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1 कत्ल, 7 किरदार, 17 गोलियां...गोगामेड़ी की हत्या से लेकर शूटरों की गिरफ्तारी तक, कब-क्या-क्यों-कैसे हुआ?

सुखदेव सिंह गोगामेड़ी मर्डर केस में दोनों शूटरों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. उन्हें चंडीगढ़ से दिल्ली और राजस्थान पुलिस की टीम ने गिरफ्तार किया. एक शूटर नितिन फौजी से पुलिस ने पूछताछ की है, जिससे कई अहम खुलासे हुए हैं. 5 दिसंबर को हुई इस वारदात से लेकर शूटरों की गिरफ्तारी तक जानिए पूरे केस की कहानी.

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वारदात से लेकर शूटरों की गिरफ्तारी तक जानिए गोगामेड़ी मर्डर केस की कहानी.
वारदात से लेकर शूटरों की गिरफ्तारी तक जानिए गोगामेड़ी मर्डर केस की कहानी.

सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने राजस्थान पुलिस के साथ संयुक्त ऑपरेशन करके मुख्य आरोपी रोहित राठौड़ और नितिन फौजी को गिरफ्तार कर लिया है. इन दोनों शूटरों के साथ इनके एक मददगार उधम कदो को भी पुलिस ने चंडीगढ़ से पकड़ा है. दिल्ली पुलिस तीनों आरोपियों को चंडीगढ़ से दिल्ली लेकर आई है. 5 दिसंबर को हुई इस हत्या के मामले में एक दिन पहले ही जयपुर पुलिस ने इनके मुख्य मददगार रामवीर को गिरफ्तार किया था. रामवीर हरियाणा के महेंद्रगढ़ का रहने वाला है. बताया जाता है कि वो शूटर नितिन फौजी का दोस्त है. 

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जयपुर में मंगलवार को सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस हत्या की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गैंगस्टर रोहित गोदारा ने ली है. हमलावरों ने गोगामेड़ी के घर में घुसकर उन्हें गोली मारी थी. हत्या के बाद पुलिस से बचते बचाते रोहित राठौड़ और नितिन फौजी डीडवाना पहुंचे थे. वहां से सुजानगढ़ और फिर धारूहेड़ा गए. धारूहेड़ा से बस में सवार होकर मनाली पहुंचे. वहां से दोनों मंडी गए और फिर चंडीगढ़ पहुंचे. चंडीगढ़ में ही एक होटल में दोनों काफी समय तक रुके थे. मोबाइल सर्विलांस के जरिए पुलिस को मदद मिली. उन्हें होटल से गिरफ्तार कर लिया गया.

इस मर्डर केस में अब तक 2 शूटरों सहित कुल 4 आरोपी पकड़े जा चुके हैं. इस केस में हत्यारों को पकड़ने के लिए पुलिस को 72 घंटे की डेडलाइन तय करनी पड़ी. जिस हत्याकांड को लेकर पूरा राजस्थान सुलग उठा. उस सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड के 2 हत्यारोपी गिरफ्तार हो चुके हैं. पुलिस द्वारा पूछताछ में पता चला है कि हत्यारोपी फर्जी नाम से चंडीगढ़ के होटल में रुके थे. इन्होंने जयवीर, देवेंद्र और सुखवीर के नाम से होटल का कमरा नंबर 105 बुक किया था. होटल स्टाफ को इन आरोपियों ने बताया था कि वे मनाली से आ रहे हैं. इसके बाद इन्हें हरियाणा की ओर जाना है. 

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टैक्सी, ट्रेन, ऑटो और बस, जो मिला उससे भागते रहे हत्यारोपी

पुलिस के मुताबिक, 5 दिसंबर को जयपुर से भागकर रोहित और नितिन सबसे पहले टैक्सी से डीडवाना पहुंचे. फिर वो धारूहेड़ा पहुंचे. वहीं से पुलिस को कुछ सुराग मिले. फिर धारूहेड़ा से ऑटो लेकर दोनों रेवाड़ी रेलवे स्टेशन पहुंचते हैं. ट्रेन में सवार होकर दोनों हिसार स्टेशन पहुंचते हैं. वहां उनको कुछ मददगार मिल जाते हैं. वहां मौजूद उधम कदो हिसार में टैक्सी का इंतजाम कराता है, जिससे तीनों मनाली पहुंच जाते हैं. मनाली से तीनों एक साथ चंडीगढ़ वापस चले आते हैं. शनिवार की शाम 7 बजकर 40 मिनट पर शूटर और मददगार होटल पहुंचते हैं. ठीक 1 घंटे बाद पुलिस वहां पहुंच जाती है.

72 घंटे के अंदर शूटरों को गिरफ्तार करने में कामयाब हुई पुलिस

दिल्ली और राजस्थान पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. दोनों शूटरों की गिरफ्तारी पुलिस के लिए अहम कामयाबी है. पुलिस ने गोगामेड़ी के परिजनों को भरोसा दिया था कि वो आरोपियों को 72 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लेंगे. चंडीगढ़ से गिरफ्तार तीनों आरोपियों से अब जयपुर पुलिस पूछताछ कर हत्या के एक-एक राज जानेगी. एक मददगार पहले ही जयपुर से गिरफ्तार हो चुका है, जिससे पुलिस पूछताछ कर चुकी है. उसने पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे किए थे. उसे आधार पर बनाकर पुलिस की टीम एक से दूसरी कड़ी जोड़ते हुए दोनों मुख्य शूटरों तक पहुंचने में कामयाब रही.

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यह भी पढ़ें: गोदारा ने क्यों कराई हत्या, लॉरेंस से क्यों हुई दुश्मनी...सुखदेव मर्डर केस की Inside Story 

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वीरेंद्र चारण के साथ राजस्थान की जेल में बंद था रोहित राठौड़ 

गोगामेड़ी केस का मुख्या हत्यारोपी रोहित राठौड़ रेप के केस में राजस्थान की अजमेर जेल में वीरेंद्र चारण के साथ बंद था. उसने पूछताछ में बताया कि उसके ऊपर रेप का केस दर्ज था, जिसमें सुखदेव उसके खिलाफ पैरवी कर रहा था. वो सुखदेव से गुस्से में था. इसका फायदा विरेंद्र चारण ने उठाया और सुखदेव की हत्या के लिए तैयार किया. नितिन फौजी पर हरियाणा के महेंद्र गढ़ में किडनैपिंग का केस दर्ज है. वो भी जेल में रहने के दौरान वीरेंद्र चारण के संपर्क में आया था. उसको विदेश जाकर सेटल होना था. वीरेंद्र ने उसको विदेश सेटल होने का भरोसा दिया. इसका लालच देकर उसे मर्डर के लिए तैयार किया.

कौन है वीरेंद्र चारण, जिसने गोदारा के इशारे पर रची साजिश

एक लाख का इनामी गैंगस्टर वीरेंद्र चारण राजस्थान के चूरू जिले के सुजानगढ़ का रहने वाला है. साल 2015 में हुए रामलाल मेघवाल हत्याकांड में उसका नाम आया था. इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया. जेल में वो कई गैंगस्टरों के संपर्क में आया. वहां उसने अपना एक नेटवर्क बना लिया, जिसमें आनंदपाल सिंह लेकर रोहित गोदारा तक शामिल थे. साल 2022 में उसे जमानत मिली तो जेल से बाहर आ गया. इसके बाद उसने गोगामेड़ी के करीबी गैंगस्टर राजू ठेहट की हत्या की साजिश रची. उसके लिए शूटरों का इंतजाम किया. इस हत्याकांड के बाद नेपाल होते हुए दुबई भाग गया. 

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रोहित गोदारा और सुखदेव गोगामेड़ी के बीच प्रॉपर्टी विवाद 

गैंगस्टर रोहित गोदारा अपने कई मामलों में सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के दखल से नाराज था. इतना ही नहीं गोगामेड़ी गोदारा के दुश्मनों का पक्ष लेते थे. लिहाजा उसने रास्ते का रोड़ा हटाने की सुपारी अपने करीबी वीरेंद्र चारण को दी. वीरेंद्र ने अपने जानने वालों रोहित राठौर और नितिन फौजी से संपर्क किया. इसके बाद अपने गुर्गों के जरिए दोनों शूटरों को जयपुर में हथियार भेजवाए. उसी हथियार से दोनों ने हत्याकांड को अंजाम दिया. वारदात के पहले और उसके बाद दोनों शूटर लगातार वीरेंद्र के संपर्क में थे. होने से पहले रोहित और नितिन ने जयपुर के पास एक होटल के बगल में हथियार दबा दिए थे. 

वारदात से एक हफ्ते पहले रची गई थी हत्या की साजिश

5 दिसंबर से एक हफ्ता पहले ही हत्या की साजिश तय हो गई थी. यानि नवंबर के आखिरी हफ्ते में ही सबकुछ तय हो गया था. जिम्मेदारी सौंप दी गई थी. हथियारों का इंतजार हो गया था. शूटर भी मुस्तैद हो गए थे. रेकी का जिम्मा मारे गए नवीन शेखावत ने पूरा कर लिया था. ऐसे में अहम सवाल है कि आखिर रोहित राठौर और नितिन फौजी ने नवीन को गोलियों से क्यों भून दिया. इस सवाल का जवाब जाननने के लिए सीसीटीवी तस्वीरों को गौर से देखना होगा. जब गोली चली तो नवीन ने डर कर दोनों शूटरों को रोकने की कोशिश की थी. इसी वजह से रोहित और नितिन ने आखिरी वक्त में उसे खत्म कर दिया.

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गोगामेड़ी की हत्या से पहले शूटरों को मिले थे 50 हजार

ये भी खुलासा हुआ है कि शूटर नितिन और रोहित को गोगामेड़ी की हत्या से पहले 50-50 हजार रुपए मिले थे. उन्हें कत्ल के बाद चंडीगढ़ जाना था. प्लान के मुताबिक वो चंडीगढ़ पहुंच भी गए थे, जहां से दोनों गोवा रवाना हो जाते. फिर गोवा और दक्षिणी भारत के अन्य इलाकों में छिपते छिपाते दोनों के विदेश फरारी का इंतजाम हो जाता. लेकिन अब दोनों पुलिस की गिरफ्त में हैं और सवालों की लंबी लिस्ट तैयार है. गोगामेड़ी की हत्या को लेकर कई अहम सवाल हैं. सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने नितिन फौजी से पूछा है कि वो कब और कैसे रोहित गोदारा के संपर्क में आया था? नितिन के हथियार सप्लाई करने वाले वीरेंद्र चारण से क्या संबंध हैं? गोगामेड़ी की हत्या के लिए कितने पैसे मिले? रोहित राठौर और नवीन शेखावत को कैसे जानते थे? नवीन शेखावत को क्यों मार डाला? भागने में किसने-किसने मदद की? क्या रोहित गोदारा ने विदेश भागने के लिए फर्जी पासपोर्ट और वीजा दिए?

सिग्नल एप के जरिए शूटरों से संपर्क में था रोहित गोदारा

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पुलिस पूछताछ में ये भी खुलासा हुआ है कि गैंगस्टर रोहित गोदारा सिग्नल एप के जरिए लगातार शूटरों से संपर्क में बना हुआ था. इसके साथ ही उसने गोल्डी बराड़ को भी इस साजिश की जानकारी दी थी. मामला गैंग्स्टर से जुड़ा है लिजाहा केस को एनआईए को सौंपने की तैयारी है. सूत्रों की मानें तो राजस्थान गृह विभाग ने केंद्र सरकार को इसके लिए प्रस्ताव भेज दिया है. बहुत जल्द एनआईए की टीम इस केस की जांच अपने हाथों में लेने वाली है. गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े कई मामलों की जांच एनआईए पहले से ही कर रही है. इसमें ईडी भी अब शामिल हो गई है. वारदात वाले दिन ईडी ने राजस्थान में 13 जगहों पर एक साथ छापेमारी की थी.

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