के हिसाब से संजय ऱॉय के जिस्म पर जो खरोंचे या चोटें आई वो 8 अगस्त की रात 12 बजे के बाद से लेकर 9 अगस्त की सुबह के दरम्यान आई. और यही वो वक़्त था जब ट्रेनी जूनियर डॉक्टर का क़त्ल हुआ था.

संजय रॉय के ख़िलाफ आठवां सबूत
संजय रॉय के जिस्म पर चोट के जो निशान पाए गए थे डॉक्टरी जांच और रिकॉर्ड के मुताबिक वो वैसी चोटें थीं जो अमूमन ख़ुद को बचाने के लिए ज़बरदस्ती किए जाने के दौरान पीड़ित अपने बचाव में करती है.

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संजय रॉय के ख़िलाफ नौंवा सबूत
संजय रॉय ने गिरफ़्तारी के बाद पेशी के दौरान अदालत में और फिर पूछताछ के दौरान सीबीआई के सामने ये दावा किया था कि वो किसी का रेप नहीं कर सकता क्योंकि वो उसके लिए सक्षम नहीं था. जबकि मेडिकल जांच के बाद ये साबित हो गया कि वो झूठ बोल रहा है और वो ऐसा करने में सक्षम है.

संजय रॉय के ख़िलाफ दसवां सबूत
सेंट्रल फ़ॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी कोलकाता की रिपोर्ट के मुताबिक संजय रॉय के कपड़ों के धागों के टुकड़े क्राइम सीन पर मिले जूनियर डॉक्टर के अंडर गारमेंट्स के साथ पाया गया.

संजय रॉय के ख़िलाफ ग्यारवां सबूत
सेंट्रल फ़ॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी कोलकाता की रिपोर्ट से ये भी सामने आया कि जूनियर डॉक्टर के साथ ज़बरदस्ती किए जाने के दौरान कुर्ती के कपड़े दोनों तरफ़ से फट गए थे. 

संजय रॉय के ख़िलाफ इन 11 सबूतों के अलावा सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कुछ और सबूतों का भी ज़िक्र किया है. चार्जशीट के मुताबिक, ट्रेनी जूनियर डॉक्टर का पोस्टमार्टम आरजी कर अस्पताल में ही हुआ था. पोस्टमॉर्टम को लेकर तमाम तरह के शक जताए गए थे. इसलिए सीबीआई ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पोस्टमार्टम के दौरान हुई वीडियोग्राफी के बारे में दोबारा राय लेने के लिए कल्याणी के एम्स के FMT हेड की अगुवाई में एक मेडिकल बोर्ड के पास भेजा. बोर्ड ने पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया और उसकी वीडियोग्राफी को देखने के बाद अपनी राय दी कि पोस्टमार्टम मे कहीं कोई गलती नहीं की गई. यानि आरजी कर अस्पताल मे जूनियर डॉक्टर का पोस्टमार्टम नियम के हिसाब से हुआ था. 

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