वैवाहिक सामारोह में मासूमों से कैश या गहनों के बैग चोरी करने की वारदात का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. साइबर सिटी के अलग-अलग इलाकों में ऐसे 10 से 12 साल के मासूम से दिखने वाले बच्चे पलक झपकते ही बड़ी चोरी को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं. ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाना पुलिस के साथ-साथ मैरिज लॉन वालों के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है.
दरअसल साइबर सिटी में बीते 21 जनवरी को थाना शहर और थाना सेक्टर 17-18 में ऐसे ही 2 मामले दर्ज किए गए. थाना शहर के अग्रवाल धर्मशाला में कुआं पूजन कार्यकम में मासूम से दिखने वाले बच्चे डेढ़ लाख के बैग पर और सेक्टर 17-18 थाना इलाके के ब्लेस मैरिज लॉन में 6 लाख के गहने और रुपयों से भरा बैग लेकर फरार हो गए. दोनों घटना सीसीटीवी में कैद हो गई जिसमें एक मामले में बच्चा गिरोह के साथी को परिजनों ने पकड़ पहले उसकी खूब धुनाई की. इसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया. बहरहाल पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज कब्जे में लेकर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है.
सीसीटीवी में कैद शादी समारोह में बेहद योजनाबद्ध तरीके से ये बच्चे ऐसे फंक्शन में शामिल होकर परिवार के साथ घुल मिल जाते हैं. कोई जब तक कुछ समझ या जान पाता है तब तक ये बेहद ट्रेंड बच्चे लाखों की चपत लगा कर मौके से फरार हो जाते हैं. 20 जनवरी की रात 9 बजे ब्लेस मैरिज लॉन में ऐसी ही घटना सामने आई जिसमें सबसे आगे की सीट के ठीक पीछे बच्चा बेहद इत्मीनान से मौके की तलाश में बैठा रहा. शक्लो सूरत से बेहद मासूम सा दिखने वाला यह बच्चा इतना शातिर निकला कि जैसे ही फोटोग्राफर परिजनों की फोटो क्लिक करता, वह बच्चा अपना मुंह चेयर की ओट में कर खुद की पहचान छुपाने की कोशिश करता. बाद में मौका मिलते ही सबके बीच से इसने रुपए और गहनों से भरे बैग को उठाया और फरार हो गया.
आपको बता दें कि साइबर सिटी में शायद ही कोई ऐसा मैरिज लॉन बचा हो जहां इन शातिर गिरोह के बच्चों ने किसी वारदात को अंजाम न दिया हो. ऐसे बच्चा गिरोह से जुड़े शातिर बदमाशों के हौसले कितने बुलंद हैं इसकी बानगी का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि बीते साल सिटी के नामी पांच सितारा होटल में करोड़ों की चोरी को अंजाम दे डाला और तमाम सुरक्षा इंतजामों के बावजूद पुलिस ऐसे गिरोह से जुड़े किसी शख्स की पहचान तक नहीं कर पाई. 20 तारीख को अग्रवाल धर्मशाला से गिरफ्तार इस गिरोह के लोगों से पूछताछ के बाद ही पुलिस मामले पर से पर्दा उठा पाएगी. फिलहाल जांच जारी है लेकिन चोरी की इन घटनाओं से साफ है कि अपराध की दुनिया में धकेले गए इन बच्चों का बचपन खत्म हो गया है और इन्हें चोरी के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.