
American Woman Forest Conspiracy: महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के जंगल में इसी साल जुलाई में एक राहगीर की नजर एक महिला पर पड़ी, जो एक पेड़ के साथ ज़ंजीरों से बंधी थी. उस शख्स ने फौरन इस बात की खबर पुलिस को दी. पुलिस मौके पर पहुंचती है और उस महिला को ज़ंजीरों से आजाद करती है. इसके बाद उस महिला को फौरन अस्पताल ले जाया जाता है. छानबीन में पता चलता है कि वो महिला एक अमेरिकी नागरिक है. उसे ज़जीरों में बांधने वाला भी कोई अनजान शख्स नहीं, बल्कि खुद उसका हिंदुस्तानी पति था. लेकिन अब इस कहानी में एक नया ट्विस्ट आ गया है.
हैरान हैं वैज्ञानिक
बगैर खाए पिए कोई इंसान आखिर कितने दिनों तक जिंदा रह सकता है? सवाल दिलचस्प है. लेकिन अगर साइंस की बात करें तो जवाब है कि कोई भी इंसान आम तौर पर एक से दो हफ्ते तक ही बिना खाए जिंदा रह सकता है, वो भी तब जब उसे कम से कम इतने दिनों तक पीने के लिए पानी मिलता रहे. लेकिन महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग के जंगलों में मिली अमेरिकी महिला की कहानी कुछ ऐसी है, जिसने साइंसदानों का दिमाग भी हिला दिया है.
घने जंगलों में ज़ंजीरों से बंधी थी विदेशी महिला
वजह ये कि ये महिला सिंधुदुर्ग के इन घने जंगलों में ज़ंजीरों से बंधी-बंधी करीब चालीस दिन यानी क़रीब छह हफ्ते तक बगैर खाए-पिए यूं ही जिंदा रही. और तब तक जिंदा रही, जब तक कि जंगल में मवेशी चराने गए एक किसान की नजर उस पर नहीं पड़ी. चालीस दिनों से सियार, चीते और दूसरे ख़ौफ़नाक जानवरों से भरे इस जंगल में इस महिला का बिना भोजन-पानी के जिंदा रहना जहां अपने-आप में किसी करिश्मे से कम नहीं है, वहीं इसका जंगलों के बीच पहुंचना और वहां उसे किसी का ज़ंजीरों से जकड़ कर भाग जाना, ये भी कम रहस्यमयी नहीं है.
27 जुलाई 2024, सुबह करीब 7 बजे
अब हम आपको 50 साल की अमेरिकी महिला ललिता काई के साथ हुए इस अजीबोगरीब हादसे की कहानी सिलसिलेवार तरीके से बताएंगे. इस कहानी की शुरुआत होती है 27 जुलाई की सुबह करीब 7 बजे, जब मुंबई से करीब साढ़े चार सौ किलोमीटर दूर सिंधुदुर्ग ज़िले के सावंतवाड़ी के जंगलों में एक किसान को किसी के रोने की आवाज सुनाई देती है.
60 साल के किसान भावजी पांडुरंग जंगलों में अकसर गाय चराने जाया करते थे. आवाज सुन कर पहले उन्हें लगता है कि शायद कोई जानवर कराह रहा है. लेकिन अगले कुछ दिनों तक जब वो ये आवाज लगातार सुनते रहे, तो फिर उन्होंने ये पता करने का फैसला किया कि आखिर माजरा गया है. बस इसके बाद तो उन्हें जंगल के बीचों-बीच जो कुछ दिखा, उससे उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं.
कंकाल बन चुकी थी महिला
वहां जंगल के अंदर एक पेड़ के नीचे उन्हें एक महिला जंजीरों से बंधी हुई मिली. जो लगातार रो रही थी. देखने से लगता था कि वो यहां कई दिनों से यूं ही पड़ी है. अब पांडुरंग ने अपने गांव वालों को इसकी खबर दी. महिला को रेसक्यू किया गया. उसके पास से पुलिस को एक बैग, मोबाइल फोन, टैबलेट और 31 हजार रुपये मिले. साथ में अमेरिकन पासपोर्ट और आधार कार्ड की कॉपी भी मिली.
लेकिन सवाल वही था कि आखिर ये महिला वहां इस हाल में कैसे पहुंची? भूख प्यास से कंकाल बन चुकी महिला बात करने के काबिल तो नहीं थी, लेकिन उसने किसी तरह लिख कर बताया कि उसे उसका पति इस हाल में जंगल में छोड़ कर चला गया और वो 40 दिनों से वहां यू ही बिना खाये पिए पड़ी रही.
जांच में सामने आई अजब कहानी
महिला को इलाज के लिए पहले नजदीकी अस्पताल में ले जाया गया और फिर उसकी हालत को देखते हुए गोवा के इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री एंड ह्यूमन बिहेवियर में भर्ती करवाया गया. अब पुलिस को ये पता करना था कि आखिर ललिता काई नाम की इस अमेरिकी महिला के साथ उसके पति ने ऐसा किया ही क्यों?
तो सिंधुदुर्ग पुलिस की मानें तो जांच में अजीब कहानी सामने आई. पता चला कि महिला की तो शादी ही नहीं हुई है. वो पिछले दस सालों से भारत में रह रही है, लेकिन अब जब उसका वीजा समाप्त होने को है, तो उसने भारत में रहने के लिए वीजा बढ़वाने के इरादे से खुद ही सारा ड्रामा रचा था.
वीजा की खातिर खुद रची झूठी कहानी
पुलिस ने पाया है कि महिला ने खुद को जंगलों के बीच जंजीर से बांध कर चाबी दूर फेंक दी थी. तफ्तीश में पुलिस को चाबी उसे जंगल में ही पड़ी भी मिल गई. जाहिर है महज वीजा के लिए कोई भी सामान्य आदमी ना तो ऐसी झूठी कहानी गढ़ सकता है और ना ही अपनी जिंदगी यूं खतरे में डाल सकता है. यही वजह है कि पुलिस को लगता है कि उसकी दिमागी हालत की जांच जरूरी है.
कई सवालों के जवाब तलाश रही है पुलिस
भारत में महिला का पता तामिलनाडु का है. ऐसे में सवाल ये भी है कि आखिर महिला महाराष्ट्र के इन घने जंगलों में क्यों पहुंची? या फिर उसने वीजा के लिए जो नाटक रचा, उसके लिए उसने इस जगह को ही क्यों चुना? वीजा के लिए वो सामान्य तरीके से अप्लाई भी तो कर सकती थी. जाहिर है इस केस में फिलहाल कई सवाल हैं. जिसका जवाब पुलिस तलाश कर रही है.