छत्तीसगढ़ स्थित फोरेंसिक लेबौरेट्री में अब डीएनए टेस्ट भी किए जाएंगे. रायपुर में जब डीएनए टेस्ट की पहली रिपोर्ट आई तो पुलिस, फरियादी और वकीलों के चेहरे खुशी से खिल उठे. अभी तक छत्तीसगढ़ पुलिस को डीएनए टेस्ट के लिए दूसरे राज्यों की लैब्स पर निर्भर रहना पड़ता था.
राज्य की पहली डीएनए टेस्ट रिपोर्ट बिलासपुर जिले के नाम रही. यह डीएनए टेस्ट बलात्कार के एक मामले में आरोपी को बच्चे का पिता साबित करने के लिए किया गया था. बिलासपुर पुलिस ने आरोपी का डीएनए सैंपल रायपुर स्थित फोरेंसिक लेबौरेट्री को भेजा था.
बता दें कि बिलासपुर के मोपका गांव में आरोपी शांतिलाल ने 5 साल पहले शादी का झांसा देकर अपने ही गांव की एक किशोरी से बलात्कार किया था. इसके बाद पीड़ित लड़की गर्भवती हो गई थी और उसने एक बेटे को जन्म दिया था.
आरोपी शांतिलाल ने पीड़िता और उसके बेटे को अपनाने से इंकार कर दिया था. पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ पुलिस में शिकायत की थी. जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को बच्चे का पिता साबित करने के लिए पीड़िता, उसके बच्चे और आरोपी के खून का सैंपल डीएनए टेस्ट के लिए रायपुर स्थित फोरेंसिक लैब भेजा था.
डीएनए रिपोर्ट आने के बाद अब पीड़िता को न्याय दिलाने की पुलिस की उम्मीद काफी बढ़ गई है. गौरतलब है कि इससे पहले राज्य पुलिस को डीएनए टेस्ट के लिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद और सागर स्थित फोरेंसिक लैब्स की मदद लेनी पड़ती थी.
जिसकी वजह से दूसरे राज्यों पर निर्भर होने के साथ ही अदालत में लंबित मामलों की सुनवाई में भी काफी समय लग जाता था और पीड़ितों को न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था. मगर अब छत्तीसगढ़ की जनता और राज्य पुलिस को डीएनए टेस्ट के लिए कहीं और नहीं भटकना पड़ेगा.