नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार साल 2015 में धारा 377 के तहत दर्ज कुल मामलों में 60 फीसदी पीड़ित बच्चे थे. साल 2015 में पूरे देश में कुल 1347 केस दर्ज किए गए, जिनमें 814 मामलों में पीड़ित बच्चे थे. इसी साल में पॉस्को कानून की धारा 4 और 6 के तहत कुल 8800 केस दर्ज किए गए हैं.
धारा 377 के तहत दर्ज केस
क्या है पॉस्को कानून
बच्चों के साथ आए दिन यौन अपराधों की ख़बरें समाज को शर्मसार करती नजर आती हैं. इस तरह के मामलों की बढ़ती संख्या देखकर सरकार ने वर्ष 2012 में एक विशेष कानून बनाया था. जो बच्चों को छेड़खानी, बलात्कार और कुकर्म जैसे मामलों से सुरक्षा प्रदान करता है. उस कानून का नाम पास्को एक्ट है.
क्या है धारा 377
धारा 377 अप्राकृतिक यौन संबंध को गैरकानूनी ठहराता है. 1862 में यह कानून लागू हुआ था. इसके तहत स्त्री या पुरुष के साथ अप्राकृतिक यौन संबध बनाने पर 10 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है. यही नहीं किसी जानवर के साथ यौन संबंध बनाने पर उम्र कैद या 10 साल की सजा व जुर्माने का भी इसमें प्रावधान है.