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सुशांत केसः रिया के लिए परेशानी बन सकती है NDPS एक्ट की धारा 27 ए, जानिए क्यों

रिया के वकील उन्हें जमानत दिलाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं. इस मामले पर अभी भी अदालत में सुनवाई चल रही है. लेकिन एनडीपीएस एक्ट की धारा 27 ए रिया चक्रवर्ती के लिए परेशानी का सबब बन सकती है, क्योंकि उसने खुद भी ड्रग लेने की बात कबूल कर ली थी.

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रिया की जमानत के लिए अदालत में अर्जी लगाई गई है
रिया की जमानत के लिए अदालत में अर्जी लगाई गई है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ड्रग्स के एंगल पर जांच कर रहा NCB
  • एनडीपीएस एक्ट के तहत हुई गिरफ्तारी
  • एक्ट की धाराओं में सख्त का सजा का प्रावधान


सुशांत केस के ड्रग्स कनेक्शन में रिया चक्रवर्ती गिरफ्तार हो चुकी हैं. उनके वकील उन्हें जमानत दिलाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं. दो दिन से वो अदालत के सामने नई-नई दलीलें पेश कर रहे हैं. इस मामले पर अभी भी अदालत में सुनवाई चल रही है, लेकिन एनडीपीएस एक्ट की धारा 27 ए रिया चक्रवर्ती के लिए परेशानी का सबब बन सकती है. क्योंकि उसने खुद भी ड्रग लेने की बात कबूल कर ली थी.

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क्या है एनडीपीएस एक्ट की धारा 27 (ए)
नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टंस एक्ट, 1985 (एनडीपीएस एक्ट) मादक दवाओं से संबंधित एक कठोर कानून है. इसकी धारा 27 के तहत, अगर कोई नारकोटिक ड्रग्स यानी नशीले पदार्थ का सेवन करता है, तो यह कृत्य भी दंडनीय अपराध है. इस धारा के क्लॉज (ए) में कहा गया है कि सरकार द्वारा सूचितबद्ध किए गए कोकीन, मॉर्फीन जैसे अन्य नारकोटिस ड्रग्स का सेवन करने का दोषी पाए जाने पर एक साल कारावास या 20 हजार रुपये का जुर्माना या फिर दोनों एक साथ सजा के तौर पर दिए जा सकते हैं.

सुशांत केस में एनडीपीएस एक्ट का इस्तेमाल
सुशांत की मौत के मामले में जब से नशा और ड्रग्स का कनेक्शन आया है, जब से लगातार हम एनडीपीएस (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances) एक्ट की धाराओं के बारे में सुन रहे हैं. दरअसल, इस केस में अभी तक इसी एक्ट के तहत करीब 10 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं. जिनके तार नशे के कारोबार से जुड़े हैं. गिरफ्तार होने वालों में रिया चक्रवर्ती और उसका भाई शोविक भी शामिल है.

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इस एक्ट की धारा 20 में ड्रग्स का उत्पादन करने, बनाने, रखने, बेचने, खरीदने, दूसरी जगह भेजने, एक राज्य से दूसरे राज्य में आयात या निर्यात करने और इस्तेमाल करने पर सजा का प्रावधान है. 

एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 में क्लॉज दो के (ए) पार्ट में कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति के पास प्रतिबंधित ड्रग्स की कम मात्रा पाई जाती है, तो उसे 6 महीने तक की जेल या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों दिए जा सकते हैं.  

क्लॉज दो के (बी) पार्ट में बताया गया है कि अगर किसी व्यक्ति के पास इतना ड्रग्स पाया जाता है, जो कम मात्रा से ज्यादा हो और भले ही कमर्शियल क्वांटिटी से कम हो तो, ऐसे व्यक्ति को 10 साल तक कारावास की सजा हो सकती है और एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है. 

क्लॉज दो के (सी) पार्ट में कहा गया है कि अगर किसी के पास ड्रग्स की कमर्शियल क्वांटिटी पाई जाती है, तो उस शख्स को कम से कम 10 साल कारावास की सजा हो सकती है, जिसे आगे 20 साल तक बढ़ाया जा सकता है. साथ ही दोषी पर 1 से 2 लाख रुपये के बीच जर्माना भी लगाया जा सकता है. 

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इस एक्ट की धारा 22 के अनुसार, इस कानून का उल्लंघन करते हुए अगर कोई नियम या आदेश दिया जाता है, और उसी आधार पर लाइसेंस जारी किया जाता है, या नशीला पदार्थ बेचने, खरीदने, अंतरराज्यीय आयात-निर्यात का काम किया जाता है, तो वह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है. 

इसी प्रकार से एनडीपीएस एक्ट की धारा 29 में उकसाने और आपराधिक साजिश रचने का दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान किया गया है. आपको बताते चलें कि सुशांत केस से जुड़े ड्रग्स के मामले में रिया चक्रवर्ती और उसके भाई समेत अन्य कई लोगों को इसी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है. अब सभी से पूछताछ की जा रही है.
 

 

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