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MLA मुख्तार अंसारी को यूपी ट्रांसफर करने का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

पंजाब सरकार के वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि यूपी सरकार की मांग संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है. अगर इसे माना गया तो भविष्य में ऐसे मुकदमों की बाढ़ आ जाएगी. उन्होंने कोर्ट से यूपी की याचिका खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि ये याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत भी मेंटेनेबल नहीं है.

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मुख्तार अंसारी इस वक्त पंजाब की रोपड़ जेल में बंद हैं
मुख्तार अंसारी इस वक्त पंजाब की रोपड़ जेल में बंद हैं
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूपी सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
  • सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित
  • वकील दुष्यंत दवे ने कहा- यूपी भी करे पंजाब का सम्मान

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को पंजाब की रोपड़ जिले से यूपी ट्रांसफर किए जाने वाली यूपी सरकार की अर्जी पर सभी पक्षों की दलील सुनी और दलीलें पूरी हो जाने पर फैसला सुरक्षित कर लिया. अब कोर्ट अपने फैसले में तय करेगी कि मुख्तार अंसारी को पंजाब से यूपी की जेल में ट्रांसफर किया जाए या नहीं. या फिर कोर्ट मुख्तार अंसारी से जुड़े सभी मामलों और उन्हें भी दिल्ली शिफ्ट करने पर फैसला दे सकती है.

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दरअसल, विधायक मुख्तार अंसारी ने उन्हें यूपी में ट्रांसफर किए जाने पर कहा कि यूपी में उनकी जान को खतरा है. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मुख्तार के वकील कह रहे हैं कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ट्रायल कर दें. ऐसे तो विजय माल्या को भारत लाने कि ज़रूरत नहीं, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ही उनकी भी पेशी हो जाए.

उधर, पंजाब सरकार के वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि यूपी सरकार की मांग संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है. अगर इसे माना गया तो भविष्य में ऐसे मुकदमों की बाढ़ आ जाएगी. उन्होंने कोर्ट से यूपी की याचिका खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि ये याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत भी मेंटेनेबल नहीं है. मुख्तार अंसारी को लेकर यूपी सरकार जिस आधार पर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मांग की, वह मांग न्यायपालिका के सिद्धांतों का उल्लंघन करती है.

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इस मसले पर अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत स्टेट याचिका मूव नहीं कर सकता, क्योंकि स्टेट यानी सरकार को सिटीजन की तरह बुनियादी अधिकार नहीं है.

पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने सुनवाई के दौरान कहा कि हम यूपी राज्य का सम्मान करते हैं. ऐसे ही यूपी को भी पंजाब का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि यूपी में अंसारी के खिलाफ 10-15 साल से मुकदमें चल रहे हैं और वे हमें इस देरी के लिए दोषी ठहरा रहे हैं. इस मुद्दे पर दुष्यंत दवे ने विस्तृत तर्क देते हुए कहा कि राज्य सरकार मौलिक अधिकारों के लिए अनुच्छेद 32 की याचिका दायर नहीं कर सकती. यूपी राज्य के पास बचाव का मौलिक अधिकार नहीं है.

वकील दवे ने कहा कि यूपी सरकार जो दावा कर रही है, खासकर मुख्तार के स्वास्थ्य को लेकर वो सारी दलीलें गलत हैं. पंजाब सरकार ने अपने हलफनामे में साफ जिक्र किया है कि मुख्तार के स्वास्थ्य की हालत पर स्पेशलिस्ट डॉक्टर द्वारा ही रिपोर्ट तैयार की गई है. मुख्तार के स्वास्थ की जांच और रिपोर्ट राज्य सरकार के अंतर्गत आने वाले अस्पताल ने नहीं बल्कि केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले अस्पताल ने की है. पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने मुख्तार के स्वास्थ की जांच कर रिपोर्ट तैयार की है.

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दुष्यंत दवे ने इस आधार पर कहा कि मुख्तार अंसारी को लेकर जो बातें पंजाब सरकार को लेकर यूपी सरकार ने कही हैं, वो पूरी तरह निराधार हैं. मुख्तार अंसारी पंजाब सरकार के लिए भी अपराधी हैं, लेकिन यूपी सरकार इस मामले में पंजाब सरकार को कटघरे में खड़ा कर रही है. विशेषज्ञ डॉक्टर की जो भी रिपोर्ट है, हमने उस पर ही बात की है. यूपी सरकार के सारे आरोप निराधार हैं.

दवे ने कहा कि पीजीआई चंडीगढ़, जो केंद्र सरकार के तहत आता है. उसने कई बार मुख्तार की तबीयत और स्वास्थ्य को लेकर रिपोर्ट दी है. इसके पर्याप्त साक्ष्य हमारे पास मौजूद हैं. पंजाब के लिए वह एक आरोपी है और कुछ नहीं. जबकि एसजी तुषार मेहता ने जो आरोप लगाए हैं वो पूरी तरह से गलत हैं. पंजाब पुलिस के रिकॉर्ड में राज्य सरकार द्वारा दर्ज एफआईआर सही है. यानी मुख्तार पंजाब सरकार के लिए एक अपराधी से ज्यादा कुछ नहीं.

 

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