पंजाब पुलिस ने रविवार को एक गुप्त सूचना के आधार पर एक अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी गिरोह से जुड़े दो तस्करों को गिरफ्तार कर लिया. सबसे बड़ी हैरानी की बात ये है कि इस गिरोह का सरगना बीएसएफ का बर्खास्त कॉन्स्टेबल सुमित कुमार है. पुलिस तस्करों के कब्जे से एक 7.65 एमएम की पिस्तौल, हेरोइन, नकदी, दो मोबाइल फोन ,दो वाई-फाई डोंगल और एक रेसिंग बाइक बरामद की है.
पंजाब पुलिस के प्रमुख दिनकर गुप्ता ने बताया कि इन दो अपराधियों को रविवार को उस वक्त जालंधर के समीप करतारपुर में गिरफ्तार किया गया, जब वह हेरोइन की खेप लेकर जा रहे थे. गिरफ्तार किए गए तस्करों की पहचान 26 साल के सिमरनजीत सिंह उर्फ सिमरन और बलराम सिंह के रूप में हुई है. सिमरन जालंधर के धीरपुर का रहने वाला है और बलराम सिंह कपूरथला के सुरखपुर गांव का निवासी है.
डीजीपी दिनकर गुप्ता ने बताया कि आरोपी ड्रग स्मग्लिंग करने के लिए रेसिंग बाइक का इस्तेमाल कर रहे थे. जो बाइक इन दोनों तस्करों के कब्जे से बरामद की गई है, उसे एक निजी विश्वविद्यालय की पार्किंग से चुराया गया था. इन दोनों तस्करों के खिलाफ करतारपुर पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस, आर्म्स एक्ट और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया है.
गिरफ्तार किए गए सिमरनजीत सिंह उर्फ सिमरन का आपराधिक रिकॉर्ड है और वह एक व्यापारी की हत्या करके फरार चल रहा था. जालंधर रेंज के आईजी हरकमलप्रीत सिंह कख ने बताया कि व्यापारी की हत्या के सिलसिले में पहले से ही एक अमनप्रीत नामक वांछित अपराधी को गिरफ्तार किया जा चुका है.
पुलिस की जांच में सामने आया है कि अमनप्रीत और उसके भाइयों का संबंध पाकिस्तान के कुख्यात ड्रग स्मगलर शाह मूसा से था. अमनप्रीत बर्खास्त बीएसएफ कांस्टेबल सुमित के जरिए शाह मूसा के संपर्क में आया था. नौकरी से बर्खास्त होने के बाद सुमित इस वक्त गुरदासपुर की जेल में बंद है.
गौरतलब है कि भारत-पाक सीमा के सांबा सेक्टर पर तैनात बीएसएफ के पूर्व कॉन्स्टेबल सुमित कुमार उर्फ नोनी को अंतर्राष्ट्रीय नशा तस्करी और हवाला नेटवर्क चलाने के आरोप में 11 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया गया था. वह पंजाब के गुरदासपुर का रहने वाला है. सुमित कुमार के कब्जे से एक 9 एमएम पिस्टल, दो मैगजीन, नाइन एमएम पिस्टल के 80 राउंड्स, 12 बोर के दो राउंड्स बरामद किए गए थे.
पुलिस जांच में सामने आया है कि पूर्व बीएसएफ कॉन्स्टेबल ने हेरोइन के 40 पैकेट और एक नाइन एमएम पिस्टल को भारतीय सीमा में पहुंचाने के लिए पाकिस्तानी तस्करों की मदद की थी. उसने पिस्टल को निजी इस्तेमाल के लिए अपने पास रख लिया था. जबकि हेरोइन की खेप को कुछ अज्ञात लोगों को सौंप दिया था.
इस काम की एवज में उसे कुल 39 लाख रुपये मिले थे. उसे तस्करों ने 15 और 24 रुपये की दो किस्तों में पैसा दिया था. उसने हेरोइन के 40 पैकेट किसे सौंपे और उसे यह पैसा कहां से मिला? फिलहाल पुलिस इसकी जांच कर रही है. पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार किए गए दोनों तस्करों से बरामद की गई हेरोइन की मात्रा की जानकारी भी मीडिया से साझा नहीं की है.