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हेमंत नगरालेः नक्सली इलाके से की थी करियर की शुरुआत, मुंबई हमले में बचाई थी कई लोगों की जान

अपने करियर के दौरान उन्हें कई सम्मान मिले. लेकिन राष्ट्रपति का पुलिस पदक, विशेश सेवा पदक और आंतरिक सुरक्षा पदक उनकी बड़ी उपलब्धि है. 1987 में आईपीएस बनने के बाद उनकी पहली तैनाती 1989-92 में नक्सल प्रभावित चंद्रपुर जिले में एएसपी राजुरा के रूप में हुई थी.

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IPS हेमंत नगराले CBI के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे हैं
IPS हेमंत नगराले CBI के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे हैं

मुंबई पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह का तबादला हो जाने के बाद उनकी जगह हेमंत नगराले ने ले ली है. उन्होंने मुंबई पुलिस के कमिश्नर का पदभार संभाल लिया है. पुलिस कमिश्नर पद पर आसीन होने के बाद हेमंत नगराले ने कहा कि मुंबई पुलिस की छवि धूमिल हुई है. हम इस मुश्किल का समाधान निकालेंगे. नगराले महाराष्ट्र कैडर के 1987 बैच के आईपीएस अफसर हैं.

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हेमंत नगराले ने भद्रवती, जिला चंद्रपुर के जेडपी स्कूल में 6वीं कक्षा तक पढ़ाई की. उसके बाद नागपुर में पटवर्धन हाई स्कूल से शिक्षा पाई. स्नातक के लिए बीआरसीई नागपुर (अब वीएनआईटी) का रुख किया और वहां से बीई (मैकेनिकल) किया. बाद में पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए वे JBIMS मुंबई गए और वहां से उन्होंने मास्टर ऑफ फाइनेंस मैनेजमेंट किया. 

अपने करियर के दौरान उन्हें कई सम्मान मिले. लेकिन राष्ट्रपति का पुलिस पदक, विशेश सेवा पदक और अंतरिक सुरक्षा पदक उनकी बड़ी उपलब्धि है. 1987 में आईपीएस बनने के बाद उनकी पहली तैनाती 1989-92 में नक्सल प्रभावित चंद्रपुर जिले में एएसपी राजुरा के रूप में हुई थी. इसके बाद 1992 से 94 तक वे डीसीपी के रूम में सोलापुर के नए आयुक्तालय के निर्माण में सहायक थे. उन्होंने 1992 में सोलापुर शहर में बाबरी मस्जिद के भड़के सांप्रदायिक दंगों को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया.
 
एसपी के रूप में उन्हें रत्नागिरी जिले में तैनाती मिली. जहां 1994 से 1996 तक अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने एनरॉन / डैबोल पावर कॉर्पोरेशन से संबंधित भूमि अधिग्रहण की समस्या को पेशेवर निपुणता के साथ हल कराया था.
 
1996 से 998 तक एसपी, सीआईडी, अपराध के रूप में उन्होंने एमपीएससी पेपर लीक मामले की जांच की, जो महाराष्ट्र के कई हिस्सों में फैला हुआ था. और उसमें अंजनाबाई गावित, कई बच्चों के अपहरण और हत्या के मामले शामिल थे. इस मामले में शीर्ष अदालत ने आरोपियों को मौत की सजा सुनाई और इसके बाद ये केस खत्म हो गया था.
 
इसके बाद मार्च 1998 से सितंबर 2002 तक हेमंत नगराले सीबीआई में प्रतिनियुक्ति पर रहे. जहां पहले एसपी बीएसएफसी, सीबीआई, मुंबई और बाद में डीआईजी, सीबीआई के रूप में नई दिल्ली में उनकी तैनाती थी. उन्होंने कई मामलों की जांच की और उन्हें पूरा किया. जिनमें 130 करोड़ का बैंक ऑफ इंडिया से जुड़ा केतन पारेख घोटाला, 1800 करोड़ का माधोपुरा को-ऑप बैंक घोटाला, 400 करोड़ रुपये का हर्षद मेहता कांड 2001 शामिल है. 
 
अपनी सर्विस के दौरान हेमंत नगराले एसआईटी के डीजीपी एस.एस.पुरी के स्टाफ अफसर भी रहे. जिन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशानुसार तेलगी स्टांप पेपर घोटाले की जांच की थी. इस केस में विस्तृत अनुसंधान और जांच के लिए उनकी सराहना की गई थी.
 
वे 2007-2008 में पूर्व क्षेत्र के एडिशनल सीपी रहे. उन्होंने एक बार फिर संवेदनशील क्षेत्रों में सांप्रदायिक अशांति होने पर हालात को संभाला और अपने कौशल का प्रदर्शन किया.
 
प्रमोशन मिलने के बाद जुलाई 2008 से अगस्त 2010 तक वे स्पेशल आईजीपी और MSEDCL के निदेशक रहे. उनका कार्यकाल में वहां बेहतर बिजली प्रवर्तन देखने को मिला और कंपनी के राजस्व में बेहतर प्रवर्तन से 25% की वृद्धि दर्ज की गई. 
 
हेमंत नगराले 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए सबसे भयानक आतंकवादी हमले के गवाह बने. उस दौरान भले ही वे MSEDCL में प्रतिनियुक्ति पर थे, लेकिन वे अपने आवास से बाहर निकले. और उन्होंने घायलों और मृतकों को पास के अस्पताल में स्थानांतरित करने में मदद की. संदिग्ध वस्तुओं की तलाश करने पर, उन्होंने आरडीएक्स का एक बैग देखा और जांच के बाद खुद उसे बम निरोधक दस्ते के साथ सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया.

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इसके बाद नगराले चार पुलिसकर्मियों के साथ होटल ताज में दाखिल हुए. जहां उन्होंने घायलों और मृत व्यक्तियों की बाहर निकालने में मदद की और उन्हें अस्पताल भिजवाया. उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया और स्टाफ को तैनात किया. कर्मचारियों की मदद से वह होटल ताज के शॉपिंग प्लाजा के अंदर फंसे सैकड़ों लोगों को बचाने में कामयाब रहे. 

महानिदेशक कार्यालय में आईजीपी (प्रशासन) रहते हुए उन्होंने महाराष्ट्र पुलिस की स्वास्थ्य योजना MPKAY को फिर से चालू करवाया. साथ ही इस योजना को और अधिक प्रभावी और उपयोगी बनाते हुए वर्ष 2011-12 में खर्च में 10 करोड़ रुपये की कमी की. उन्होंने एमएचए, नई दिल्ली के साथ समन्वय स्थापित कर सीएसडी कैंटीन के साथ केंद्रीय पुलिस कैंटीन योजना शुरू की और इस तरह पूरे महाराष्ट्र में 40 केंद्रीय पुलिस कैंटीन स्थापित किए.
 
मुंबई में संयुक्त पुलिस आयुक्त (प्रशासन) के रूप में उन्होंने मुंबई शहर के लिए तिमाही आवंटन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवासीय क्वार्टर आवंटन नीति का मसौदा तैयार किया, जिसे कांस्टेबुलरी ने बहुत सराहा. 
 
2014 में एक संक्षिप्त अवधि के लिए, नागराले ने मुंबई के पुलिस आयुक्त के रूप में अतिरिक्त प्रभार संभाला. उन्होंने आसानी से रास्ता रोको आंदोलन को मैनेज किया और गृह मंत्री ने इसकी सराहना की.
 
मई 2016 से जुलाई 2018 तक वह पुलिस आयुक्त नवीमुंबई के पद पर तैनात थे. जहां उन्होंने प्रभावी ढंग से हालात को काबू किया. कानून और व्यवस्था को मजबूत बनाने का काम किया. मराठा आरक्षण आंदोलन को भी उन्होंने सफलतापूर्वक संभाला, जिसका केंद्र बिंदु नवी मुंबई था.

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अक्टूबर 2018 में उन्हें डीजी रैंक दिया गया और राज्य में फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरीज की देखरेख का जिम्मा उन्हें सौंपा गया. नगराले एक गोल्फर और टेनिस खिलाड़ी के तौर पर जाने जाते हैं और अधिकांश खेलों में उन्हें महारत है. वे जूडो में ब्लैक बेल्ट भी हैं और उन्होंवे अखिल भारतीय पुलिस खेलों में पदक भी जीते हैं.
 

 

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