यूपी एसटीएफ और लखनऊ पुलिस ने बीते रविवार को किडनैप हुई महिला वकील को भले ही अपनी सूझबूझ से बचा लिया हो, तीन अपहरणकर्ता भी दबोच लिए गए हों, लेकिन इस पूरे ऑपरेशन में कई ऐसे मोड़ आए, कई ऐसी मुश्किलें आईं, जो पुलिस के लिए एक नया ही अनुभव बन गईं.
बीते रविवार को लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी से इवनिंग वॉक पर निकली महिला अधिवक्ता प्रीति शुक्ला को अपहरणकर्ताओं से छुड़ाना, यूपी एसटीएफ और लखनऊ पुलिस के लिए कम चुनौतीपूर्ण नहीं था. अपहरणकर्ताओं ने तमाम ऐसी चालाकियां कीं, जिसके चलते पुलिस को पहले लोकेशन ढूंढने में और फिर लोकेशन मिलने के बाद ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए 3 दिन लग गए.
बदमाशों ने प्रीति शुक्ला को किडनैप करने के लिए किसी बड़ी गाड़ी का नहीं बल्कि छोटी इंडिगो कार का इस्तेमाल किया, गाड़ी के अंदर पांच अपहरणकर्ता मौजूद थे, जैसे ही प्रीति शुक्ला को किडनैप किया, बदमाशों ने उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी. जिस जगह पर प्रीति को छिपा कर रखा गया, वह भी सुशांत गोल्फ सिटी से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर है. लेकिन बदमाश लगभग 2 घंटे तक प्रीति की आंख पर पट्टी बांधकर कार को इलाके में घुमाते रहे, ताकि महिला को लगे कि बदमाश उसे लखनऊ से बहुत दूर कहीं ले जा रहे हैं.
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अपहरणकर्ताओं ने महिला के मोबाइल से ही एक करोड़ की फिरौती मांगी, पुलिस के लिए फिरौती की यह कॉल वरदान साबित हुई, उसने सर्विलांस के जरिए लोकेशन ट्रेस करना शुरू कर दिया. एक करोड़ की फिरौती बाद में 25 लाख रुपए तय हुई.
महिला के पति अनुराग शुक्ला 25 लाख कैश देने के लिए राजी भी हो गए, लेकिन बदमाशों ने फिरौती के लिए जो जगह चुनी, वह लखनऊ रायबरेली बॉर्डर के एक मैदान को चुना. पुलिस के लिए उस जगह पर ऑपरेशन करना इतना आसान नहीं था, क्योंकि मैदान की वजह से कहीं भी पुलिस टीम आती दिखाई पड़ती तो बदमाश भाग सकते थे. महिला की जान को खतरा हो सकता था.
इस ऑपरेशन में अफसरों की नींद तक हराम कर दी थी. बदमाश दिन भर कोई गतिविधि नहीं करते, दिन भर कोई कॉल नहीं करते, लेकिन रात होते ही कॉल करने लगते और पुलिस टीमों को कभी मोहनलालगंज, कभी पीजीआई, कभी रायबरेली भागना पड़ता. फिरौती के लिए आई कॉल और सुशांत गोल्फ सिटी जहां से किडनैपिंग हुई वहां की कॉल डिटेल के आधार पर एक नंबर निकाला जो दोनों जगह पर सक्रिय था.
नजर रखी जाने लगी तो तय हो गया कि महिला को हरकंश गढ़ी में एक निजी अस्पताल के पीछे बनी कॉलोनी के एक मकान में रखा गया है. यूपी एसटीएफ लखनऊ पुलिस की टीमें महिला की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बहुत एहतियात बरत रही थीं. यूपी एसटीएफ के डिप्टी एसपी बिजली मिस्त्री बनकर रेकी करने लगे. तो वहीं एक टीम फिरौती की रकम ले जा रहे अनुराग शुक्ला के साथ सक्रिय की गई, ताकि फिरौती की रकम देने के दौरान बदमाशों की धरपकड़ की जा सके.
इधर हरकंश गढ़ी में ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए इलाके की बिजली कटवा दी गई. नाइट विजन कैमरा के साथ यूपी एसटीएफ की टीम घर के अंदर की हर गतिविधि पर नजर रखने लगी. जहां पर यूपी एसटीएफ को साफ हो गया कि घर के अंदर एक महिला बंधी पड़ी है.
लेकिन बिजली कटने की वजह से कॉलोनी की एक महिला छत पर टहल रही थी, उसने देखा कि एक घर के पास 10-12 लोग इकट्ठा हैं. कुछ लोग छत पर चढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. महिला को लगा बदमाश आ गए हैं, उसने पुलिस की 112 कंट्रोल रूम को सूचना दे दी.
सूचना मिलते ही इलाके की पुलिस पेट्रोलिंग गाड़ी भी आ धमकी. जब तक यूपी एसटीएफ कुछ समझ पाती, 112 के सिपाहियों को रोकती, उससे पहले ही पीजीआई थाने में तैनात दो सिपाही घर के अंदर दाखिल हो गए और सबसे पहले पकड़े गए अपहरणकर्ता संतोष चौबे को डपट कर पूछने लगे कि घर के अंदर क्या चल रहा है, दरवाजा खोलो.
लखनऊ क्राइम ब्रांच यूपीएसटीएफ मोहनलालगंज पीजीआई थाने की पुलिस टीमों ने जैसे ही देखा कि घर के अंदर एक 112 का सिपाही घुस गया है और उसने दरवाजा खुलवा लिया है तो आनन-फानन में सारी पुलिस टीम अंदर पहुंच गई महिला को सुरक्षित निकाल लिया गया और संतोष चौबे गिरफ्तार को गिरफ्तार कर लिया. अब तक इस पूरी वारदात में शामिल तीन आरोपी संतोष चौबे, रोहित गौतम और लव कुश को गिरफ्तार कर लिया गया है. अभी घटना में शामिल छह आरोपियों की तलाश जारी है.