Baba Tarsem Singh Murder Case: उत्तराखंड पुलिस को उधमसिंह नगर के नानकमत्ता गुरुद्वारे के डेरा कारसेवा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह की हत्या के मामले में बड़ी कामयाबी मिली है. पुलिस ने इस हत्याकांड के एक आरोपी को एनकाउंटर में मारा गिराया है. ये एनकाउंटर देर रात उत्तराखंड एसटीएफ और हरिद्वार पुलिस ने संयुक्त रूप से चला. जिसमें एक बदमाश मारा गया. जबकि, दूसरा आरोपी वहां से भागने में कामयाब हो गया. अब पुलिस उसे तलाश कर रही है.
भगवानपुर में हुआ एनकाउंटर
तरसेम सिंह पंजाब और तराई में सिखों के सिरमौर माने जाते थे. उनकी हत्या की जिम्मेदारी तरन तारन के गांव मियाविंड के रहने वाले सरबजीत सिंह ने ली थी. रिपोर्ट के मुताबिक, तरसेम सिंह की गोली मारकर हत्या करने वाले अमरजीत सिंह को उत्तराखंड एसटीएफ और हरिद्वार पुलिस ने भगवानपुर एरिया में एनकाउंटर में मार गिराया. अमरजीत सिंह का दूसरा साथी फरार है, जिसकी तलाश में एसटीएफ और पुलिस जुटी हुई है.
पुलिस की गोली से मारा गया अमरजीत
हरिद्वार के एसएसपी परमिंदर डोभाल के मुताबिक, एसटीएफ-पुलिस और शार्पशूटर अमरजीत सिंह उर्फ बिट्टू के बीच हरिद्वार के भगवानपुर में मुठभेड़ हो गई. जिसमें मुख्य आरोपी अमरजीत पुलिस की गोली से मारा गया. शातिर अपराधी अमरजीत के खिलाफ 16 से ज्यादा मामले दर्ज थे. उत्तराखंड के डीजीपी अभिनव कुमार ने बताया कि बाबा तरसेम सिंह की हत्या के बाद राज्य की पुलिस और एसटीएफ लगातार दोनों आरोपियों की तलाश कर रहे थे. उन्होंने ये भी कहा कि उत्तराखंड में ऐसे जघन्य अपराध करने वालों से पुलिस सख्ती से निपटेगी.
बाबा की हत्या से दहल गया था पूरा इलाका
चलिए अब आपको बाबा तरसेम सिंह हत्याकांड की इस पूरी वारदात को तफ्सील से बताते हैं. दरअसल, ये संगीन वारदात पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. हालांकि पुलिस हमलावरों की पहचान किेए जाने का दावा पहले से ही कर रही थी. अब जाकर एक आरोपी को पुलिस ने ढेर कर दिया है. लेकिन इस हत्याकांड के बाद से ही लोगों में गुस्सा है. क्योंकि दिन दहाड़े जिस तरह से बेखौफ हमलावरों ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया था, वो बेहद हैरान करने वाला था. और इस वारदात की वजह से राज्य की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे थे. आइए जान लेते हैं इस हाई प्रोफाइल मर्डर की पूरी कहानी.
28 मार्च 2024, डेरा कारसेवा गुरुद्वारा नानकमत्ता, उधमसिंह नगर
सुबह के 6 बजकर 15 मिनट का वक्त था. रोज़ाना की तरह डेरा कारसेवा के प्रमुख बाबा तरसेम सिंह अपने डेरे में एक कुर्सी पर बैठे आराम कर रहे थे. डेरे में दिन की शुरुआत हो रही थी. तभी दो लोग एक बाइक पर डेरे के अंदर आते हुए दिखाई देते हैं. आस-पास काम कर रहे लोगों की निगाह इन बाइक सवार पर पड़ती है, लेकिन किसी को भी अनहोनी का शक नहीं होता. मगर अगले ही पल जो कुछ होता है, उसे देख कर लोग दहल जाते हैं.
बाबा तरसेम सिंह को करीब से मारी गई गोली
बाइकर सीधे बाबा तरसेम सिंह के करीब पहुंचते हैं और बाइक के पीछे बैठा शख्स बिल्कुल करीब से एक लंबी सी गन से बाबा तरसेम सिंह को गोली मार देता है. ये सबकुछ इतनी जल्दी होता है कि तरसेम सिंह को संभलने का मौका ही नहीं मिलता. हालांकि गोली लगने के बाद वो अपनी कुर्सी से खड़े हो जाते हैं. शायद आगे होने वाले हमले से बचने की कोशिश में. लेकिन तब तक बाइक वाले बदमाश बाइक घुमा कर फिर से उनके सामने आ जाते हैं और इससे पहले कि बाबा तरसेम सिंह अपना बचाव कर पाते, उन्हें नजदीक से एक और गोली मार देते हैं.
3 सेकंड, 2 गोलियां और खेल खत्म
एक के बाद एक दो गोली लगते ही बाबा जमीन पर गिर जाते हैं. और आस-पास मौजूद लोग चीखते-चिल्लाते हुए मदद के लिए बाबा की तरफ दौड़ पड़ते हैं. इसी अफरातफरी के बीच बाइक पर आए शूटर मौका-ए-वारदात से बड़े आराम से फरार हो जाते हैं. इस हमले में बमुश्किल सिर्फ 3 सेकंड का वक़्त लगता है. जी हां, 3 सेकंड. लेकिन यही तीन सेकंड बाबा तरसेम सिंह की जिंदगी पर भारी पड़ते हैं.
सिख समाज का बड़ा चेहरा थे बाबा तरसेम सिंह
उन्हें आनन-फानन में उठा कर डेरे के सेवादार खटीमा अस्पताल लेकर पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल लाए जाने की तक उनकी जान जा चुकी होती है. डॉक्टर बाबा तरसेम सिंह को मुर्दा करार देते हैं. पंजाब, उत्तराखंड और खास कर तराई के इलाके में बाबा तरसेम सिंह सिखी के एक बड़े चेहरे थे. उन्हें सिख समाज के लोग ना सिर्फ काफी सम्मान देते थे, बल्कि इन इलाकों में उनके चाहने वालों की भी अच्छी-खासी तादाद है. ऐसे में जब से लोगों को डेरा कारसेवा के प्रमुख बाबा तरसेम सिंह की मौत की खबर मिलती है, डेरे से लेकर अस्पताल तक में लोगों की भारी भीड़ इकट्ठी हो जाती है और लोग गुस्से से उबलने लगते हैं.
पहचान में आए कातिल
खबर मिलते ही उधम सिंह नगर की पुलिस पूरे लवाज़मे के साथ मौका-ए-वारदात पर पहुंच चुकी थी. जांच के लिए आनन-फानन में फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को भी मौके पर बुला लिया गया और पुलिस ने पूरे सीन ऑफ क्राइम को सेनिटाइज कर अपनी तफ्तीश शुरू कर दी. और इसी तफ्तीश के दौरान पुलिस को डेरे में लगे अलग-अलग सीसीटीवी कैमरों से क़ातिलों की अलग-अलग तस्वीरें और वीडियोज़ हाथ लगे. ये सारी की सारी तस्वीरें और वीडियोज़ बिल्कुल साफ थे और कातिलों का चेहरा आसानी से पहचाना जा सकता था.
सिख ही लग रहे थे हमलावर
सीसीटीवी में कैद तस्वीरों से साफ था कि दोनों ही हमलावरों ने अपने सिर पर परना यानी छोटी पगड़ी बांध रखी थी. यानी फौरी तौर पर दोनों सिख लग रहे हैं. इसी सीसीटीवी फुटेज से साफ हुआ कि दोनों ने बाइक के पीछे एक नीले रंग की बैग भी बांध रखी थी और उन्होंने जिस तरह से इस वारदात को अंजाम दिया, उसे देख कर साफ था कि उन्हें बाबा तरसेम सिंह की रुटीन का पता था. और शायद पहले ही इस बात का अहसास था कि सुबह के वक़्त बाबा तरसेम सिंह डेरे में उसी जगह पर अक्सर बैठ कर सुस्ताते हैं.
धर्मप्रेमी इंसान की किसी से क्या दुश्मनी?
फिलहाल इसी सीसीटीवी फुटेज और मौका-ए-वारदात से मिले गोलियों के खोल और दूसरे सुराग़ों की मदद से पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी है और क़ातिलों की धर-पकड़ के लिए कई टीमें बनाई गई हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक कार सेवक और धर्मप्रेमी इंसान की ऐसी किसी से क्या दुश्मनी थी कि यूं घात कर सुबह-सुबह उनकी हत्या कर कर दी गई और वो भी बिल्कुल बेखौफ तरीके से?
हरबंस सिंह चुघ पर बाबा ने लगाए थे कई इल्ज़ाम
बाबा तरसेम सिंह की एक फेसबुक पोस्ट भी चर्चाओं में है. जो उन्होंने 16 फरवरी को अपनी वॉल पर अपलोड किया था. इस पोस्ट में बाबा तरसेम सिंह ने गुरुद्वारा कमेटी नानकमत्ता साहिब के अध्यक्ष हरबंस सिंह चुघ पर कई इल्ज़ाम लगाए थे और अपनी जान माल को हरबंस सिंह चुघ से ही ख़तरा बताया था. लेकिन हरबंस सिंह चुघ को लेकर पुलिस की तफ्तीश कहां तक पहुंची, इससे पहले कि हम आपको वो बताएं, आइए पहले बाबा तरसेम सिंह के उस फेसबुक पोस्ट के कुछ खास हिस्सों को पढ़ लेते हैं, जो उन्होंने हरबंस सिंह चुघ के खिलाफ लिखी थी.
चुघ के साथ चल रहा था पुराना विवाद
बाबा तरसेम सिंह के लिखे इसे पोस्ट से ये साफ है कि उनके और गुरुद्वारा नानकमत्ता कमेटी के अध्यक्ष के बीच पुराना विवाद चला आ रहा था और ये विवाद इतना बढ़ चुका था कि तरसेम सिंह को अपनी जान का खतरा तक महसूस होने लगा था. यही वजह है कि उन्होंने अपनी पोस्ट में ना सिर्फ हरबंस सिंह चुघ के साथ चल रहे विवाद का जिक्र किया था, बल्कि ये भी लिखा था कि अगर उनकी कार सेवा संस्था या फिर उन्हें कोई नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी हरबंस सिंह चुघ और उनके समर्थकों की ही होगी. बाबा तरसेम सिंह की मानें तो हरबंस सिंह चुघ अपनी कमियां छुपाने के लिए उन पर ज़मीन के कब्जे, कार सेवा संस्था पर अपना दबदबा कायम करने के झूठे इल्ज़ाम लगे थे, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था.
CCTV की मदद से कातिलों की पहचान
अब बात तफ्तीश की. तो पुलिस सूत्रों की मानें तो उन्होंने सीसीटीवी की मदद से ही कातिलों की पहचान पता कर ली है. और दोनों ही क़ातिलों का ताल्लुक पंजाब के तरनतारन से है. जानकारी के मुताबिक कातिलों ने इस वारदात को अंजाम देने से पहले डेरा कारसेवा नानकमत्ता साहिब की अच्छी तरह रेकी की थी. और इसी काम को अंजाम देने के लिए पिछले चार दिनों से गुरुद्वारा नानकमत्ता के करीब रुके हुए थे.
जल्द मामले का खुलासा करेगी पुलिस
जाहिर है ये पुलिस के लिए एक अहम लीड है. क्योंकि अब पुलिस आसानी से ये पता लगा सकती है कि ये लोग किसके इशारे पर यहां पहुंचे थे, किसने उन्हें गुरुद्वारे के नजदीक रुकवाने का इंतजाम किया, किसने उन्हें बाबा तरसेम सिंह के क़त्ल की सुपारी दी. वगैरह, यही वजह है कि पुलिस ने बेशक फिलहाल कातिलों का खुलासा ना किया हो, वो ये जरूर कह रही है कि वो जल्द ही इस मामले का खुलासा कर लेगी.
पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
अब पुलिस ने तरसेम सिंह मर्डर केस में 5 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. एफआईआर के मुताबिक दो हमलावरों ने बाबा तरसेम सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी. जो शख्स बाइक चला रहा था, वह पंजाब के मियांविंड गांव का रहने वाला सरबजीत सिंह था. जबकि दूसरा हमलवार अमरजीत सिंह उर्फ बिट्टा था. सभी चश्मदीदों ने उन्हें पहले भी देखा था.