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सुशांत केसः NDPS एक्ट की इन धाराओं के तहत हुई रिया की गिरफ्तारी

सुशांत की मौत के मामले में ड्रग्स एंगल आने के बाद एनसीबी ने तेजी से कार्रवाई की. ड्रग्स कनेक्शन के चलते ही रिया चक्रवर्ती को एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8(सी), 20(बी), 27(ए), 28 और 29 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है.

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रिया को तीन दिन पूछताछ करने के बाद एनसीबी ने गिरफ्तार किया है
रिया को तीन दिन पूछताछ करने के बाद एनसीबी ने गिरफ्तार किया है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ड्रग्स के एंगल पर जांच कर रहा NCB
  • 3 दिन से NCB रिया से कर रही थी पूछताछ
  • पूछताछ के तीसरे दिन रिया की गिरफ्तारी

सुशांत की मौत के मामले में ड्रग्स एंगल आने के बाद एनसीबी ने तेजी से कार्रवाई की. ड्रग्स कनेक्शन के चलते ही रिया चक्रवर्ती को एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8(सी), 20(बी), 27(ए), 28 और 29 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है. इससे पहले एनसीबी की टीम ने रिया के भाई शोविक और सुशांत के हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा को गिरफ्तार किया था. आइए आपको बताते हैं इन धाराओं के बारे में. 

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एनडीपीएस अधिनियम की धारा 20 
इस धारा के तहत नशीले पदार्थ (भांग-गांजा) की खेती करने, पैदा करने, बनाने, रखने, बेचने, खरीदने, लेन-देन करने, अंतरराज्य स्तर पर आयात-निर्यात या उपयोग करने पर सजा दी जाती है. यही धारा बताती है कि अगर किसी शख्स के पास छोटी मात्रा में यह नशीला पदार्थ पाया जाए तो छह महीने तक की सजा या जुर्माना हो सकता है. इसमें सश्रम कारावास की सजा हो सकती है. इसमें आर्थिक जुर्माना 10,000 तक हो सकता है.

जब कोई शख्स भांग-गांजा के साथ पकड़ा जाता है, जो वाणिज्यिक मात्रा की तुलना में कम है, लेकिन छोटी मात्रा से अधिक है तो धारा 20 (ii) के अनुसार सश्रम कारावास 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है. इसी प्रकार आर्थिक जुर्माना भी एक लाख रुपये तक बढ़ सकता है.  

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अगर बरामद किए गए नशीले पदार्थ (भांग-गांजा) की मात्रा वाणिज्यिक स्तर की है, तो सजा के तौर पर दोषी को सश्रम कारावास की सजा हो सकती है, जिसे 10 वर्ष से कम नहीं किया जा सकता है. लेकिन इसे 20 साल तक बढ़ाया सकता है. इसी प्रकार आर्थिक जुर्माना कम से कम 1 लाख रुपये और अधिकतम 2 लाख रुपये तक हो सकता है.

एनडीपीएस एक्ट की धारा 27,  धारा 8 क 
कोई भी व्यक्ति किसी संपत्ति के बारे में यह जानते हुए कि वो संपत्ति भारत या किसी अन्य देश में किए गए अपराध में भाग लेने की एवज में प्राप्त की गई है, या संपत्ति के अवैध मूल को छिपाने या किसी अपराध में किसी व्यक्ति की सहायता करने के लिए या कानूनी नतीजों से बचने के लिए किसी भी संपत्ति को परिवर्तित या स्थानांतरित करने वाला दोषी माना जाएगा.

कोई भी व्यक्ति किसी संपत्ति के बारे में यह जानते हुए कि वो संपत्ति भारत या किसी अन्य देश में किए गए अपराध में भाग लेने की एवज में प्राप्त की गई है, तो ऐसी किसी संपत्ति को न छुपायेगा और न ही उसके वास्तविक रूप, स्त्रोत, स्थान, स्वाभाव को बदल सकता है.                                                                                                                                                     
कोई भी व्यक्ति किसी संपत्ति के बारे में यह जानते हुए कि वो संपत्ति भारत या किसी अन्य देश में किए गए अपराध में भाग लेने की एवज में प्राप्त की गई है, ऐसी प्राप्त हुई किसी संपत्ति का न ही अधिग्रहण करेगा, न ही कब्जे में रखेगा और न ही उपयोग करेगा.

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उपरोक्त उपधाराओं का उल्लंघन करने पर कठोर कारावास का प्रावधान है, जो कम से कम 3 साल और अधिकतम 10 साल तक के लिए हो सकता है. साथ ही दोषी पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

एनडीपीएस एक्ट की धारा 28
इसके तहत अपराध करने का प्रयास करने पर सजा दी जाती है. मसलन, जो कोई भी इस अधिनियम के अधीन दंडनीय अपराध करने का प्रयास करता है या ऐसे अपराध करता है और ऐसा अपराध करने के संबंध में कोई कार्य करता है तो वह व्यक्ति उस अपराध के लिए उपबंधित दंड का हकदार होगा.

एनडीपीएस एक्ट की धारा 29
इस धारा के तहत उकसाने और आपराधिक षड्यंत्र के लिए दोषी को सजा दी जाती है. इसकी एक्ट की उपधारा 1 के तहत भी इस अध्याय के अधीन दंडनीय अपराध के लिए उकसाएगा या ऐसा कोई अपराध करने के आपराधिक षड्यंत्र का पक्षकार होगा, और भारतीय दंड संहिता की धारा 116 में किसी बात के होते हुए भी, उस अपराध के लिए उपबंधित दंड का हकदार होगा. 

जबकि इस एक्ट की उपधारा 2 के तहत जो व्यक्ति किसी अपराध के लिए उकसाएगा या किसी अपराध करने के षंडयंत्र का पक्षकार होगा, जो भारत में या भारत से बाहर और अलग किसी स्थान से ये सब करेगा तो वो दोषी माना जाएगा. अगर भारत के भीतर अपराध किया जाता है या, भारत से बाहर और अलग किसी दूसरे स्थान पर मादक दवाओं या नशीले पदार्थों से संबंधित ऐसा अपराध करता है, तो उसका अपराध दंडनीय होगा.  

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