वसूली कांड में घिरे महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंच गए हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से उनके खिलाफ हो रही ठोस कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है. बताया जा रहा है कि देशमुख के वकील सुप्रीम कोर्ट से याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई करने की मांग कर सकते हैं. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि ED भी इस याचिका का विरोध करने के लिए तैयार है.
दरअसल, मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह (Parambir Singh) ने एक चिट्ठी लिखकर अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपये की वसूली करने का आरोप लगाया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि देशमुख गृहमंत्री रहते हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली करते थे.
इसी मामले की जांच में ED अनिल देशमुख से पूछताछ करना चाहती है. ED की ओर से पूछताछ के लिए देशमुख को समन भेजे जा चुके हैं, लेकिन उनकी ओर से बार-बार बढ़ती उम्र और खराब तबीयत का हवाला दे दिया जाता है. देशमुख को आज भी ED के सामने पेश होना था, लेकिन वो आज दिल्ली में हैं.
देशमुख के वकील इंदरपाल सिंह ED दफ्तर पहुंचे और जवाब दिया. दफ्तर से बाहर आने के बाद उन्होंने बताया कि ED ने उनका रिप्लाय पढ़ा है. ED को अनिल देशमुख के बेटे ऋषिकेश की जानकारी भी दी गई है. उन्होंने कहा कि अनिल देशमुख कहीं भागे नहीं जा रहे हैं.
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ED भी करेगी याचिका का विरोध
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अनिल देशमुख की याचिका का विरोध ED भी करेगी. सूत्रों ने बताया कि ED किसी भी तरह की राहत का विरोध करेगी. ED अनिल देशमुख के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के मामले की जांच कर रही है और ऐसा भी माना जा रहा है कि अगर वो पेश होते हैं तो उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है.
सूत्रों का कहना है कि अनिल देशमुख की याचिका का विरोध करने के लिए ED के पास कुछ तथ्य है. ED इस आधार पर उनका विरोध कर सकती है कि जांच में शामिल होने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था और कई समन के बाद भी वो पेश नहीं हुए.
सचिन वाजे ने किया था खुलासा
मुंबई पुलिस के पूर्व एपीआई सचिन वाजे (Sachin Vaze) ने अपने बयान में ED को बताया था कि जब वो मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच में थे तो दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच मुंबई के आर्केस्ट्रा बार से 4.70 करोड़ रुपये वसूल कर अनिल देशमुख को सौंप दिया गया था. बाद में यही रकम कथित तौर पर दिल्ली स्थित 4 शेल कंपनियों (Shell Companies) को दान के तौर पर एक ट्रस्ट की ओर से दे दिया जाता था. ये वही ट्रस्ट था जिसका मालिकाना हक अनिल देशमुख और उनके परिवार के सदस्यों के पास है.
ED के अधिकारियों के मुताबिक, अब तक ऐसी 13 शेल कंपनियों की पहचान की जा चुकी है, जिन पर सीधे तौर से अनिल देशमुख और उनके परिवार का नियंत्रण था. इस मामले में हाल ही में ED ने देशमुख के पीए और पीएस को गिरफ्तार किया है.