
आप सभी ये जानते हैं कि जब कोई इंसान मर जाता है, तो उसे अंतिम संस्कार के लिए श्मसान ले जाया जाता है या फिर उसे कब्रिस्तान में ले जाकर दफ्न कर दिया जाता है. पूरी दुनिया में ऐसा ही होता है. लेकिन पंजाब के मानसा में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक जिंदा इंसान को कब्रिस्तान में ले जाकर फेंक दिया गया. यही नहीं एक दूसरे शख्स को सड़क के किनारे तड़पने के लिए छोड़ दिया गया और इस कारनामे को अंजाम दिया. मानसा के सिविल हॉस्पिटल स्टाफ ने. जिसकी वजह से ये सरकारी अस्पताल अचानक चर्चा में आ गया है. हालांकि उन दोनों लोगों में से एक की मौत हो गई.
इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली इस वारदात के बारे में जानकर लोग हैरान हैं. शहर के लोग गुस्से में हैं. उन्होंने सिविल अस्पताल के डॉक्टरों पर गंभीर इल्जाम लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है. आइए आपको ये पूरा वाक्या बताते हैं.
दरअसल, मानसा के सरकारी अस्पताल में दो लावारिस मरीज भर्ती थे. उनका इलाज भी ठीक से नहीं किया जा रहा था. इसी दौरान अस्पताल के डॉक्टरों ने उन दोनों मरीजों से छुटकारा पाने के लिए शर्मनाक तरकीब निकाली. उन्होंने अस्पताल की एंबुलेंस के चालक से कहा कि वो उन दोनों मरीजों को कहीं सुनसान जगह पर फेंक आए. एंबुलेंस चालक ने ऐसा ही किया. वो दोनों मरीजों को एंबुलेंस में डालकर एक सुनसान जगह पर ले गया. एक को उसने सड़क के किनारे फेंक दिया और दूसरे मरीज को वो जीते जी एक क्रबिस्तान में कब्रों के पास फेंक आया.
इसके बाद सड़के के पास फेंके गए एक मरीज की मौत हो गई और दूसरे मरीज को कब्रिस्तान के पास उठाकर, दोबारा मानसा अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल की इस करतूत को लेकर लोग गुस्से में आ गए और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे. मामला उजागर होने के बाद अब सीएमओ मानसा ने इस मामले में जांच कराने की बात कही है.
पूछताछ करने पर पता चला कि पिछले कई दिनों से दो लावारिस मरीज सिविल हॉस्पिटल में भर्ती थे. वे दोनों एचआईवी, काला पीलीया और टीबी से पीड़ित थे. अस्पताल के डॉक्टर उनका इलाज ही नहीं करना चाहते थे. लिहाजा डॉक्टरों के कहने पर ही एंबुलेंस चालक ने उन दोनों को अलग-अलग जगहों पर फेंक आया था. कुछ देर बाद एक मरीज की लाश सरकारी अस्पताल पहुंची और जब दूसरे मरीज को तलाश किया गया तो वो मानसा की सुनसान सड़क पर एक कब्रिस्तान के पास पड़ा मिला. उस बीमार शख्स को दोबारा सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
इस मामले में सिविल हॉस्पिटल डॉकटरों ने एक कारनामा और किया. उन्होंने बाहर फेंके गए लावारिस मरीजों के बारे में अस्पताल से खुद जाने की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी. ताकि उन पर कोई आरोप प्रत्यारोप ना लगे. इस मामले में एंबुलेंस चालक काका सिंह ने बताया कि अस्पताल के डॉ. आसू और मैडम गुरविंदर कौर ने उसे मरीजों को बाहर छोड़ने के लिए कहा था और डॉ. आसू ने उसे 400 रुपये भी दिए थे. साथ ही उसकी मदद के लिए एक व्यक्ति को उसके साथ भेजा था.
अब सरकारी अस्पताल के डॉक्टर इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर रहे हैं, जबकि मानसा जिले के सीएमओ ने इस घटना के लिए एक जांच कमेटी बनाने की बात कही है.