महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने आईपीएस अधिकारी भाग्यश्री नवटेक के खिलाफ जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप में मामला दर्ज किया है. इस आईपीएस अफसर ने एक क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी से जुड़े 1,200 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच का नेतृत्व किया था. अब उसी जांच के मामले में वो खुद भी फंस गईं हैं. बुधवार को पुणे पुलिस के एक अधिकारी ने इस बारे में जानकारी दी.
घोटाले की जांच में प्रक्रियात्मक खामियों को चिह्नित करने वाली सीआईडी रिपोर्ट के आधार पर नवटेक और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ महाराष्ट्र गृह विभाग के निर्देश पर मामला दर्ज किया गया था. आईपीएस अफसर भाग्यश्री नवटेक ने पुणे जिले में भाईचंद हीराचंद रईसनी क्रेडिट सोसाइटी से जुड़े घोटाले से संबंधित मामलों की जांच के लिए साल 2021 में डीसीपी (आर्थिक अपराध शाखा) के रूप में विशेष जांच दल का नेतृत्व किया था.
पुणे पुलिस के एक अधिकारी ने इस मामले में पीटीआई को बताया कि सीआईडी (अपराध जांच विभाग) ने कथित भाईचंद हीराचंद रईसनी (बीएचआर) घोटाले से संबंधित जांच की जांच की. सीआईडी ने राज्य के गृह विभाग को अपनी टिप्पणियों और निष्कर्षों का विवरण देते हुए एक रिपोर्ट सौंपी. उन्होंने कहा कि राज्य के गृह विभाग ने पुणे पुलिस को सीआईडी रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है.
पुलिस अधिकारी ने कहा कि गृह विभाग के आदेश के बाद ही भाग्यश्री नवटेक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जिन्होंने बीएचआर घोटाले में दर्ज मामलों की जांच के लिए गठित एसआईटी का नेतृत्व किया था. उन्होंने कहा कि सीआईडी जांच ने नवटेक द्वारा घोटाले के मामलों की जांच के दौरान प्रक्रियागत खामियों की ओर इशारा किया.
आईपीएस अधिकारी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया, जिसमें 120-बी (आपराधिक साजिश की सजा), 466 (न्यायालय या सार्वजनिक रजिस्टर आदि के रिकॉर्ड की जालसाजी), 474 (जाली दस्तावेज रखना) और 201 (साक्ष्यों को गायब करना) शामिल हैं. पुलिस अधिकारी ने कहा कि एक ही दिन में एक ही अपराध के तहत तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं, जो एक प्रक्रियागत चूक और जालसाजी से जुड़े है.
IPS ऑफिसर भाग्यश्री नवटेक इस वक्त चंद्रपुर में राज्य रिजर्व पुलिस बल (SRPF) की अधीक्षक के रूप में तैनात हैं. साल 2015 में हुए इस घोटाले में फिक्स्ड डिपॉजिट पर आकर्षक ब्याज का वादा करके बड़ी संख्या में लोगों को धोखा दिया गया था.