महाराष्ट्र के अकोला जिले में पुलिस ने एक उर्दू माध्यम स्कूल के पदाधिकारियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया है. कार्रवाई उस वक्त अंजाम दी गई, जब राज्य अल्पसंख्यक आयोग की टीम ने अचानक उस संस्थान का दौरा किया.
महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे जिया खान ने मंगलवार को पातुर स्थित स्कूल का दौरा किया, जहां कुछ महिला शिक्षिकाओं ने शिकायत की थी कि उन्हें उत्पीड़न और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है.
पीड़ित महिला टीचर्स ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने उनसे उनके वेतन का 20-30 प्रतिशत जबरन वसूला है. आयोग के अध्यक्ष प्यारे जिया खान ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया. उनके दौरे के फौरन बाद पातुर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई.
इस मामले में चार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 (महिला के साथ मारपीट या आपराधिक बल का प्रयोग, उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से), 75 (यौन उत्पीड़न), 296 (अश्लील कृत्य) और 308 (2) (जबरन वसूली) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. हालांकि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.
मीडिया से बात करते हुए आयोग के अध्यक्ष प्यारे जिया खान ने दावा किया कि उन्हें अपने औचक निरीक्षण के दौरान कक्षाओं में न तो बच्चे मिले और न ही शिक्षक. एक ही परिसर में दो स्कूल अवैध रूप से चलाए जा रहे हैं और महिलाओं के साथ उत्पीड़न की घटनाएं हुई हैं.
प्यारे जिया खान ने कहा कि सरकार फंड तो देती है, लेकिन योजनाओं के सही तरीके से क्रियान्वयन न होने के कारण राज्य में उर्दू स्कूलों की हालत खराब है. ऐसे में लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.