
महाराष्ट्र के मालेगांव से दो कुख्यात स्कूटर चोरों को पकड़ने के लिए मुंबई पुलिस के अधिकारियों की एक टीम ने कई बार अपना हुलिया बदला. कभी वे लोकल रेहड़ी-पटरी वालों और फल विक्रेताओं की तरह बन गए तो कभी स्थानीय लोगों के साथ घुलने-मिलने के लिए केले, मूंगफली बेचने वाले बन गए. एक पुलिसकर्मी जब मुस्लिम बहुल मालेगांव में पहुंचा तो उसने बुर्का भी पहना. इस तरह से पुलिस ने उन दो स्कूटर चोरों को धर दबोचा.
पुलिस ने जिन दो चोरों को पकड़ने के लिए इतनी मशक्कत की. उनकी पहचान अय्याज अली अंसारी (38) और अब्दुल माजिद अंसारी (36) के तौर पर हुई. गिरफ्तारी के बाद उन दोनों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया और फिर अदालत ने उन दोनों को 21 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है.
उनकी असल करतूत तब सामने आई, जब एक शख्स ने अपनी लापता बाइक के बारे में एमआरए मार्ग पुलिस स्टेशन जाकर संपर्क किया और फिर शिकायत दर्ज कराई. उसकी शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने का काम किया. फुटेज देखने पर पुलिस को पता चला कि आरोपी चोरी के वाहनों को पहले भिवंडी ले गए और वहां से मालेगांव. इसके बाद बाद में उन्होंने उन वाहनों को अलग-अलग व्यक्तियों या गैरेजों को बेच दिया.
दोनों शातिर चोरों को पकड़ने वाली टीम का हिस्सा रहे एमआरए मार्ग पुलिस स्टेशन के सब इंस्पेक्टर लामतुरे ने बताया, "यह हमारे लिए एक नया इलाका था और चूंकि उनके (आरोपियों) पास स्थानीय, घरेलू सपोर्ट था, इसलिए हम ऐसा कुछ नहीं कर सके जिससे ऑपरेशन खतरे में पड़ जाए. यहां तक कि लोकल पुलिस को इत्तिला देने में भी रिस्क था, क्योंकि उससे आरोपी सतर्क हो जाता. हमने पांच दिनों तक जाल बिछाया और यहां तक कि उसकी (अय्याज) बहन का भी घर तक पीछा किया. वह अपने घर से बाहर नहीं निकलता था इसलिए हमें उसके परिवार के सदस्य का पीछा करना पड़ा."
अकेले मुंबई में ही आरोपियों के खिलाफ जेजे, डोंगरी, माहिम और सायन पुलिस स्टेशनों में मामले दर्ज हैं. जोन 1 के डिप्टी कमिश्नर प्रवीण मुंढे ने कहा, "हमारी टीम के सदस्यों के लिए बाहरी व्यक्ति की तरह न दिखने की चुनौती थी, इसलिए उन्होंने पोशाकें बदल लीं और धैर्यपूर्वक इंतजार किया, फिर जाल बिछाया. शातिर वाहन चोर अय्याज की गिरफ्तारी के बाद, उसने एमवी के 14 अपराधों को कबूल किया है. इस मामले में पहले ही पुलिस ने आठ वाहन बरामद कर लिए हैं.
दोनों आरोपियों के खिलाफ मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे और कल्याण में संयुक्त मामले दर्ज किए गए हैं. अय्याज़ छह महीने तक जेल में रहा और बाद में इस साल मई में रिहा हुआ. छह महीने के अंदर उसने अब्दुल के साथ मिलकर एक दर्जन से अधिक चोरी की वारदातों को अंजाम देना कबूल किया है. पुलिस के पास बहुत से ऐसे सुराग हैं कि जिनसे पता चला है कि बाकी वाहन गैरेज में बेच दिए गए हैं.