
फरवरी साल 2020 में नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में हुए दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 3 दिन पहले चार्जशीट दाखिल की. इस चार्जशीट में स्पेशल सेल ने पहली बार एनिमेशन के जरिए दंगों की साजिश को बेनकाब करने का दावा किया. ये एनिमेशन चार्जशीट का हिस्सा है. आइए जानते हैं क्या कुछ खास है इस एनिमेशन में.
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने जो एनिमेशन बनाया है उसके मुताबिक, दंगा एक बड़ी सुनियोजित साजिश थी. स्पेशल सेल ने 15 लोगों को UAPA में गिरफ्तार किया है, जो साजिश में शामिल थे.
बता दें कि इस एनिमेशन को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कोर्ट को 25 फरवरी को दिखाया था. इसमें पुलिस ने बताया कि कैसे नार्थ ईस्ट दिल्ली के चांद बाग इलाके में दंगाइयों ने कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाईं. कैसे दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या की गई.
कैसे तत्कालीन DCP शाहदरा अमित शर्मा पर जानलेवा हमला किया गया. कैसे मौका-ए-वारदात पर लगे दर्जनों सीसीटीवी कैमरों को जान बूझकर साजिश के तहत दंगों से पहले तोड़ा गया. ताकि सीसीटीवी कैमरा में कुछ भी रिकॉर्ड न हो और सबूत दिल्ली पुलिस को न मिल सके. अब कोर्ट इस चार्जशीट पर संज्ञान लेगी. चार्जशीट फोरेंसिक सबूतों और टेक्निकल सबूतों के आधार पर तैयार की गई है. एनिमेशन में स्पेशल सेल ने बताया है कि चांद बाग इलाके में कहां-कहां सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे.
हिंसा वाली जगहों के सीसीटीवी खराब कर दिए गए, तोड़ दिए या फिर सीसीटीवी कैमरों को दूसरी तरफ मोड़ दिया गया. जिससे कुछ कैमरे में कैद न हो. चांद बाग में दंगे से करीब 20 मिनट पहले सब साजिश के तहत किया गया. इसी दंगे में हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या हुई. डीसीपी अमित शर्मा बुरी तरह जख्मी हुए. कई पुलिसकर्मियों को चोट लगी.
जांच में पुलिस को कामयाबी घटना स्थल के आसपास लगे या कुछ दूरी पर लगे FRS सिस्टम कैमरे यानी चेहरा पहचाने वाले कैमरे की मदद से मिली. मोबाइल फोन लोकेशन के आधार पर भी दंगाइयों को पकड़ा गया. स्पेशल सेल के मुताबिक दंगा अचानक नहीं हुआ था, बल्कि पूरी साजिश के तहत अंजाम दिया गया.
दंगाइयों के पास हथियार थे, ये भी एनिमेशन दिखाया गया. पुलिस ने यह भी दावा किया की एक वर्ग विशेष के लोग पहले से प्लानिंग कर दूसरे वर्ग विशेष के लोगो के इलाके में बढ़ रहे थे. जहां-जहां सीसीटीवी खराब थे वहां जमकर आगजनी हुई, जान माल का नुकसान हुआ. घटना स्थल के पास करीब 30 से ज्यादा सीसीटीवी खराब मिले, जो कि सामान्य नहीं था. यही नहीं दर्जनों कैमरों पर दंगाइयों ने कपड़ा रख दिया, ताकि दंगे के सबूत मिटाए जा सके.
दंगों की शुरुआत 13 दिसंबर 2020 को जामिया और न्यू फ्रेंड्स कालोनी में हिंसा और आगजनी से हुई थी. इसके बाद 20 दिसंबर को सीलमपुर में हिंसा हुई. उसके बाद DPSG नाम का व्हाट्स एप ग्रुप बना और साथ मे JCC जामिया कोर्डिनेशन कमेटी नाम का एक ऑर्गनाइजेशन बना.
11 फरवरी 2020 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आने की घोषणा हुई. 14-15 और 16 फरवरी 2020 को सभी प्रोटेस्ट साइट पर साजिश के तहत महिला एकता यात्रा प्रोग्राम हुआ.
16-17 फरवरी को 2 बजे चांद बाग प्रोटेस्ट साइट पर एक सीक्रेट मीटिंग हुई जिसमें नार्थ ईस्ट प्रोटेस्ट साइट के सभी लीडर शामिल हुए. 22 फरवरी को जफराबाद मेट्रो साइट पर साजिश के तहत चक्का जाम किया गया. 22 फरवरी को सभी की एक मीटिंग हुई.
23 फरवरी को दिन में चक्का जाम और हिंसा के लिए चांद बाग समेत सभी प्रोटेस्ट साइट पर भीड़ जुटाई जाने लगी. 23 फरवरी को देर शाम सीक्रेट मीटिंग हुई, जिसमें सीसीटीवी कैमरे की दिशा कैसे बदलनी है या सीसीटीवी कैमरे डिस्कनेक्ट कैसे करना है इसपर बात हुई.
इसके बाद 24 फरवरी को दिल्ली पुलिस के जवानों पर प्रोटेस्टर ने हमला किया और फिर नार्थ ईस्ट दिल्ली के दंगे भड़क गए.