देश की बागडोर असल मायने में अफसरों के हाथ में होती है. यदि नौकरशाही दुरुस्त हो तो कानून-व्यवस्था चाकचौबंद रहती है. जिस तरह से भ्रष्टाचार का दीमक नौकरशाही को खोखला किए जा रहा है, लोगों का उससे विश्वास उठता जा रहा है. लेकिन कुछ अफसर ऐसे भी हैं, जिन्होंने देश सेवा के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी. उनके कारनामे आज मिसाल के तौर पर पेश किए जाते हैं.
aajtak.in ऐसे ही प्रशासनिक और पुलिस अफसरों पर एक सीरीज पेश कर रहा है. इस कड़ी में आज पेश है अशोक चक्र से सम्मानित शहीद पुलिस अफसर हेमंत करकरे की कहानी, जिन्होंने 26/11 के आतंकी हमले में आतंकी अजमल आमिर कसाब को पकड़ा था.
- 26/11 आतंकी हमले में शहीद तत्कालीन एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे का जन्म 12 दिसंबर 1954 को करहड़े ब्राह्मण परिवार में हुआ था.
- अपने परिवार में हेमंत तीन भाइयों और एक बहन में सबसे बड़े थे. उनकी प्रारंभिक शिक्षा वर्धा के चितरंजन दास स्कूल में हुई थी.
- 1975 में उन्होंने विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नागपुर से मैकेनिकल इंजीनियर की डिग्री ली. उन्होंने हिंदुस्तान यूनीलिवर में नौकरी भी की थी.
- 1982 में वो आईपीएस अधिकारी बने. महाराष्ट्र के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर के बाद इनको एटीएस चीफ बनाया गया था. इस दौरान इन्होंने कई कारनामे किए.
- वह ऑस्ट्रिया में भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के अधिकारी के रूप में सात साल तक तैनात थे. चंद्रपुर के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में भी काम किया था.
- नॉरकोटिक्स विभाग में तैनाती के दौरान उन्होंने पहली बार विदेशी ड्रग्स माफिया को गिरगांव चौपाटी के पास मार गिराने का कारनामा कर दिखाया था.
- 8 सितंबर 2006 में महाराष्ट्र के मालेगांव में सीरियल ब्लास्ट हुए थे. इसकी जांच हेमंत करकरे को सौंपी गई थी. उनकी चार्जशीट को लेकर कई सवाल खड़े हुए.
- जांच के दौरान उनपर आरोपियों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगा. कहा जाता है कि एक आरोपी सुधाकर चतुर्वेदी के घर आरडीएक्स भी उनकी टीम के इंस्पेक्टर बागड़े ने रखा था.
- उन पर यह भी आरोप लगा कि साध्वी प्रज्ञा सहित तमाम आरोपियों को एक साजिश के तहत फंसाया गया. उन्होंने एक प्रमुख समुदाय पार्टी के विरोध में काम किया.
- 26 नवंबर 2008 में मुंबई में आतंकी हमला हुआ. हेमंत करकरे दादर स्थित अपने घर पर थे. वह फौरन अपने दस्ते के साथ मौके पर पहुंचे.
- उसी समय उनको खबर मिली कि कॉर्पोरेशन बैंक के एटीएम के पास आतंकी एक लाल रंग की कार के पीछे छिपे हुए हैं. वहां तुरंत पहुंचे तो आतंकी फायरिंग करने लगे.
- इसी दौरान एक गोली एक आतंकी के कंधे पर लगी. वो घायल हो गया. उसके हाथ से एके-47 गिर गया. वह आतंकी अजमल कसाब था, जिसे करकरे ने धर दबोचा.
- इसी दौरान आतंकियों की ओर से जवाबी फायरिंग में तीन गोली इस बहादुर जवान को भी लगी, जिसके बाद वह शहीद हो गए.
- हेमंत करकरे के साथ सेना के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, मुंबई पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त अशोक कामटे और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विजय सालस्कर शहीद हो गए.
- 26 नवंबर 2009 में इस शहीद की शहादत को सलाम करते हुए भारत सरकार ने मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया.