फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले 3 शातिर अभियुक्तों को गाजियाबाद साइबर सेल (Ghaziabad Cyber Cell) ने गिरफ्तार किया है. पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह फर्जी आधार कार्ड से बैंक खाते, सिम, GST नंबर लेकर फर्जी कंपनी बनाकर विदेशी नाइजीरियन लोगों के साथ साइबर ठगी करते थे. इनका एक मास्टरमाइंड साथी फरार है. पुलिस ने फर्जी दस्तावेज के साथ लैपटॉप भी बरामद किया है.
इंदिरापुरम के CO अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि यह गैंग दवाइयों को बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की सप्लाई सस्ते में देने के नाम पर ठगी करता था. पहले यह केमिकल से जुड़े सप्लायर और व्यापारियों को विदेशी नंबर से फोन करते थे. उसके बाद केमिकल की उपलब्धता और सस्ते दामों पर सप्लाई का झांसा दिया करते थे.
यह आरोपी केमिकल का सैंपल भी भेजते थे. इसके बाद व्यापारियों को झांसे में लेकर एडवांस के नाम पर रकम खातों में जमा करवाते थे. हालांकि ये बैंक खाते फर्जी कागजातों के जरिए खुलवाए जाते थे. पुलिस ने गैंग द्वारा फर्जी दस्तावेजों से खुलवाए गए 11 बैंक खातों से लगभग 4 करोड़ रुपए की धनराशि के ट्रांजेक्शन होने की जानकारी मिली है.
बैंक खातों में मिले 9 लाख रुपये, पुलिस ने किए फ्रीज
इन बैंक खातों में लगभग 9 लाख रुपए जमा हैं. इस धनराशि को पुलिस ने फ्रीज कर दिया है. इस मामले में तीन शातिर रूपचंद, नवीन कुमार, सुरेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया है. सुरेंद्र ने अपने कई फर्जी बैंक अकाउंट खुलवाए हुए थे. उसने रूपचंद और नवीन से पहले दो फर्जी आधार कार्ड बनवाए थे. उन फर्जी आधार कार्ड की मदद से उसने मोबाइल सिम निकलवाए और कई बैंक अकाउंट खुलवा लिए. पुलिस का कहना है कि इस पूरे गैंग में शामिल और लोगों की तलाश की जा रही है. जल्द ही और लोगों की गिरफ्तारी की जाएगी.