scorecardresearch
 

पुलिस हिरासत में मौत, आठ पुलिसवालों के खिलाफ हत्या का केस... अदालत का फरमान- फिर खोलें जांच फाइल

अदालत ने 4 अक्टूबर को जारी किए गए अपने आदेश में कहा कि इस मामले में मृतक की उम्र 36 वर्ष बताई गई है और मृतक के अतीत में किसी गंभीर बीमारी का कोई सबूत नहीं है, न ही मृतक द्वारा शराब या नशीली दवाओं के सेवन का कोई उल्लेख है, जिससे उसकी मौत हो सकती है.

Advertisement
X
आरोप है कि पीड़ित को पुलिस ने पूछताछ के नाम पर पीटा था (सांकेतिक फोटो- Meta AI)
आरोप है कि पीड़ित को पुलिस ने पूछताछ के नाम पर पीटा था (सांकेतिक फोटो- Meta AI)

UP Custodial Death Case Reopen: उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले की एक अदालत ने तीन साल पहले पुलिस हिरासत में मारे गए एक शख्स के मामले में फिर से जांच फाइल खोलने का फरमान सुनाया है. साल 2021 में 36 वर्षीय एक शख्स की कस्टोडियल डेथ के मामले आठ पुलिसकर्मी हत्या के आरोपों का सामना कर रहे हैं. अदालत ने कहा कि इस केस की जांच अधूरी और त्रुटिपूर्ण लगती है.

Advertisement

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सुधा यादव ने पुलिस के इस कथन को खारिज कर दिया कि मृतक जियाउद्दीन की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी, उन्होंने मृतक के शरीर पर पाए गए गहरे चोट के निशानों की ओर इशारा किया.

अदालत ने 4 अक्टूबर को जारी किए गए अपने आदेश में कहा कि इस मामले में मृतक की उम्र 36 वर्ष बताई गई है और मृतक के अतीत में किसी गंभीर बीमारी का कोई सबूत नहीं है, न ही मृतक द्वारा शराब या नशीली दवाओं के सेवन का कोई उल्लेख है, जिससे उसकी मौत हो सकती है. इन बिंदुओं पर पुलिस द्वारा की गई जांच अधूरी और त्रुटिपूर्ण प्रतीत होती है.

पीटीआई के मुताबिक, 24 मार्च, 2021 को अंबेडकर नगर जिले में सम्मनपुर थाने में पुलिस हिरासत में जियाउद्दीन की मौत हो गई थी. 26 मार्च, 2021 को इस संबंध में सम्मनपुर थाने के आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था. 

Advertisement

दरअसल, पुलिस ने डकैती के एक मामले में सम्मनपुर थाने में जियाउद्दीन को हिरासत में लिया था. मृतक के भाई शहाबुद्दीन की शिकायत पर सभी आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और अपहरण का मामला दर्ज किया गया था.

मृतक के भाई शहाबुद्दीन ने आरोप लगाया था कि उसके भाई को थाने में लगातार पीटा गया और अगले दिन जब उसकी हालत बिगड़ी तो पुलिस ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई थी.

सीजेएम ने अपने आदेश में कहा, हालांकि पुलिस अधिकारी हिरासत में किसी भी तरह की यातना से इनकार करते रहे, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जियाउद्दीन के शरीर पर मिले गहरे चोट के निशान ने आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ संदेह पैदा कर दिया है. 

2 अक्टूबर 2022 को पुलिस जांच अधिकारी बीरेंद्र बहादुर सिंह ने हिरासत में मौत के आरोपी सभी पुलिसकर्मियों को दोषमुक्त करते हुए मौत का कारण हार्ट अटैक बताया था. इसके बाद शहाबुद्दीन ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में जियाउद्दीन के शरीर पर गहरे चोट के निशान पाए गए. यह रिपोर्ट जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गई और पुलिसकर्मियों के खिलाफ गई.

सीजेएम ने अपने आदेश में कहा कि वादी द्वारा प्रस्तुत विरोध याचिका स्वीकार की जाती है, और मामले में विवेचक द्वारा प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट तदनुसार खारिज की जाती है.

Advertisement

अम्बेडकर नगर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया जाता है कि वे वादी द्वारा उठाई गई आपत्ति और उपरोक्त टिप्पणियों के मद्देनजर अपनी निगरानी में निष्पक्ष और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए पुलिस उपाधीक्षक स्तर के एक अधिकारी को नियुक्त करें.

अम्बेडकर नगर के पुलिस अधीक्षक कौस्तुभ ने कहा कि क्षेत्राधिकारी, शहर, अकबरपुर, देवेन्द्र मौर्य को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है. हिरासत में मौत के आरोपी सभी आठ पुलिसकर्मी वर्तमान में पुलिस बल में कार्यरत हैं.

Live TV

Advertisement
Advertisement