दिल्ली का रहने वाला एक 21 साल का युवक अपने घर से नैनीताल जाने की बात कहकर निकलता है. ठीक एक दिन बाद ओडिशा के अंगुल में रहस्यमयी परिस्थितियों में रेलवे ट्रैक पर उसका शव मिलता है. शुरुआती जांच में सामने आया कि मृतक घरवालों से झूठ बोलकर अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए ओडिशा गया था.
प्रेम-प्रसंग या फिर रंजिश में उलझी मौत की गुत्थी पुलिस के लिए पहेली बनी हुई है. दरअसल 21 साल का आईटीआई स्टूडेंट पुष्कर अग्रवाल दिल्ली के कल्याणपुरी इलाके में रहता था. पुष्कर के घर के पास ही सुनीता (बदला हुआ नाम) का परिवार रहता है. पुष्कर सुनीता को बड़ी बहन मानता था. घर आने-जाने के दौरान पुष्कर की मुलाकात सुनीता की छोटी बहन गीता (बदला हुआ नाम) से हुई.
गीता ओडिशा के अंगुल में रहकर पढ़ाई कर रही है. दोनों व्हाट्सएप, फेसबुक के जरिए नजदीक आए और देखते ही देखते दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई . गीता से मिलने के लिए पुष्कर अपने परिजनों को कई बार झूठ बोलकर माता वैष्णो देवी के दर्शन के बहाने ओडिशा जाकर उससे मिलता रहता था. बीती 6 जनवरी को भी पुष्कर परिजनों से नैनीताल जाने की बात कहकर घर से निकला था.
'अब मैं कभी वापस नहीं आ पाऊंगा'
पुष्कर एक बार फिर गीता से मिलने ओडिशा निकल गया था. वहां दोनों की मुलाकात भी हुई, मगर 7 जनवरी को एक फोन ने पुष्कर के परिजनों को हिलाकर रख दिया. यह फोन पुष्कर का ही था, उसने परिजनों को फोन कर कहा, 'अब मैं कभी वापस नहीं आ पाऊंगा, मुझे माफ कर देना.' इतना कहने के बाद उसने फोन काट दिया. पुष्कर के परिजनों ने फौरन पुलिस को इसकी सूचना दी.
रेलवे ट्रैक पर मिली पुष्कर की लाश
8 जनवरी को पुष्कर के परिजनों को उसकी लाश ओडिशा के अंगुल में रेलवे ट्रैक से बरामद होने की खबर मिलती है. सुनीता ने इस बारे में जब गीता से बात की तो सभी को दोनों के बीच प्रेम-प्रसंग का पता चला. फिलहाल पुलिस कई सवालों के जवाब तलाशने में जुटी है. आखिर पुष्कर के साथ ओडिशा में क्या हुआ. क्या पुष्कर ने खुदकुशी की है या फिर उसका कत्ल किया गया है.
13 जनवरी को था पुष्कर का जन्मदिन
पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है. फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है. वहीं पुलिस की एक टीम गीता से पूछताछ करने के लिए भी ओडिशा रवाना होने वाली है. गौरतलब है कि पुष्कर का 13 जनवरी को जन्मदिन था और घर से जाने से पहले वह अपनी मां से बोलकर गया था कि उसके लौटने के बाद इस बार उसका जन्मदिन धूमधाम से मनाएंगे लेकिन होनी को तो कुछ और ही मंजूर था. जिस दिन पुष्कर का जन्मदिन था, उसी दिन उसका श्राद्ध किया गया.