करीब चार महीने पहले आज तक ने एक मुहिम शुरू की थी. मुहिम थी कतर की जेल में बंद दो बेगुनाह हिंदुस्तानियों ओनिबा और शरीक को भारत वापस लाने की. ये मुहिम अब रंग लाई है. मुंबई की ओनिबा और उसके शौहर शरीक के वापस हिंदुस्तान आने की राह खुलती नज़र आ रही है. कतर की अदालत में वो दस्तावेज़ बन चुके हैं, जो उन दिनों की रिहाई का रास्ता साफ करने जा रहे हैं. कतर की अदालत ओनिबा और शरीक के मुकदमे की दोबारा सुनवाई के लिए राज़ी हो गई है.
ये सबकुछ मुमकिन हो पाया है, नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डायरेक्टर राकेश अस्थाना, प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय और इस पूरे मामले की जांच कर रहे जांच अधिकारी केपीएस मल्होत्रा की कोशिशों की वजह से. दरअसल, एनसीबी ने पिछले साल अपनी जांच में ये पाया था कि ओनिबा और शरीक दोनों बेगुनाह हैं. इन दोनों को क़तर में ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया गया था. लेकिन एनसीबी की जांच में पता चला कि ड्रग्स इन दोनों को धोखे से दिया गया था. इसके बाद एनसीबी ने असली गुनहगार को भी पकड़ लिया.
लेकिन उधर क़तर में तब तक ओनिबा और शरीक को वहां की अदालत ने दस साल की सज़ा सुना दी थी. सच्चाई सामने आने के बाद एनसीबी ने विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय की मदद से कतर में मौजूद भारतीय दूतावास से संपर्क किया और केस की सारी सच्चाई उनके सामने रखी. साथ ही सबूत भी रखे. इन नए सबूतों के साथ ओनिबा और शरीक ने दोबारा क़तर की अदालत में अपना पक्ष रखा. नए सबूतों को ध्यान में रखते हुए कतर की अदालत ने भी माना कि दोनों को मिली सज़ा के खिलाफ़ इन्हें दोबारा अपील करने का मौक़ा देना चाहिए.
इसी के बाद 11 जनवरी 2021 को कतर की अदालत ने उनकी अपील को मंज़ूर कर लिया और फैसला सुनाया कि जिस निचली अदालत ने इन्हें दस साल की सज़ा सुनाई थी वो नए सबूतों की रोशनी में फिर से केस की सुनवाई करे. इसी के बाद अब ओनिबा और शरीक के जल्दी भारत लौट आने की उम्मीद जाग उठी है. वैसे ओनिबा और शरीक के मामले के साथ-साथ एक और अहम चीज़ हुई है. भारत और कतर के बीच एक नया एमओयू साइन होने जा रहा है. इसके ज़रिए उन तमाम लोगों को भी भारत लाने का रास्ता साफ़ हो जाएगा, जो बेगुनाह होते हुए भी कतर की जेलों में बंद हैं.
ये है ओनिबा और शरीक का पूरा मामला
ख्वाबों के शहर मुंबई में ओनिबा और शरीक ने भी एक ख्वाब देखा था. उनके भी ख्वाब को ज़मीन मिली थी. उस ज़मीन पर दोनों ने इश्क की मंज़िल पाई और और अपना छोटा सा एक आशियाना बसाने का सपना देखा. पर उससे पहले ही चंद लालची लोगों ने उनके पूरे सपने को ही धुंआ-धुआं कर दिया. ये कहानी है शरीक कुरैशी और ओनिबा कुरैशी की. दोनों मुंबई के एक लोकल कालेज में बी.कॉम की पढ़ाई कर रहे थे. वहीं दोनों की आंखें चार हुईं और दोनों ने दो से एक हो जाने का वादा कर लिया. कालेज से निकलते ही दोनों जिंदगी की जद्दोजहद में जुट गए. ओनिबा ने एक छोटी-मोटी नौकरी कर ली जबकि शरीक रोजी-रोटी की तलाश में मुंबई से दुबई जा पहुंचा. पर कालेज में किए वादे दोनों को याद थे. यही वादा कुछ वक्त बाद ही शरीक को वापस मुंबई ले आया. उसने मुंबई में एक एमएनसी में नौकरी ज्वाइन कर ली.
शरीक के अच्छी कंपनी में नौकरी ज्वाइन करते ही ओनिबा में हौसला आया. चार बहनों में सबसे छोटी ओनिबा ने एक रोज अपनी अम्मी और अब्बू को शरीक का सच बता दिया. चूंकि शरीक और ओनिबा एक ही बिरादरी से थे और लड़का शऱीफ था लिहाजा ओनिबा के वालिद शकील कुरैशी और अम्मी कौसर बेगम को रिश्ते के लिए हां बोलने में देर नहीं लगी. दोनों ख़ानदान की रजामंदी से आखिरकार ओनिबा और शरीक का ख्वाब पूरा हुआ, जो उन्होंने कालेज में देखा था. 19 अप्रैल 2018 को ओनिबा और शकीर की शादी हो गई.
शादी के बाद ओनिबा शकीर के साथ उसके घर भिंडी बाजार शिफ्ट हो गई थी. अगले दो महीने इनकी ज़िंदगी में खुशियां ही खुशियं थीं. मगर जुलाई में अचानक शरीक के वालिद की सौतेली बहन यानी फूफी तबस्सुम उसी बिल्डिंग में आकर रहने लगी, जहां शरीक और ओनिबा रह रहे थे. बस यहीं से इन दोनों की खुशियों को आग लग गई. ऐसी आग जिसका धुआं आज भी कई जिगर से उठ रहा है. तबस्सुम अचानक शरीक और ओनिबा के पीछे पड़ जाती है कि वो दोनों को उनकी शादी का तोहफा देना चाहती है. तोहफे के तौर पर वो दोनों को हनीमून पर विदेश भेजना चाहती है. अपने खर्च पर.
मगर खुद्दार शकीर और ओनिबा पूरे अदब के साथ तबस्सुम को इंकार कर देते हैं. मगर तबस्सुम हार नहीं मानती. वक्त बीतता जाता है. साल बीत जाता है. पर तबस्सुम अब भी हनीमून पैकेज को लेकर अड़ी थी. अपनी फूफी की जिद के आगे आखिर शरीक हार गया और हनीमून पैकेज के लिए हां कर दी. शरीक और ओनिबा की जिंदगी की ये शायद पहली और सबसे बड़ी गलती थी.
शरीक के हां करते ही तबस्सुम ने अपना खेल शुरू कर दिया. तबस्सुम ने शरीक और ओनिबा को शादी के तोहफे के तौर पर हनीमून के लिए कतर जाने को राजी कर लिया. हवाई जहाज का टिकट, होटल, रहना, खाना-पीना सब तबस्सुम की तरफ से था. इसके बाद 5 जुलाई 2019 को तबस्सुम ने शकीर और ओनिबा को मुंबई से बैंगलुरू भेज दिया. बैंगलुरू में तबस्सुम के एक जानकार ने शकीर को एक बैग दिया. बैग में कुछ सामान था. शकीर को लगा कि कहीं कुछ गलत सामान तो नहीं लिहाजा, उसने अपनी फूफी तबस्सुम को फोन किया.
फूफी की बात से शकीर को तसल्ली हो गई. फूफी ने यकीन दिला दिया कि बैग में जर्दा पान मसाला है. इसके बाद शकीर और ओनिबा 6 जुलाई 2019 को बैंगलूरू से कतर पहुंच गए. कतर में दोहा के हम्माद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रात साढ़े दस बजे फ्लाइट ने लैड किया. मगर एयरपोर्ट पर जब बैग की तलाशी ली जाती है, तो शरीक के एक बैग से चार किलो चरस मिलती है? ये वही बैग और सामान था जो तबस्सुम ने शरीक को दिया था. पर बैग में जर्दा पान मसाला नहीं चरस थी. शरीक दोहा एयरपोर्ट के अधिकारियों के सामने लाख गिड़गिड़ाता है, पर कोई फायदा नहीं होता. कतर का नारकोटिक्स डिपार्टमेंट शरीक और ओनिबा को गिरफ्तार कर लेता है.
इधर, कतर जाने के दो दिन बाद तक जब दोनों की कोई खबर या फोन नहीं आता तो मुंबई में घरवाले परेशान हो उठते हैं. अभी वो कुछ समझ पाते तभी कतर से तहसीन नाम की एक औरत कौसर को फोन करती है. तहसीन कतर के जेल से हाल ही में रिहा हुई थी वो कौसर को बताती है कि शरीक और ओनिबा ड्रग्स के साथ पकड़े गए हैं और दोहा की जेल में बंद हैं. खबर सुनते ही शरीक के घर वाले फौरन कतर पहुंच जाते हैं. भारतीय दूतावास और वकील की मदद से उनकी मुलाकात जेल में शकीर और ओनिबा से होती है. शकीर घर वालों को सारी कहानी सुनाता है. पर सबूत उन दोनों के खिलाफ थे. लिहाजा कुछ वक्त बाद शकीर के घर वाले वापस मुंबई आ जाते हैं.
उधर, दूसरी तरफ कतर की अदालत मुकदमे की सुनवाई के बाद शकीर और ओनिबा को दस साल कैद की सजा सुना देती है. सजा की खबर सुनते ही शकीर के घर वाले फिर दोहा पहुंचते हैं. भारतीय दूतावास से मदद की अपील करते हैं, पर कुछ नहीं होता. हां एक चीज जरूर होती है. दोहा जेल अथॉरिटी शरीक के घरवालों को उसका मोबाइल और पासपोर्ट सौंप देते हैं. इसी मोबाइल से इस कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट सामने आता है. एक ऐसा ट्विस्ट जो शायद आने वाले दिनो में भारत के लिए एक मिसाल बन जाए.
दोहा के जेलर से मिले शरीक के फोन में दरअसल शरीक और ओनिबा की बेगुनाही कैद थी. शरीक के फोन में शरीक और तबस्सुम के बीच हुई सारी बातचीत रिकार्ड थी. वो बातचीत भी जिसमें तबस्सुम बैग और पैकेट की बात कर रही है और शरीक बार-बार पूछ रहा है कि कहीं बैग में कोई गलत चीज तो नहीं जिससे वो परेशानी में पड़ जाए. ये ऑडियो शरीक के मोबाइल से मिलता है.
ऑडियो का सच सुनते ही शरीक और ओनिबा के घर वाले फौरन मुंबई में नागपाड़ा पुलिस स्टेशन पहुंचते हैं और एफआईआर लिखाते हैं. नागपड़ा पुलिस तबस्सुम को गिरफ्तार कर लेती है. शरीक के मोबाइल पर ऑडियो सुनने के बाद वो ये मान जाती है कि शरीक और ओनिबा को बैग में चरस उसने ही दी थी. वो दोनों बेगुनाह हैं. तबस्सुम के बयान के बाद नागपाड़ा पुलिस दिसंबर 2019 में इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार करती है. इनमें तबस्सुम का साथी निज़ाम कारा, बादशाह समद और यासीन अब्दुल शामिल थे. बैंगलुरू में शरीक को बैग और होटल में ठहरने का इंतजाम निजाम कारा ने ही कराया था. मगर बाद में चारों जेल से जमानत पर रिहा हो जाते हैं.
इस बीच अक्तूबर 2019 में ओनिबा के अब्बू नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डायरेक्टर राकेश अस्थाना को एक पत्र लिखते हैं और अपनी बेटी और दामाद की सारी कहानी बताते हैं. साथ में वो ऑडियो रिकार्डिंग भी देते हैं. राकेश अस्थान ये केस एनसीबी के डायरेक्टर (ऑप्स) केपीएस मल्होत्रा को सौंप देते हैं. एनसीबी की टीम दिसंबर से मामले की जांच शुरू करती है. तबस्सुम और निजाम कारा पर नजर रखने लगती है. इसी बीच नागपाड़ा पुलिस चरस के साथ निजाम कारा को फिर से गिरफ्तार कर लेती है और उसे जेल भेज देती है. अब एनसीबी की टीम निजाम के जेल से बाहर आने का इंतजार करने लगती है.
2020 में कारा जेल से बाहर आ जाता है. इस बीच कारा पर नजर रखने के दौरान पता चलता है कि उसकी बीवी शाहिदा कुल्लू से ड्रग्स की खेप मंगवा रही है. एनसीबी की टीम कुल्लू में दबिश डाल कर करीब डेढ़ किलो चरस के साथ चार लोगों को गिरफ्तार कर लेती है. फिर उनके बयान पर शाहिदा को भी पकड़ लेती है. अब शाहिदा, निजाम कारा और तबस्सुम एनसीबी के शिकंजे में थे. एनसीबी एनडीपीएस एक्ट के तहत इनके बयान दर्ज करती है, जिसमें ये लोग शरीक और ओनिबा की बेगुनाही की बात कबूल कर लेते हैं.
एनसीबी के सामने तस्वीर अब साफ हो चुकी थी. असली गुनहगारों के बयान, ऑडियो क्लिप समेत सारे सबूत एनसीबी के पास थे. मगर शरीक और ओनिबा हिंदुस्तान में नहीं बल्कि दूसरे देश में कैद हैं. फिर रिहाई कैसे हो? एनसीबी ने फैसला किया है कि वो दो बेगुनाह हिंदुस्तानियों को कतर की जेल से आजाद करवा कर हिंदुस्तान लाएगी. इसके लिए एनसीबी के डायरेक्टर राकेश अस्थाना विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की मदद से कतर में भारतीय दूतावास के जरिए कतर की सरकार के सामने शरीक और ओनिबा की बेगुनाही के सारे सबूत रखेंगे. अगर जरूरत पड़ी तो कतर सरकार को शरीक और ओनिबा के बदले असली गुनहगारों को सौंपा जा सकता है. यानी बेगुनाहों और गुनहगारों की अदला-बदली हो सकती है.
एनसीबी ने विदेश मंत्रालय के जरिए कतर सरकार को इसकी सूचना भेज दी है. उम्मीद है बहुत जल्द एनसीबी की एक टीम कतर जाए और अगर सब कुछ ठीक रहा तो बहुत मुमकिन है कि साल खत्म होने से पहले ही शरीक और ओनिबा मुंबई अपने घर होंगे. ओनिबा जब कतर गई थी तब वो एक महीने की गर्भवती थी. कतर में ही ओनिबा ने एक बेटी को जन्म दिया है. यानी अब वो दो नहीं बल्कि तीन होकर वापस अपने मुल्क लौटेंगे.