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क्या है किसी वॉन्टेड अपराधी को प्रत्यर्पण कराने का पूरा प्रोसेस, अनमोल बिश्नोई को लाने के लिए क्या-क्या कर रही हैं एजेंसियां

संबंधित एजेंसियां जैसे, CBI, NIA, या इंटरपोल यह सुनिश्चित करती हैं कि वॉन्टेड व्यक्ति कहां है. इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी किया जाता है. यह नोटिस सभी सदस्य देशों को सतर्क करता है कि वॉन्टेड अपराधी की गिरफ्तारी में मदद करें.

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अनमोल को भारत लाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है
अनमोल को भारत लाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है

Gangster Anmol Bishnoi Extradition Preparation: अमेरिका में अनमोल बिश्नोई की गिरफ्तारी के बाद लगातार सवाल उठ रहा है कि उसे भारत कब लाया जाएगा? कब अमेरिका उसे भारतीय एजेंसियों के हवाले करेगा? दरअसल, किसी वॉन्टेड अपराधी को एक देश से दूसरे देश प्रत्यर्पित करने (extradition) का प्रोसेस अंतरराष्ट्रीय कानून, द्विपक्षीय संधियों, और संबंधित देशों के आंतरिक कानूनों पर निर्भर करता है.

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अंतरराष्ट्रीय कानून में प्रत्यर्पण
प्रत्यर्पण को लेकर हर देश का अपना कानून है और वहां की प्रक्रिया भी अलग है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून में प्रत्यर्पण से जुड़ी कुछ कॉमन बातें हैं. अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, राजनीतिक अपराध, सैन्य अपराध या धार्मिक अपराध के आरोपी को प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता. इतना ही नहीं, इसके लिए डबल क्रिमिनैलिटी भी होना जरूरी है. यानी जिस व्यक्ति को प्रत्यर्पित करने की मांग की गई है, उसका अपराध दोनों देशों को मानना जरूरी है. गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई जैसे मामले की बात की जाए तो ऐसे मामलों में एजेंसियों द्वारा प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:  

अपराधी की पहचान और लोकेशन का पता लगाना  
   - संबंधित एजेंसियां जैसे, CBI, NIA, या इंटरपोल यह सुनिश्चित करती हैं कि वॉन्टेड व्यक्ति कहां है.  
   - इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी किया जाता है. यह नोटिस सभी सदस्य देशों को सतर्क करता है कि वॉन्टेड अपराधी की गिरफ्तारी में मदद करें.

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प्रत्यर्पण संधि का सत्यापन  
   - संबंधित देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि (extradition treaty) का होना अनिवार्य है. यदि संधि मौजूद नहीं है, तो कूटनीतिक प्रयास किए जाते हैं.  
   - भारत और जिस देश में आरोपी है, उसके बीच संधि की शर्तों को देखा जाता है.  

प्रत्यर्पण अनुरोध का प्रारूप तैयार करना  
   - भारत की ओर से विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय अपराधी की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण का औपचारिक अनुरोध संबंधित देश को भेजते हैं.  
   - इसमें कानूनी दस्तावेज, सबूत, और अपराधी पर लगे आरोप शामिल होते हैं.  

कानूनी कार्रवाई और सुनवाई  
   - संबंधित देश की अदालत में प्रत्यर्पण अनुरोध पर सुनवाई होती है.
   - आरोपी के पास अपने बचाव में वकील रखने और प्रत्यर्पण का विरोध करने का अधिकार होता है.  
   - अदालत तय करती है कि प्रत्यर्पण की अनुमति दी जाए या नहीं.

राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयास
   - सरकार और एजेंसियां कूटनीतिक माध्यम से उस देश पर दबाव बनाती हैं.
   - दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता की जाती है.

प्रत्यर्पण और वापसी 
   - अदालत से अनुमति मिलने के बाद अपराधी को भारत लाया जाता है.  
   - उसे संबंधित एजेंसियों के हवाले किया जाता है, और भारतीय कानून के तहत कार्रवाई की जाती है.  

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अनमोल बिश्नोई का मामला  
गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भाई है और वो उसके गैंग से जुड़ा एक वॉन्टेड अपराधी है. उसके खिलाफ गंभीर आरोप हैं और उसे भारत लाने के लिए भारतीय एजेंसियां निम्नलिखित कदम उठा रही हैं:
  
1. भारतीय एजेंसियों के आग्रह पर इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है.  
2. भारतयी विदेश मंत्रालय और अमेरिकी सरकार के साथ इस मामले में बातचीत जारी है.  
3. कूटनीतिक स्तर पर दबाव बनाया जा रहा है ताकि अनमोल को जल्द से जल्द प्रत्यर्पित किया जा सके.  
4. संबंधित देश की अदालत में प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है.  

यह प्रक्रिया लंबी हो सकती है क्योंकि इसमें कानूनी और कूटनीतिक अड़चनें आती हैं, लेकिन भारतीय एजेंसियां आरोपी को न्याय के कटघरे में लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं. इस संबंध में मुंबई पुलिस ने गृह मंत्रालय को उसके प्रत्यर्पण का प्रस्ताव भेजा है. जिसे बाद में विदेश मंत्रालय को भेजा जाएगा.

अनमोल बिश्नोई के प्रत्यर्पण से जुड़े सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ये चीजें कानूनी दायरे में आती हैं, इसलिए तय प्रक्रियाओं के तहत कार्रवाई की जाएगी. अनमोल बिश्नोई भारत में वांटेड है. बाबा सिद्दीकी की हत्या समेत कई हाई प्रोफाइल क्राइम में उसके खिलाफ केस दर्ज है. 

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प्रत्यर्पण संधि ज़रूरी
किसी भी आरोपी को दूसरे देश से अपने देश में लाने के लिए दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि यानी एक्स्ट्राडीशन ट्रीटी होना जरूरी है. अगर प्रत्यर्पण संधि न भी हो तो एक्स्ट्राडीशन अरेंजमेंट से भी काम चल जाता है. भारत में 1962 में प्रत्यर्पण कानून बना था. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की 48 देशों के साथ एक्स्ट्राडीशन ट्रीटी है और 12 देशों के एक्स्ट्राडीशन अरेंजमेंट है. 

अमेरिका के साथ एक्स्ट्राडीशन ट्रीटी
एक्स्ट्राडीशन ट्रीटी में ये समझौता किया जाता है कि अगर उन्हें अपने देश में दूसरे देश का वॉन्टेड व्यक्ति मिलेगा, तो वो उसे वापस भेज देंगे. हालांकि, ये मामला अक्सर लंबी कानूनी प्रक्रिया में फंस जाता है. भारत ने 1997 में अमेरिका के साथ एक्स्ट्राडीशन ट्रीटी की थी. विदेश मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2002 से 31 जनवरी 2019 के बीच अमेरिका से 10 अपराधियों को भारत लाया गया है. 

अनमोल बिश्नोई को भारत लाया जाएगा या नहीं? ये तो वक्त बताएगा. हालांकि, हर देश का प्रत्यर्पण कानून अलग होता है और इसकी प्रक्रिया भी अलग. लेकिन अनमोल को वापस लाने के लिए भारत को कई सारे सबूत और दस्तावेज दिखाने होंगे.

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