भारत की कानून व्यवस्था (Law and Order) में पुलिस थाने (Police Station) कितने अहम होते हैं, ये तो आप जानते ही हैं. हर राज्य के जनपदों में कई थाने होते हैं. थानों में काम करने की एक अलग प्रक्रिया होती है. जिसमें कई तरह के ऐसे शब्द होते हैं, जिनका इस्तेमाल पुलिस (Police) के लिए तो आम बात है, लेकिन सामान्य जन के लिए वो शब्द नए या अजीब हो सकते हैं. ऐसा ही एक शब्द है 'तहरीर.' आइए जानते हैं कि तहरीर (Tahrir) शब्द का अर्थ क्या है, ये कहां इस्तेमाल होता है.
तहरीर का मतलब (Meaning of Tahrir)
हमारा पुलिस एक्ट (Police Act) अंग्रेजों के जमाने का है. इसलिए उसमें अंग्रेजी (English) और उर्दू (Urdu) के बहुत से शब्द मिलते हैं. ऐसा ही एक उर्दू का शब्द है तहरीर. जिसका इस्तेमाल थानों में खूब होता है. दरअसल, तहरीर का मतलब होता है- लिखी हुई बात, लिखना, लिखावट या लिखे गए शब्द.
पुलिस में तहरीर
हमारे कानून (Law) में सभी को बराबरी का हक है. अगर कोई नागरिक किसी अपराध (Crime) का शिकार होता है. या उसके साथ कोई घटना होती है, जिसमें वह शिकार बना या पीड़ित. तो वह अपने नजदीकी या अपने इलाके के पुलिस स्टेशन यानी थाने में जाकर शिकायत कर सकता है. पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए शिकायत मौखिक नहीं बल्कि लिखकर दी जाती है.
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थाने में वादी (Plaintiff), पीड़ित (Victim) या शिकायतकर्ता (Complainant) जो पत्र लिखकर देता है, उसे पुलिस की भाषा में तहरीर कहते हैं. उसी तहरीर के आधार पर पुलिस एफआईआर दर्ज करती है. वादी, पीड़ित या फरियादी की तहरीर यानी एप्लिकेशन के आधार पर ही पुलिस आगे की कार्रवाई को अंजाम देती है.
तो अब आप समझ गए होंगे कि तहरीर शब्द का इस्तेमाल कब, क्यों और कहां होता है. तहरीर शब्द का अर्थ लिखना, लिखाई, लिखावट, लेख, लेखशैली, लिखी हुई बात, लिखा हुआ मजमून या निबंध, लिखित प्रमाणपत्र, लेखबद्ध प्रमाण, भाग्यलेख्य पत्र आदि भी जाना जाता है.