किसी भी राज्य (State) में कानून व्यवस्था (Law and Order) को बनाए रखने काम पुलिस (Police) की जिम्मेदारी होती है. इसलिए हर राज्य के जिलों में पुलिस की भूमिका अहम होती है. हर जिले में कई थाने पुलिस का केंद्र होते हैं. जो क्षेत्रवार कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम रोल अदा करते हैं. थानों और पुलिस के दस्तावेजों में अक्सर 'मालखाना' शब्द का इस्तेमाल होता है. तो आइए जानते हैं कि मालखाना क्या होता है?
मालखाना शब्द का मतलब
पुलिस के लिए और पुलिस से संबंधित कई दस्तावेजों में मालखाना शब्द का इस्तेमाल बहुत आम बात है. दरअसल, यह शब्द अरबी और फ़ारसी भाषा से आता है. मालखाना से मतलब ये है कि वह जगह जहां सारा माल-असबाब रखा जाता है. हिंदी में हम इसे भंडारगृह या कोष भी कहते हैं. एक ऐसा स्थान जहां सामान और अन्य माल रखा जाता है.
पुलिस का 'मालखाना'
सभी जनपदों में क्षेत्र और जनसंख्या के हिसाब से थाने होतें हैं. जो अपने अपने इलाकों में कानून व्यवस्था को बनाए रखने का काम करते हैं. पुलिस थानों में हर दिन कई ऐसे शब्दों का इस्तेंमाल होता है, जो आम नागरिकों के लिए कई बार पहेली बन जाते हैं, मगर वो शब्द बड़े काम होते हैं, ऐसा शब्द है मालखाना. मालखाने का सीधा मतलब होता है भंडारगृह या कोष. इसका इस्तेमाल अक्सर पुलिस थानों में होता है, क्योंकि वहां मालखाने होते हैं.
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जब पुलिस किसी भी मामले में किसी सामान जैसे हथियार, पैसा, ड्रग्स या गहने आदि को बरामद करती है और उसकी एंट्री थाने की रोजनामचे में भी दर्ज की जाती है, तो ऐसा बरामद सामान सरकारी संपत्ति की तरह हो जाता है. उसे केस प्रॉपर्टी कहा जाता है. यानी वो सामान या संपत्ति जिसका प्रयोग या बरामदगी किसी केस में हो, और उसमें जांच की जा रही हो. तो कोर्ट पुलिस को ऐसे मामलों में बरामद किया गया सामान संबंधित थाने में जमा करने का आदेश देती है.
तब केस की जांच में जुड़े पुलिसकर्मी बरामद किया गया पैसा, हथियार, ड्रग्स, शराब, गहने, दस्तावेज या अन्य कोई ज़रूरी सामान थाने के मालखाने में रख देते हैं. इसकी सूचना मालखाना रजिस्टर में दर्ज की जाती है. कुछ माह पहले आगरा जिले के जगदीशपुरा पुलिस स्टेशन का मालखाना उस वक्त सुर्खियों में आ गया था, जब वहां से चोरों ने 25 लाख का माल साफ कर दिया था. जिससे पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी.
मालखाने में रखा सामान पुलिस यह कहकर रिलीज नहीं करती है कि वो सामान अब केस प्रोपर्टी है. जिसे कोर्ट के आदेश पर रिलीज किया जा सकता है. इसके लिए कोर्ट से आदेश कराने में काफी समय लग जाता है. इसलिए ऐसा माल लंबे समय तक थाने के मालखाने में रखा जाता है. ज़रूरत पड़ने पर किसी भी मामले से संबंधित सामान को पुलिस कोर्ट में पेश कर देती है. ऐसा सामान कोर्ट के आदेश पर ही रिलीज किया जाता है.
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किसी भी थाने में मौजूद मालखाने का प्रभारी या इंचार्ज कोई हेड कांस्टेबल या उप निरीक्षक होता है. मालखाने की संपूर्ण जिम्मेदारी प्रभारी या इंचार्ज की ही होती है. अगर किसी वजह से मालखाना प्रभारी बाहर है, या छुट्टी पर हों तो ऐसी स्थिति में उसका चार्ज किसी अन्य हेड कांस्टेबल या उप निरीक्षक को दे दिया जाता है. मालखाना थाने का एक अहम हिस्सा होता है.