उत्तर प्रदेश के धर्मांतरण रैकेट मामले में पकड़े गए तीनों आरोपियों से पूछताछ में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं. अब पकड़े गए आरोपियों ने जांच अधिकारियों को बताया कि धर्म परिवर्तन कराने का काम चार चरणों में होता था. इस संबंध में उमर गौतम, अब्दुल मन्नान और इरफान ख्वाजा के मोबाइल, लैपटॉप से भी अहम जानकारी मिली है.
पहला चरणः इस्लाम की तरफ लौटें
इस मिशन के तहत उस व्यक्ति को चुना जाता है, जो लोगों को धर्म परिवर्तन करने के लिए बरगला सके. उसको इस्लाम की अच्छाइयां उसकी भाषा में समझा सके. नोएडा की डेफ सोसाइटी के मूक बधिर बच्चों का धर्मांतरण कराने वाला टीचर इसी रिवर्ट बैक टू इस्लाम से जुड़ा था.
दूसरा चरणः मुताक्की
यह धर्मांतरण का दूसरा चरण होता. इसमें इस्लाम पढ़ाने से पहले इस्लाम के प्रति अच्छी भावना पैदा की जाती है. इसमें इस मिशन में लगे व्यक्ति को ही कोड भाषा में मुतक्की कहा जाता था. यूपी एटीएस की गिरफ्त में आया बाल कल्याण मंत्रालय का पूर्व कर्मचारी और इंटरप्रेटर इरफान ख्वाजा और अब्दुल मन्नान इस मिशन मुतक्की की अहम कड़ी थे.
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तीसरा चरणः अल्लाह के बंदे
इस्लाम के प्रति अच्छी भावना जिन लोगों में पैदा हो जाती है, उनको यूट्यूब के जरिए वीडियो भेजे जाते हैं. ताकि वीडियो देखकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे धर्मांतरण के अभियान में लगे मौलाना और प्रभावी ढंग से उस धर्म परिवर्तन की राह में चल रहे नए व्यक्ति को प्रभावित करते हैं. जब यूट्यूब पर वीडियो देखने के बाद कोई व्यक्ति उस वीडियो को लाइक करता है तो अचानक से मैसेज बॉक्स में 'अल्लाह के बंदे' एक अनजान प्रोफाइल से लिख दिया जाता.
अल्लाह के बंदे शब्द उन लोगों के लिए संदेश होता जो व्यक्ति को प्रभावित करने के लिए अच्छी नौकरी, पैसा, अच्छी जिंदगी, हर संभव मदद का वादा करते हैं और इसके बाद उस शख्स के पास अनजान नंबरों से फोन कॉल्स पहुंचने लगते हैं. बातचीत का सिलसिला शुरू हो जाता है. गुरुग्राम निवासी मन्नू यादव इसी तरह से अब्दुल मन्नान बना और कानपुर का आदित्य गुप्ता ने इसी के तहत धर्म परिवर्तन किया. और वे इस्लाम के प्रति कट्टर होते चले गए.
चौथा चरण
यूपी एटीएस की पूछताछ और छानबीन में जिन शब्दों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुआ, उसमें एक शब्द था सलात. यूपी एटीएस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ की तो पता चला कि ये कोड वर्ड है. जिसे नमाज की जगह इस्तेमाल किया जाता है. यूपी एटीएस को छानबीन में कई वीडियो और ऑडियो भी मिले हैं, जिसमें सलात शब्द का बहुत इस्तेमाल हुआ है. यूपी एटीएस ने करीब 100 से ज्यादा ऑडियो वीडियो खंगाले जिसमें इस शब्द का इस्तेमाल हुआ है. जिसका मतलब निकला कि पांचों वक्त की नमाज का कड़ाई से पालन हो, नमाज अदा की जाए. जब कोई सलात का कड़ाई से पालन करता है, तब जाकर उसका अंतिम चरण में इस्लामिक दावा सेंटर के जरिए धर्मांतरण करवा दिया जाता है.
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मोबाइल कॉन्टेक्ट बदले
आदित्य या अब्दुल मन्नान जैसे लोग जब प्रभावित होकर इस्लाम स्वीकार करने की राह पर चलने लगते हैं तो उनके मोबाइल में सेव कॉन्टेक्ट को भी कोडवर्ड में बदलवा दिया जाता है. जैसे कानपुर के आदित्य गुप्ता के मोबाइल में उसके कांटेक्ट नंबर नाम के बजाय नंबर से सेव करवाए गए थे.
फंडिंग के लिए 'रहमत' शब्द का इस्तेमाल
छानबीन के दौरान यूपी एटीएस को विदेश से हो रही फंडिंग के लिए रहमत शब्द के इस्तेमाल का भी पता चला. धर्मांतरण के बाद मिलने वाले पैसे का जिक्र हो या फिर विदेश से इस्लामिक दावा सेंटर या फातिमा फाउंडेशन को मिलने वाली विदेशी फंडिंग उसके लिए रहमत शब्द का इस्तेमाल किया जाता था. यूपी एटीएस चीफ प्रशांत कुमार के मुताबिक इस्लामिक दवा सेंटर के खाते में 1 करोड़, 82 लाख, 83 हजार, 910 रुपये जमा हुए. जिसमें रियाद, अबू धाबी और कतर से 50 लाख रुपये जमा हुए थे.
क्या है कौम का कलंक?
यूपी एटीएस को अब तक की पूछताछ में एक शब्द का इस्तेमाल सबसे ज्यादा खटक रहा है. वह है कौम का कलंक. बातचीत के दौरान इस शब्द का इस्तेमाल किसके लिए किया गया है, यह अभी साफ नहीं हो सका है. यूपी एटीएस ने जिन 3 लोगों को सोमवार को गिरफ्तार किया है. उनमें से इंटरप्रेटर इरफान ख्वाजा और अब्दुल मन्नान को रिमांड पर लेकर इस कोड वर्ड को समझने की कोशिश की जाएगी. यूपी एटीएस के लिए जांच और पूछताछ में सामने आए इन शब्दों का पूरा कनेक्शन खंगालना अभी बाकी है. कोडवर्ड में हो रही इस बातचीत का पूरा सच सामने लाना जांच का हिस्सा है.