टीम अन्ना के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि उन्हें आयकर विभाग से मिला नोटिस राजनीति के दबाव में आया है.
केजरीवाल को मिला आयकर विभाग का नोटिस
अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने सरकारी नौकरी के दौरान किसी भी तरह की सेवा शर्तों का उल्लंघन नहीं किया है. अपनी सेवा और इस्तीफे का पूरा जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आयकर विभाग ने नोटिस अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर दिया है.
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केजरीवाल ने कहा कि चूंकि उन्होंने जीपीएफ का पैसा अबतक सरकार से नहीं लिया है, इसलिए वे सरकार से यह रकम पाने के हकदार हैं.
गौरतलब है कि आयकर विभाग की नोटिस में कहा गया है कि केजरीवाल भारतीय राजस्व सेवा की नौकरी की दो साल की सैलरी का साढ़े तीन लाख रुपये और उसका ब्याज 4 लाख सोलह हजार रुपये लौटाएं. यही नहीं, केजरीवाल से 50 हजार रुपये का कंप्यूटर लोन, जो ब्याज के साथ एक लाख रुपये हो चुका है, लौटने को कहा गया है.
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आयकर विभाग का इल्जाम है कि भारतीय राजस्व सेवा में नौकरी के लिए जिस बांड पर दस्तखत किया था, उसका केजरीवाल ने उल्लंघन किया है. आयकर विभाग के मुताबिक स्टडी लीव के बाद केजरीवाल नौकरी पर लौटे ही नहीं.
उधर, आयकर विभाग को भेजे जवाब में केजरीवाल ने कहा है कि उन्होंने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया. उल्टे उन्होंने नोटिस की टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं. केजरीवाल ने कहा कि विभाग ने इस साल 5 अगस्त को अन्ना के अनशन से ठीक पहले नोटिस भेजा, जिससे उसकी मंशा जाहिर हो जाती हैं.
केजरीवाल का कहना है कि उन्होंने जिस बांड पर दस्तखत किया था, उसमें सिर्फ ये कहा गया था कि वो स्टडी लीव के दौरान नौकरी न तो छोड़ सकते हैं, न रिटाय़र हो सकते हैं. इस शर्त का उन्होंने पूरी तरह पालन किया.
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केजरीवाल के मुताबिक शर्तों के मुताबिक वो दंड के भागीदार तभी होते, जब वो स्टडी लीव खत्म होने के बाद ड्यूटी पर नहीं आते, या इस्तीफा दे देते, या सर्विस से रिटायर हो जाते या ड्यूटी पर लौटने के बाद तीन साल की अवधि में अपना कोर्स पूरा करने में नाकाम रहते.
केजरीवाल का कहना है कि उन्होंने 1 नवंबर 2000 से 31 अक्टूबर 2002 तक की छुट्टी ली थी. एक नवंबर 2002 को उन्होंने नौकरी ज्वाइन कर ली. एक अक्टूबर 2005 को उन्होंने तीन साल पूरे कर लिए. फरवरी 2006 में उन्होंने इस्तीफा दिया. ऐसे में किसी शर्तों के उल्लंघन का सवाल नहीं उठता.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार सिविल सोसायटी को परेशान करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार को जनलोकपाल बिल से लड़ना है, तो वह लड़े, पर इस तरह के हथकंडे न अपनाए.