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बड़ा खुलासाः सद्दाम ने ही बनवाए थे उमेशपाल हत्याकांड के आरोपियों के फर्जी दस्तावेज, फिर भाग गया था दुबई

पुलिस के हत्थे चढ़ा सद्दाम केवल अशरफ का रिश्तेदार ही नहीं था बल्कि उसका काम भी संभालता था. अशरफ के जेल जाने के बाद वही बाहर उसका सारा काम काज देखता था. इल्जाम है कि सद्दाम ही वो शख्स है, जो जेल में बंद अशरफ से लोगों को मिलवाने का इंतजाम करता था.

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सद्दाम केवल अशरफ का साला ही नहीं बल्कि अतीक गैंग का एक्टिव मेंबर भी रहा है
सद्दाम केवल अशरफ का साला ही नहीं बल्कि अतीक गैंग का एक्टिव मेंबर भी रहा है

उमेश पाल हत्याकांड के बाद से फरार एक लाख का इनामी अब्दुल समद उर्फ सद्दाम अब पुलिस की हिरासत में है. सद्दाम अतीक अहमद के भाई अशरफ की पत्नी जैनब का भाई है. इस रिश्ते से वो अशरफ का साला है. पुलिस को उम्मीद है कि उसके पकड़े जाने से उमेश पाल हत्याकांड के दूसरे आरोपियों के बारे में भी सुराग मिल सकते हैं.

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पुलिस के हत्थे चढ़ा सद्दाम केवल अशरफ का साला ही नहीं बल्कि उसका काम भी संभालता था. अशरफ के जेल जाने के बाद वही बाहर उसका सारा काम काज देखता था. इल्जाम है कि सद्दाम ही वो शख्स है, जो जेल में बंद अशरफ से लोगों को मिलवाने का इंतजाम करता था. उसी ने उमेश पाल हत्याकांड की साजिश में शामिल तमाम आरोपियों और शूटर्स को बरेली जेल में बंद अशरफ से मिलवाया था. वो ये काम अक्सर किया करता था.

पुलिस के मुताबिक, उमेशपाल हत्याकांड के आरोपियों के फर्जी दस्तावेज बनवाने का काम भी सद्दाम ने ही अंजाम दिया था. उसी ने सारे जाली डॉक्यूमेंट बनवाए थे. वो अशरफ के इशारे पर सारे बाहर के काम किया करता था. उमेश पाल की हत्या में जब अतीक और अशरफ का नाम आया था, तभी वो दुबई भाग गया था. सद्दाम अतीक अहमद गैंग का एक्टिव मेंबर था. अब एसटीएफ को सद्दाम के जरिए उमेश पाल हत्याकांड और अतीक अहमद गैंग के कई राज पता चलने की उम्मीद है.

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असल में इसी साल 24 फरवरी को प्रयागराज के धूमनगंज इलाके में उमेश पाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उमेश पाल जनवरी 2005 में हुए राजू पाल हत्याकांड में गवाह थे. जिस दिन उमेश पाल की हत्या हुई थी, उस दिन वो राजू पाल हत्याकांड मामले की सुनवाई से घर लौटे ही थे. घर के बाहर ही उनपर फायरिंग की गई थी, जिसमें उमेश पाल और उनके दोनों सरकारी गनर मारे गए थे.

उमेश पाल की हत्या का आरोप अतीक अहमद और उसके गैंग पर था. लिहाजा, तभी से सद्दाम भी फरार चल रहा था. पुलिस के मुताबिक, हत्याकांड के बाद सद्दाम दुबई भाग गया था. दुबई में कुछ महीने रहने के बाद वो भारत लौट आया था. भारत आने के बाद वो नाम बदल-बदलकर अपने ठिकाने बदल रहा था. कभी दिल्ली, कभी मुंबई तो कभी कर्नाटक में रह रहा था.

हाल ही में सद्दाम को बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात दो बजे यूपी एसटीएफ की बरेली यूनिट ने गिरफ्तार कर लिया. उसे दिल्ली के मालवीय नगर से पकड़ा गया. जब उसे गिरफ्तार किया गया, तब वो अपनी गर्लफ्रेंड अनम से मिलने जा रहा था. पुलिस ने बताया कि उसे रात दो बजे मालवीय नगर में मौजूद मॉल के सामने डीडीए फ्लैट से अरेस्ट किया गया. पुलिस ने उसके पास से दो मोबाइल फोन और एक कार बरामद की है.

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सद्दाम की गिरफ्तारी की सूत्रधार उसकी गर्लफ्रेंड्स ही बनीं. एसटीएफ के मुताबिक, सद्दाम चार लड़कियों के संपर्क में था. इनमें से दो प्रयागराज, एक बरेली में और एक दिल्ली में थी यानी अनम. पुलिस ने उन चारों लड़कियों के मोबाइल फोन सर्विलांस पर लगा रखे थे. उमेश पाल हत्याकांड के बाद सद्दाम ने कई दिनों तक इन लड़कियों से बात नहीं की थी. लेकिन अप्रैल में दोबारा उसने इन लड़कियों से बातचीत शुरू कर दी थी.

हालांकि, सद्दाम बार-बार अपना नंबर और मोबाइल दोनों बदल रहा था. इस कारण वो एसटीएफ की पकड़ से बचता जा रहा था. एसटीएफ ने उन लड़कियों के फोन सर्विलांस पर लगे रखे थे, इसलिए पता चला कि वो मालवीय नगर स्थित डीडीए फ्लैट में अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने जा रहा है. इसके बाद एसटीएफ ने वहां जाल बिछाया और फिर छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया. 

यूपी एसटीएफ ने सद्दाम की गिरफ्तारी को काफी अहम बताया है. एडीजी का कहना है कि सद्दाम उमेश पाल हत्याकांड के साजिशकर्ताओं को बरेली जेल में बंद अशरफ से मिलवाने की अहम कड़ी था. वो अपने जीजा अशरफ के साथ मिलकर जमीनों पर अवैध कब्जे करता था. उम्मीद है कि सद्दाम से पूछताछ के बाद उमेश पाल हत्याकांड में फरार चल रहे दो साजिशकर्ताओं और तीन शूटर्स के बारे में भी इनपुट्स मिलेंगे और उनको गिरफ्तार किया जा सकेगा.

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