Law and Order: लॉ एंड ऑर्डर सीरीज के तहत हम आपको पुलिस (Police) और कानून (Law) से जुड़ी जानकारियां देने की कोशिश रहे हैं. इसी श्रृंखला में अब हम बात करेंगे राष्ट्रीय पुलिस आयोग (National Police Commission) की. जिसने भारत में पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे. लेकिन उन सुझावों को अमल में नहीं लाया जा सका.
गठन और रिपोर्ट
भारत में राष्ट्रीय पुलिस आयोग का गठन 15 नवंबर 1977 को किया गया था. जिसका मकसद पुलिस सुधार के लिये अनुशंसा करना था. इस आयोग के अध्यक्ष धरमवीर थे. पुलिस आयोग ने फरवरी 1979 और मई 1981 के दौरान कुल आठ रिपोर्ट तैयार करके सरकार को सौंपी थी. हालांकि 1980 में तत्कालीन सरकार गिर जाने की वजह से यह आयोग भी संकट में आ गया था.
ये थी पुलिस आयोग की प्रमुख सिफारिशें-
- देश के हर राज्य में एक स्टेट सिक्योरिटी कमीशन का गठन किया जाना चाहिए.
- आयोग के जांच संबंधी कार्य को लॉ एंड ऑर्डर से अलग रखा जाना चाहिए.
- पुलिस प्रमुख की नियुक्ति के लिए एक विशेष प्रक्रिया का पालन होना चाहिए.
- पुलिस प्रमुख का सेवाकाल कम से कम होना चाहिए.
- देश में नया पुलिस अधिनियम लागू किया जाना चाहिए.
- पुलिस आयोग की रिपोर्ट के अनुसार पुराना ढांचा बदलना चाहिए.
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हालांकि आयोग की उपरोक्त सिफारिशों का कोई खास इस्तेमाल नहीं किया गया. कुछ कम महत्व की संस्तुतियों को मान लिया गया और बाकी पूरी रिपोर्ट को नजरअंदाज कर दिया गया. हर सरकार ने पुलिस का पुराना ढांचा ही बेहतर समझा और मनमर्जी से पुलिस का उपयोग किया. उस आयोग की संस्तुतियों पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई. ऐसा माना जाता है कि अगर उस आयोग की सिफारिशें मान ली गई होती तो आज देश में पुलिस का ढांचा और कार्य प्रणाली और बेहतर होती.