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झारखंड: ग्रामीणों का आरोप- बच्चियों की तस्करी रोकी तो पुलिस ने थाने लाकर की पिटाई

पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अजय लिंडा ने बीते साल 12 अक्तूबर को बंदगांव प्रखंड में ग्रामीणों को संबोधित कर कहा था कि नाबालिग बच्चियों को मानव तस्करों से बचाएं. आज उसी बंदगांव प्रखंड में गैर कानूनी तरीके से नाबालिग बच्चियों को रात के अंधेरे में बाहर ले जाने से मानव तस्करों को रोकना, ग्रामीणों को महंगा पड़ गया. 

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पुलिस पर लगे गंभीर आरोप (सांकेतिक फोटो)
पुलिस पर लगे गंभीर आरोप (सांकेतिक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पुलिस पर मानव तस्करी को बढ़ावा देने के आरोप
  • ग्रामीणों ने रोकने की कोशिश की तो हुई पिटाई
  • एसपी ने पूरे मामले में जांच के दिए आदेश

नक्सल प्रभावित इलाकों में ऐसे ही पुलिस की छवि बेहद खराब है. काफी कोशिश और व्यवहार में बदलाव के बाद पुलिस इन इलाके में ग्रामीणों का थोड़ा विश्वास जीतने में सफल रही है. इस बीच चाईबासा की एक ऐसी खबर सामने आई है जिससे ग्रामीणों के मन को गहरी ठेस पहुंची है. जानकारी के मुताबिक, ग्रामीण बच्चियों की तस्करी को रोकने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बदले में पुलिस ने कई लोगों की ना केवल बेरहमी से पिटाई की बल्कि बच्चियों  को छोड़ने के एवज में उनसे पैसे भी मांगे. ग्रामीणों ने यह आरोप लगाए हैं. 

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पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अजय लिंडा ने बीते साल 12 अक्तूबर को बंदगांव प्रखंड में ग्रामीणों को संबोधित कर कहा था की नाबालिग बच्चियों को मानव तस्करों से बचाएं. आज उसी बंदगांव प्रखंड में गैर कानूनी तरीके से नाबालिग बच्चियों को रात के अंधेरे में बाहर ले जाने से मानव तस्करों को रोकना, ग्रामीणों को महंगा पड़ गया. 

आरोप है कि पुलिस, इनको थाना लाई और जमकर पिटाई की. जिससे इनके शरीर में दाग उभर आये हैं. यही नहीं पुलिस पर इन्हें छोड़ने के एवज में प्रत्येक ग्रामीण से दस-दस हजार रुपये मांगने के भी आरोप हैं.

घटना शनिवार रात की बताई जा रही है. जानकारी के अनुसार देर रात को बंदगांव प्रखंड के कराईकेला थाना क्षेत्र के लान्दुपदा गांव में ग्रामीणों ने पुडुचेरी की एक बस को मानव तस्करी के शक में रोका था. इस बस में बिना रजिस्ट्रेशन के नाबालिग बच्चियों को काम कराने के बहाने कोयम्बटूर ले जाया जा रहा था. 

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ग्रामीणों को जब इस बात की जानकारी मिली तो ग्रामीणों ने बस चालक को रोक कर पूछताछ की और उसके बाद कराईकेला थाना पुलिस को कॉल कर मौके पर बुलाया. पुलिस मौके पर पहुंची तो जरूर, लेकिन उलटे ग्रामीणों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया. पुलिस बस में बैठीं बच्चियों के अलावा ड्राइवर, खलासी सहित बस रोकने वाले आठ ग्रामीणों को थाना ले आई और रातभर उनकी जमकर पिटाई की. 

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उन्हें छोड़ने के एवज में दस-दस हजार रुपये भी मांगे गए. इसके बाद मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाई गई बच्चियों को वापस उनके घर भेज दिया गया. इधर ग्रामीणों की पिटाई का मामला चक्रधरपुर के पूर्व विधायक शशिभूषण सामड के पास गया. शशिभूषण सामड ने जिले के पुलिस कप्तान अजय लिंडा को कराईकेला पुलिस की कारस्तानी की जानकारी दी. इसके बाद एसपी के दबाव में कराईकेला पुलिस ने ग्रामीणों को छोड़ा. बताया गया कि एक ग्रामीण ने किसी तरह कहीं से जुगाड़ कर सात हजार रुपये भी पुलिस को दिए ताकि पुलिस उसे छोड़ दे.

शशिभूषण सामड ने कहा कि आए दिन क्षेत्र से नाबालिग बच्चियों को काम कराने के बहाने बिना रजिस्ट्रेशन के दूसरे राज्यों में ले जाया जा रहा है. लेकिन पुलिस इस मामले में सकारात्मक कार्रवाई नहीं कर रही है. उल्टे मानव तस्करी रोकने वाले ग्रामीणों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार कर रही है. बाहर की कंपनी से साठगांठ कर कुछ पुलिस कर्मी मानव तस्करी के कारोबार को संरक्षण देने का काम कर रही है. 

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पुलिस ग्रामीणों की पिटाई कर रही है और उनको छोड़ने के एवज में पैसा भी मांग रही है. पूर्व विधायक ने कराईकेला के आरोपी पुलिस कर्मियों को सस्पेंड करने की मांग की है. अन्यथा आन्दोलन करने की धमकी दी है. उन्होंने इस मामले को राजनीतिक रंग देते हुए कहा कि सीएम हेमंत सोरेन राज्य की जनता को रोजगार देने में विफल हुए हैं. यही वजह है कि पलायन जारी है और तस्कर सक्रिय हैं.

आदिवासी 'हो' समाज युवा महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ बबलू सुंडी ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि दोषी पुलिस कर्मियों पर प्रशासन जल्द कार्रवाई करें नहीं तो आंदोलन किया जाएगा.

इस पूरे मामले में कराईकेला थाना प्रभारी दीपक क्रियशन से बात कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई. लेकिन उन्होंने कैमरे के सामने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. उन्होंने बस इतना कहा कि उनके और उनके पुलिस बल के ऊपर लगाया गए आरोप निराधार हैं. जिन ग्रामीणों को पुलिस ने पकड़ा था, वे बस के ड्राइवर से लूटपाट कर रहे थे और बस में सवार बच्चियों से छेड़खानी कर रहे थे. 

इसलिए पुलिस ने उन्हें थाना लाकर पूछताछ की और फिर छोड़ दिया. इस पूरे मामले में जिला पुलिस अधीक्षक अजय लिंडा ने जांच बिठा दी है. चक्रधरपुर के एएसपी नाथू सिंह मीणा को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट जल्द दाखिल करने को कहा गया है. रिपोर्ट के आधार पर एसपी ने कार्रवाई करने की बात कही है.

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जय कुमार तांती की रिपोर्ट के साथ.

 

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