उत्तर प्रदेश के चर्चित एलएमजी प्रकरण पर पूर्व डीजीपी बृजलाल ने पूरी कहानी आजतक को बताई. दरअसल, मुख्तार अंसारी उस दौर में कृष्णानंद राय को मारना चाहता था. मगर उसके सामने परेशानी ये थी कि कृष्णानंद राय की गाड़ी बुलेट प्रूफ थी. जिसे भेदने के लिए सिर्फ एलएमजी (LMG) ही सक्षम हथियार था. यही वजह थी कि मुख्तार एलएमजी (लाइट मशीन गन) खरीदना चाहता था.
एलएमजी प्रकरण और शैलेंद्र सिंह के बारे में पूर्व डीजीपी बृजलाल ने पूरी कहानी बयां की. उन्होंने बताया कि साल 2004 में वे डीजीपी मुख्यालय में आईजी लॉ एंड आर्डर के पद पर तैनात थे. उसी साल 25 और 26 जनवरी की रात शैलेंद्र सिंह ने मुन्नर और बाबूलाल यादव को गिरफ्तार किया था.
मगर इसके बाद डीजीपी मुख्यालय में तैनात एडीजी रैंक के एक अधिकारी ने शैलेंद्र सिंह को इतना प्रताड़ित किया कि 11 फरवरी 2004 को शैलेंद्र सिंह ने इस्तीफा दे दिया. सरकार ने इस्तीफा नामंजूर किया तो 20 फरवरी 2004 को दोबारा इस्तीफा भेजा गया और 10 मार्च 2004 को शैलेंद्र सिंह का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया.
इस्तीफे के बाद जून के महीने में शैलेंद्र सिंह छात्रों की समस्याओं को लेकर डीएम से मिलने गए. डीएम उन लोगों से बिना मिले चले गए तो शैलेंद्र सिंह छात्रों के साथ धरने पर बैठ गए. इस मामले को लेकर शैलेंद्र सिंह के खिलाफ तमाम गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज करवाई गई. उस वक्त शैलेंद्र सिंह पर गैंगस्टर तक लगाने की कोशिश की गई थी.
पूर्व डीजीपी बृजलाल के मुताबिक शैलेंद्र सिंह ने मुख्तार अंसारी पर पोटा लगाने के संबंध में अनुमति मांगी थी. उसकी फाइल सीएम ऑफिस पहुंची तो सीएम ने मुन्नर यादव और बाबूलाल पर तो अभियोजन की स्वीकृति दी. लेकिन मुख्तार अंसारी पर अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिली. ऐसे में सिर्फ आर्म्स एक्ट का मुकदमा बचा तो मुख्तार ने कहना शुरू कर दिया कि वह एलएमजी पकड़वाने के लिए बात कर रहा था.
बृजलाल ने खुलासा करते हुए कहा कि गाजीपुर जेल की बैरक नंबर 10 को मुख्तार अंसारी ने घर बना लिया था. वहां मछली पालन होता था. डीएम साहब बैडमिंटन खेलने जाते थे. लेकिन कृष्णानंद राय की हत्या से ठीक एक महीने पहले एक साजिश के तहत मुख्तार ने अपना ट्रांसफर फतेहगढ़ जेल में करा लिया था.
वो बताते हैं कि कृष्णानंद राय की हत्या से पहले मुख्तार अंसारी के घर पर तमाम अपराधी इकट्ठा थे. इसकी जानकारी थानेदार से लेकर जिले के एसपी और बड़े अधिकारियों तक थी. लेकिन किसी ने छापा मारने की हिम्मत नहीं की. मुख्तार अंसारी ने बाहुबल के दम पर गवाहों को तोड़ा और बरी हो गया.