मुंबई पुलिस के निलंबित एपीआई सचिन वाज़े को यकीन था कि वो एंटीलिया केस को सुलझा कर एक बार फिर से लाइम लाइट में आ जाएंगे. क्योंकि 16 साल बाद वाज़े ने दस माह पहले ही मुंबई पुलिस में वापसी की थी. लेकिन लाइम लाइट में आने की साजिश रचते वक्त सचिन वाज़े ने कुछ गलतियां कर दी. इन गलतियों का नतीजा ये हुआ कि एंटीलिया केस की जांच सीधे एनआईए की झोली में जा गिरी.
एपीआई सचिन वाज़े को इस बात का ज़रा भी गुमान नहीं था कि ये मामला उसके हाथ से ऐसे ही निकल जाएगा. मगर हुआ ठीक ऐसा ही. इस केस की जांच एनआईए को मिलने के बाद सचिन वाज़े सबूत मिटाने के काम में जुट गए. बस इसी काम को करते वक्त वो एक के बाद एक गलती करते चले गए. हम आपको बताते हैं, वाज़े की वो गलतियां, जिनके जाल में वो खुद फंस गए.
गलती नंबर-1
सचिन वाज़े की पहली गलती ये थी कि उन्होंने अपनी साज़िश में जिस गाड़ी को शामिल किया, वो गाड़ी अपने ही जानकार से ली. यानी मनसुख हिरेन से. उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि आगे चल कर उनके और मनसुख हिरेन के रिश्ते सबके सामने उजागर हो जाएंगे. और सच सामने आने के बाद भी उन्होंने मनसुख हिरेन के साथ अपने रिश्तों को नकार दिया. उन्होंने पूछताछ में हिरेन से जान पहचान होने की बात से इनकार कर दिया था.
गलती नंबर-2
सचिन वाज़े ने इस मामले में दूसरी और सबसे बड़ी गलती ये कर दी कि इस साज़िश को अंजाम तक पहुंचाने के लिए खुद ही भेष बदल कर स्कॉर्पियो को पार्क करने एंटीलिया के बाहर जा पहुंचे. यही नहीं उन्होंने 17 से 25 फरवरी तक हिरेन से ली गई स्कॉर्पियो कार को ठाणे में अपने हाउसिंग कॉम्पलेक्स में ही खड़ा रखा. शायद सचिन वाज़े को ज़रा भी इस बात का अहसास नहीं था कि एंटीलिया मामले की जांच कभी उनके घर तक भी पहुंचेगी.
गलती नंबर-3
सचिन की तीसरी गलती ये थी कि 100 नंबर पर कॉल जाने के बाद वो खुद ही सबसे पहले मौके पर पहुंच गए. हालांकि कायदे से उन्हें मौके पर सबसे पहले तो पहुंचना ही था, क्योंकि स्कॉर्पियो कार खुद उन्होंने ही एंटीलिया के पास खड़ी की थी. और क्राइम ब्रांच के बेड़े की इनोवा कार का इस्तेमाल उन्होंने इस साजिश के दौरान किया. उसी इनोवा कार में बैठकर वो एंटीलिया के बाहर से एसयूवी खड़ी कर फरार हुए थे.
गलती नंबर-4
सचिन वाज़े ने चौथी गलती ये कर दी कि उन्होंने अपनी ही टीम यानी मुंबई क्राइम ब्रांच के सीआईयू यूनिट के कुछ पुलिसवालों को अपनी साज़िश को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया या अपने साथ मिलाया. फिर अपने घर और सोसाइटी के सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर जांच के नाम पर उन्होंने अपनी ही टीम से उठवाए.
गलती नंबर-5
वाज़े की पांचवी गलती ये थी कि जिस काली मर्सिडीज़ को वाज़े खुद चलाते थे, उसे भी साजिश में इस्तेमाल किया. फिर उस मर्सिडीज़ को अपने ही ऑफिस के बाहर पार्क कर दिया. वो भी तमाम सबूतों के साथ. ऐसा लग रहा है कि वाज़े को अंदाज़ा ही नहीं था कि एनआईए की टीम क्राइम ब्रांच के दफ्तर की तलाशी भी लेने आ सकती है.