आयकर विभाग को मुंबई बेस्ड एक बड़े ग्रुप में सर्च के दौरान बेहिसाब लेन-देन का पता चला है. इस सर्च में अब तक लगभग 1500 करोड़ रुपये के लेनदेन का खुलासा होने का दावा किया जा रहा है. इस मामले में आगे की जांच जारी है. जिस ग्रुप में सर्च के दौरान यह मामला पकड़ा गया, वो हॉस्पिटैलिटी के साथ-साथ में गुटखा और पान मसाला बनाने के कारोबार से जुड़ा हुआ है.
आयकर विभाग ने बीती 8 फरवरी को मुंबई में बेस्ड इस ग्रुप के तमाम ठिकानों पर सर्च और सर्वे किया था. यह कार्रवाई एक साथ देश में कई स्थानों पर शुरू की गई थी और 13 फरवरी को पूरी हुई. सर्च और सर्वे के दौरान पता चला कि इस ग्रुप का एक ऑफिस दुबई में है, जो हेवेन ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (बीवीआई) नाम की एक विदेशी कंपनी के साथ पंजीकृत है. उस ऑफिस का संचालन खुद ग्रुप के चेयरमैन करते हैं.
बीवीआई कंपनी की वैल्यू 830 करोड़ है. इस कंपनी में निवेश किया गया फंड भारत से ही गया था. 638 करोड़ के इस फंड को भारत में शेयर प्रीमियम के रूप में राउंड ट्रिप किया गया. जो इस ग्रुप की प्रमुख कंपनियों में लगाया गया था. सर्च के दौरान विभिन्न डिजिटल एविडेंस, फॉरेंसिक विश्लेषण और कम्युनिकेशन के लिए इस्तेमाल किए गए ईमेल भी मिले.
इस समूह के एक ऐसे कर्मचारी की पहचान भी की गई, जो बीवीआई कंपनी में एक शेयरधारक भी था. अब प्रमोटर के साथ-साथ उसकी जांच भी की गई. इसमें शामिल पार्टियों ने ये स्वीकार किया है कि उस कर्मचारी को खुद कंपनी में शेयरधारक होने के बारे में पता नहीं था. उसने मुख्य प्रमोटर के निर्देश पर कागजात पर साइन किए थे.
इसके अलावा, ये पता चला कि इस समूह ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80आईसी के तहत 398 करोड़ पर कुछ हद तक फर्जी कटौती का लाभ भी उठाया है. इस ग्रुप ने हिमाचल प्रदेश में 2 संस्थाओं की स्थापना की और झूठे लेन-देन के नाम पर कटौती का दावा किया. इसके अलावा सर्च के दौरान पता चला कि ग्रुप के दो कारखानों में 247 करोड़ पान मसाले का अघोषित उत्पादन किया गया.
आयकर अधिनियम, 1961 के तहत गांधी धाम इकाई में 63 करोड़ की रकम इधर-उधर की गई. तलाशी के दौरान 13 लाख रुपये नकद जब्त किए गए जबकि 7 करोड़ रुपये के गहने पाए गए. अब समूह के 16 लॉकरों और 11 परिसरों में निषेधाज्ञा लागू की गई है.