केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने रविवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के चाचा भास्कर रेड्डी को गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी सीएम जगनमोहन के चाचा वाई एस विवेकानंद रेड्डी की हत्या के मामले में हुई है. भास्कर रेड्डी की गिरफ्तारी के बाद कडप्पा के सांसद वाई एस अविनाश रेड्डी ने कहा कि वह अपने पिता (भास्कर रेड्डी) की बेगुनाही साबित करने के लिए किसी भी हद तक जाकर कानूनी लड़ाई लड़ेंगे.
2019 में हुई थी हत्या
भास्कर रेड्डी, जगनमोहन के पिता और आंध्र प्रदेश के दिवंगत मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी (YSR) के चचेरे भाई हैं. वाईएसआर के 68 वर्षीय छोटे भाई विवेकानंद की 2019 में हत्या कर दी गई थी. कई चोटों के साथ विवेकानंद रेड्डी का शव 15 मार्च, 2019 की सुबह कडप्पा जिले के पुलिवेंदुला में उनके आवास पर मिला था, जिस पर चाकुओं से हमले के कई घाव पाए गए थे.
योजनाबद्ध तरीके से हुई थी हत्या!
सीबीआई के लगाए गए आरोपों के मुताबिक, भास्कर और उनके बेटे अविनाश ने कडपा में अपने राजनीतिक प्रभुत्व की आशंका के चलते विवेकानंद की हत्या की साजिश रची. भले ही उन्होंने 2017 के एमएलसी चुनावों में विवेकानंद की हार सुनिश्चित की थी, लेकिन वे इस बात से चिंतित थे कि विवेकानंद ने इस क्षेत्र में अपनी राजनीतिक ताकत को मजबूत करना शुरू कर दिया था. एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कथित तौर पर विवेकानंद के लिए काम करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति की थी, जिसमें विवेकानंद के करीबी सहयोगी वाई गंगी रेड्डी, दस्तगीर और सुनील यादव शामिल थे. ये सभी लोग विवेकानंद के हर कदम की रिपोर्ट अविनाश को देते थे.
विवेकानंद की मौत के बाद, अविनाश उनके घर तब पहुंचे थे, जब घरेलू सहायिका ने उन्हें खून से लथपथ पाया और शोर मचाया. सीबीआई के अनुसार, अविनाश ने पुलिस को बताया कि विवेकानंद की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई थी, और उन्होंने मृतक की चोटों को छिपाने का प्रयास किया था.
इस मामले में अविनाश रेड्डी से सीबीआई तीन बार पूछताछ कर चुकी है और हर बार उन्होंने खुद को निर्दोष बताया. भास्कर इस मामले में गिरफ्तार होने वाले पांचवें शख्स हैं. अधिकारियों ने कहा कि उसे स्थानीय सीबीआई अदालत में पेश किया जाएगा. उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (साजिश), 302 (हत्या) और 201 (सबूतों से छेड़छाड़ और नष्ट करना) के तहत आरोप लगाए गए हैं.
कौन हैं मामले के आरोपी?
भास्कर और उनके बेटे तथा कडप्पा लोकसभा सीट से वाईएसआर कांग्रेस के सांसद बेटे अविनाश रेड्डी कथित तौर पर विवेकानंद के साथ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के मामले में आरोपी हैं. सीबीआई ने मामले में 250 लोगों को गवाह के तौर पर नामजद किया है और उनके बयान भी दस्तावेजों में संलग्न हैं. यहां बहुत सारे सबूत विवेकानंद के ड्राइवर आर दस्तगीर के हैं, जो सरकारी गवाह बन गए हैं और कडप्पा के प्रोद्दातुर में जूनियर सिविल जज के सामने धारा 164 के तहत इकबालिया बयान दर्ज करा चुके हैं.
कौन थे विवेकानंद रेड्डी?
विवेकानंद रेड्डी 1989 और 1994 में पुलिवेंदुला से दो बार विधायक चुने गए थे. इसके अलावा विवेकानंद दो बार कडप्पा से लोकसभा सांसद और 2004 में अविभाजित आंध्र प्रदेश के विधान परिषद सदस्य भी चुने गए थे. 2011 में वह पुलिवेंदुला विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव हार गए क्योंकि यहां उन्होंने अपनी भाभी और वाईएसआर की पत्नी तथा जगनमोहन रेड्डी की मां विजयलक्ष्मी के खिलाफ चुनाव लड़ा था.
यह वह दौर था, जब 2009 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में वाईएसआर की मौत हो गई थी और उसके बाद जगन के परिवार के लिए सहानुभूति की लहर चल पड़ी. बाद में जगनमोहन ने कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी वाईएसआरसीपी बनाई और फिर विवेकानंद भी उस पार्टी में शामिल हो गए. इसके बाद 2017 में भी विवेकानंद विधान परिषद का चुनाव हार गए. आरोप लगाया गया कि भास्कर और उनके बेटे अविनाश रेड्डी ने उनकी हार सुनिश्चित करने में भूमिका निभाई.
2019 में विवेकानंद की मृत्यु के समय, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेता एन चंद्रबाबू नायडू मुख्यमंत्री थे. उन्होंने हत्या की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया, जबकि वाईएसआरसीपी ने सीबीआई जांच की मांग की थी. दोनों राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया.
इस तरह शुरू हुई जांच
विवेकानंद की हत्या के बाद पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज कर कई लोगों से पूछताछ की. आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा पारित एक आदेश के बाद इस मामले को राज्य अपराध जांच विभाग की एसआईटी से वापस लेकर जुलाई 2020 में सीबीआई को सौंप दिया गया था. केंद्रीय एजेंसी ने 26 अक्टूबर, 2021 को चार्जशीट दाखिल की और उसके बाद 31 जनवरी, 2022 को सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की.
नवंबर 2022 में, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि आंध्र प्रदेश में निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं हो सकती है, जिसके बाद मामले को सीबीआई विशेष अदालत ,हैदराबाद, तेलंगाना में ट्रांसफर कर दिया गया. विवेकानंद की बेटी सुनीता नरेड्डी और उनकी मां ने इस संबंध में अदालत में याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले हफ्ते एक नई एसआईटी गठित करने और 30 अप्रैल तक जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया जिसके बाद सीबीआई ने जांच तेज कर दी.