दिल्ली से सटे गाजियाबाद में एक बार फिर खुला नाला एक 15 साल के लड़के की मौत की वजह बन गया. यह लड़का दसवीं कक्षा का छात्र था. गाजियाबाद के थाना विजय नगर इलाके की सर्वोदय नगर कॉलोनी में शनिवार को अचानक उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल हो गया, जब दोपहर बाद अचानक ही आई तेज बारिश के बाद नाले ओवरफ्लो हो गए सड़क भी बारिश के पानी से लबालब हो गई.
इसी दौरान एक दसवीं कक्षा का पढ़ने वाला छात्र नाले में समा गया. हालांकि मौके पर खड़े लोगों ने छात्र को बचाने का भरसक प्रयास किया. लेकिन तेज बहाव के कारण किशोर नाली में बह गया. आनन-फानन में इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई. सूचना के आधार पर स्थानीय पुलिस और आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे. साथ ही दमकल विभाग की टीम और एनडीआरएफ की टीम को मौके पर बुलाया गया. करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद किशोर को नाले से बाहर निकाला गया और तत्काल प्रभाव से उसे अस्पताल पहुंचाया गया. लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
बहरहाल गाजियाबाद में खुले नाले लगातार मौत के नाले साबित हो रहे हैं. विजयनगर थाना क्षेत्र शिवपुरी इलाके में रहने वाले शख्स अशोक के दीपांशु और शुभम नाम के दो बेटे थाना विजय नगर इलाके की सर्वोदय नगर कॉलोनी स्थित सैंट टैरेसा स्कूल में कक्षा 10 में पढ़ते थे. दोनों ही अपनी-अपनी साइकिल से स्कूल जाते थे. बारिश के तुरंत बाद ही स्कूल की छुट्टी हुई तो शुभम अपनी साइकिल से अपने भाई दीपांशु से कुछ देर पहले ही निकल गया. वह घर पहुंच गया लेकिन दीपांशु नहीं.
दोपहर बाद अचानक ही तेज बारिश हुई, जिसके कारण सभी बरसाती नाले भर गए और सड़क पर भी पानी लबालब हो गया. चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था. इसी दौरान 15 साल का दीपांशु अपनी साइकिल से घर जा रहा था लेकिन साइकिल नाले की तरफ चली गई और वह तेज पानी में बह गया. इस दौरान पास में खड़ी एक लड़की ने उसे गिरते हुए देखा तो शोर मचाया. आसपास के लोग मौके पर इकट्ठा हुए. हालांकि उसे बचाने का प्रयास किया गया लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि वह दीपांशु बह गया. हालांकि कुछ दूरी पर ही उसकी साइकिल मिल गई.
आनन- फानन में इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई. सूचना के आधार पर मौके पर पुलिस पहुंच गई और स्थानीय लोगों की मदद से दीपांशु को खोजना शुरू किया गया. लेकिन किसी तरह की कामयाबी न मिलने के बाद दमकल विभाग की टीम और एनडीआरएफ की टीम को मौके पर बुलाया गया. 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दीपांशु करीब 400 मीटर की दूरी पर नाले के अंदर कूड़े में अटका हुआ मिला, जिसे आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया. लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
जैसे ही दीपांशु के परिजनों ने यह खबर सुनी तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. उधर इलाके के लोगों में भी नगर निगम के खिलाफ बेहद गुस्सा है. उन्होंने जमकर नगर निगम को कोसा, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने किसी तरह लोगों को उस वक्त शांत किया. लोगों का आरोप है कि इस इलाके में तमाम नाले खुले पड़े हैं, जो हमेशा लोगों की मौत को दावत देते रहते हैं. लोगों का कहना है कि इस बारे में कई बार नगर निगम के अधिकारियों को भी अवगत कराया जा चुका है. उसके बावजूद भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया. इसके कारण दीपांशु काल के गाल में समा गया.
खुले नाले लगातार मासूमों की जान ले रहे हैं. दीपांशु की मौत खुले नाले की वजह से हुई जिसकी वजह से घटना की साफ जिम्मेदारी गाजियाबाद नगर निगम और गाजियाबाद प्रशासन की है. हालांकि प्रशासन के अधिकारी आज ही सफाई के लिए नाले को खोले जाने की बात कह जिम्मेदारी से बचते नजर आए.
लेकिन सवाल वही है कि अगर नाले को सफाई की वजह से खोला गया था और बारिश की वजह से काम रोक दिया गया तो नाले को दुबारा ढका क्यों नहीं गया. साथ ही ऐसी कोई वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई कि कोई हादसा यहां न हो. हालांकि पूरे मामले में हादसे की जांच की बात नगर निगम और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी कह रहे हैं. वहीं अपने मासूम बच्चे की बॉडी देख बच्चे का परिवार बेहाल हो गया. बच्चे के पिता मासूम की बॉडी से लिपट बिलख पड़े.