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दिल्ली दंगों का एक सालः हर चार्जशीट में है FIR नंबर 59 का जिक्र, बनी UAPA का आधार

दिल्ली दंगों से जुड़ी हर साजिश में एफआईआर नंबर 59 का जिक्र होता है. दंगे से जुड़े जितने भी खुलासे होते हैं, उनमें भी एफआईआर नंबर 59 का जिक्र है. इसी 59 नंबर की एफआईआर में में सीएए विरोध प्रदर्शन, जामिया, शाहीन बाग और उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगों का जिक्र शामिल है.

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FIR 59 में पिछले साल हुए दिल्ली हिंसा के सभी मामलों का जिक्र मिलता है
FIR 59 में पिछले साल हुए दिल्ली हिंसा के सभी मामलों का जिक्र मिलता है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • फरवरी 2020 में नार्थ ईस्ट दिल्ली में हुए थे दंगे
  • मारे गए थे 53 लोग, घायल हुए थे 500 से ज्यादा
  • पुलिस अधिकारी और कर्मचारी भी हुए थे चोटिल

दिल्ली दंगों का एक साल पूरा हो चुका है. उन दंगों को लेकर यूं तो अलग-अलग 755 एफआईआर दर्ज की गईं, लेकिन एक एफआईआर ऐसी है, जिसका जिक्र दंगों को लेकर दाखिल की गई हर चार्जशीट में बार-बार होता है. वो एफआईआर नंबर 59 है.

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यहां तक कि दिल्ली दंगों से जुड़ी हर साजिश में एफआईआर नंबर 59 का जिक्र होता है. दंगे से जुड़े जितने भी खुलासे होते हैं, उनमें भी एफआईआर नंबर 59 का जिक्र है. इसी 59 नंबर की एफआईआर में सीएए विरोध प्रदर्शन, जामिया, शाहीन बाग और उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगों का जिक्र होता है.

यहां तक कि दंगों की साजिश का ताना-बाना बुने जाने की जानकारी भी इसी एफआईआर में दर्ज है. इस एफआईआर और इससे जुड़ी चार्जशीट में उन लोगों के नाम की सूची है, जिन्हें गिरफ़्तार तो अलग-अलग एफआईआर के आधार पर किया गया. 

लेकिन बाद में यूएपीए वाली एफआईआर संख्या 59 में उन सभी का नाम जोड़ दिया गया. इस मामले में केवल उमर ख़ालिद ही अकेले व्यक्ति हैं, जिनका नाम उस एफआईआर में पहले से लिखा हुआ था.
 

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