ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की होर्डिंग और कालाबाजारी केस में आज मंगलवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली की एक अदालत ने मामले के अधिकारियों की ओर से दिए गए गलत बयानबाजी पर दिल्ली पुलिस और सरकार की खिंचाई की. आरोपी व्यवसायी नवनीत कालरा के सहयोगियों की याचिका पर कोर्ट में सुनवाई हुई थी.
सरकारी वकील अतुल श्रीवास्तव ने मंगलवार को साकेत कोर्ट को बताया कि नवनीत कालरा ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर होर्डिंग मामले में 'सरकार को धोखा' दिया क्योंकि वह आयात पर एमआरपी का खुलासा करने में नाकाम रहे जो पिछले साल जारी आदेश का उल्लंघन है.
मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (CMM) ने पूछा, 'यदि उसी मॉडल को अधिक कीमत पर बेचा गया था, तो यह कहा जा सकता है कि उन्होंने मूल्य में वृद्धि की है, लेकिन अगर उन्होंने कहा कि मॉडल स्टॉक से बाहर है और आप एक अलग मॉडल खरीदते हैं, तो यह कैसे गलत है? बयान कहां है? जांच अधिकारी ने माना कि शिकायतकर्ता का बयान केस डायरी में नहीं है.
मजिस्ट्रेट ने पुलिस और सरकारी वकील अतुल श्रीवास्तव से कहा, 'आप नहीं जानते कि क्या प्रोसिडिंग की जा रही है. मैंने केस डायरी मंगवाई है. क्या मैं केस को देख नहीं सकता हूं?' साकेत कोर्ट ने नवनीत कालरा के खिलाफ ऑक्सीजन कंसंट्रेटर जमाखोरी मामले में पुलिस और अभियोजन पक्ष को फटकार लगाई और कहा कि सरकार ने "गवाह के बयान के बारे में गलत टिप्पणी की है जो केस डायरी में मौजूद नहीं है."
ऑक्सीजन कंसंट्रेटर रेट करने का नियम हैः कोर्ट
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार के पास ऐसा कोई नियम ही नहीं है जो ये तय कर सके कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का रेट क्या होगा. कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या आपके पास ऐसा कोई सबूत है जिसमें जो आरोपियों ने 70 हजार का रेट तय किया था उससे ज्यादा का बेच दिया हो?
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कोर्ट ने यह भी पूछा कि आज 11 मई को भी सरकार की तरफ से कोई गाइडलाइंस या नोटिफिकेशन आया है जिसमें ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के रेट तय किए गए हों. कोर्ट ने कहा कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के रेट को रेगुलेट करने के लिए अभी तक कोई फैसला क्यों नहीं लिया गया.
क्या बिजनेस करना कोई अपराधः कोर्ट
सरकार पर बरसते हुए कोर्ट ने कहा कि लॉकडाउन में क्या बिजनेस करना कोई अपराध है? मैं ये जानना चाहता हूं कि अगर कोई बिजनेसमैन बाहर से मांगकर कोई सामान देश में बेच रहा है, तो ये क्या गलत है? सरकार अगर खुद ही ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के रेट को रेगुलेट करने के लिए कोई नियम नहीं बना रही है, तो फिर आप बिजनेसमैन को कैसे टारगेट कर सकते हो. अगर बिजनेसमैन महामारी में कमाने के लिए कुछ कर रहा है, तो वो अपराध की श्रेणी में कैसे आ सकता है. आप जबरन आतंक क्यों दिखाना चाहते हो, पुलिस क्या दिखाना चाहती है किसी को पकड़ कर?
कोर्ट ने कहा कि हम मीडिया में नहीं है कि क्या हो रहा है. समाज में ये दिखाने का हमारा काम नहीं है. हमारे हाथ कानून से बंधे हुए हैं. कोर्ट ने कहा कि राज्य को अपने लोगों के लिए निष्पक्ष होना जरूरी है, चाहे वो बिजनेसमैन ही क्यों नहीं हो, शराब भी महामारी में बेची जा रही है क्योंकि उससे आर्थिक फायदा होता है.
इस बीच कोर्ट में नवनीत कालरा के वकील ने कहा कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को पुलिस के कई अधिकारियों को भी मेरे द्वारा बेचा गया और पैसों का ट्रांसजेंक्शन हमारे पास मौजूद है. सब कुछ लीगल तरीके से किया गया. कुछ भी गलत नहीं किया गया, लेकिन मुझे आरोपी बना दिया गया. अगर सब कुछ लीगल तरीके से बेचा गया, तो फिर होर्डिंग या कालाबाज़ारी कैसे हुई? लुकआउट नोटिस जारी करने का क्या मतलब है.