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भोपाल एनकाउंटर केसः सामने आई लापरवाही की 'लिस्ट'

भोपाल जेल ब्रेक और फिर 8 सिमी आतंकियों के एनकाउंटर के बाद हर रोज कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. 'आजतक' के हाथ जो दस्तावेज लगे हैं उनसे साफ पता चलता है कि जिन सिपाहियों को सेंट्रल जेल की सुरक्षा में तैनात किया गया था, वह सभी घटना वाले दिन आला अधिकारियों समेत मुख्यमंत्री की ड्यूटी में तैनात थे.

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सिपाहियों की तैनाती को लेकर बड़ा खुलासा
सिपाहियों की तैनाती को लेकर बड़ा खुलासा

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भोपाल जेल ब्रेक और फिर 8 सिमी आतंकियों के एनकाउंटर के बाद हर रोज कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. 'आजतक' के हाथ जो दस्तावेज लगे हैं उनसे साफ पता चलता है कि जिन सिपाहियों को सेंट्रल जेल की सुरक्षा में तैनात किया गया था, वह सभी घटना वाले दिन आला अधिकारियों समेत मुख्यमंत्री की ड्यूटी में तैनात थे.

भोपाल एनकाउंटर मामले में हर दिन चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं. एक ओर सिमी आतंकियों के जेल के ताले खोल कर 30 फिट ऊंची दीवार लांघते हुए भागने के ऊपर सवाल उठ रहे हैं, वहीं अब खुलासा हुआ है कि जेल की सुरक्षा में तैनात अधिकतर सिपाही घटना वाले दिन वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात थे.

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'आजतक' के पास मौजूद दस्तावेजों से साफ पता चलता है कि घटना के वक्त जेल सुरक्षा में तैनात किए गए 80 सिपाही वीवीआईपी ड्यूटी में कहां-कहां तैनात किए गए थे. दस्तावेजों के मुताबिक, सीएम हाउस और उप सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय में 1-1 जवान की ड्यूटी लगाई गई थी.

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प्रमुख सचिव के बंगले में जहां 10 सिपाहियों को तैनात किया गया था, वहीं राज्य के जेलमंत्री के बंगले में 4 सिपाही तैनात थे. दो उप जेल महानिरीक्षकों के बंगले और जेल मुख्यालय में 17-17 सिपाहियों को तैनात किया गया था. वहीं राज्य के दो पूर्व जेल मंत्रियों के बंगलों में भी सिपाहियों को तैनात किया गया था.

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जेल विभाग खुद इस बात को मानता है कि भोपाल सेंट्रल जेल में सुरक्षाकर्मियों के 250 पदों में से 50 पद खाली है. वहीं 70 जवान विभिन्न ट्रेनिंग में हैं. ऐसे में 80 जवानों को वीआर्ईपी ड्यूटी पर लगाना जेल की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़े करता है. दस्तावेजों से पता चलता है कि घटना के वक्त भोपाल सेंट्रल जेल में कैद लगभग 3 हजार कैदियों की सुरक्षा में महज 30 से 35 सिपाही ही तैनात थे.

गौरतलब है कि अक्टूबर माह में जेल प्रशासन ने डीजीपी समेत राज्य के अन्य आला अधिकारियों को सुरक्षा संबंधी चेतावनी देते हुए हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों की मांग की थी. जिसे राज्य सरकार और पुलिस महकमे के अधिकारियों ने दरकिनार कर दिया था. ऐसे में अब ये वीआईपी ड्यटी की लिस्ट शिवराज सरकार की जेल सुरक्षा को लेकर गंभीरता की पोल खोलती नजर आ रही है.

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