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बीजेपी नेता ने सुरक्षा हासिल करने के लिए करा ली खुद की हत्या!

लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रत्यूष मणि त्रिपाठी खुद पर हमला करवाकर सरकारी सुरक्षा लेना चाहता था. उसने इस बारे में अपने दोस्तों को भी बताया था.

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पुलिस ने इस मामले में मृतक के पांच दोस्तों को गिरफ्तार किया है (फाइल फोटो- फेसबुक)
पुलिस ने इस मामले में मृतक के पांच दोस्तों को गिरफ्तार किया है (फाइल फोटो- फेसबुक)

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के नेता प्रत्यूष मणि त्रिपाठी की हत्या का मामला पुलिस ने सुलझा लिया है. पुलिस के मुताबिक बीजेपी नेता ने सरकारी सुरक्षा हासिल करने के लिए खुद पर हमले की साजिश रची थी. लेकिन हमले के वक्त गलती से चाकू गलत जगह लग गया और उसकी मौत हो गई.

पुलिस ने इस हत्याकांड का खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो सभी मृतक के करीबी दोस्त बताए जा रहे हैं. 36 वर्षीय बीजेपी नेता प्रत्यूष मणि त्रिपाठी अमीनाबाद का रहने वाला था. जबकि यह वारदात बादशाह नगर रेलवे क्रॉसिंग के पास हुई थी.

इस संबंध में लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रत्यूष मणि त्रिपाठी खुद पर हमला करवाकर सरकारी सुरक्षा लेना चाहता था. उसने इस बारे में अपने दोस्तों को भी बताया था. वो अपने विरोधियों पर हमले का आरोप लगाकर उन्हें ब्लैकमेल करना चाहता था.

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एसएसपी ने बताया कि जब पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की गई तो पता चला कि उन लोगों ने प्रत्यूष मणि के कहने पर ही उस पर चाकू से वार किया था, लेकिन हमले के वक्त चाकू उसे गहराई से जा लगा. वो लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा. उसे गिरता देख उसके दोस्त वहां से भाग निकले.

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू भी बरामद कर लिया है. वो चाकू प्रत्यूष मणि ने खुद गड़बड़झाला बाजार से मंगवाया था. पुलिस के मुताबिक उसने अपने दोस्तों से चाकू कंधे पर मारने के लिए कहा था लेकिन हमले के वक्त चाकू उसके फेफडों में घुस गया. जिससे उसकी मौत हो गई.

बताते चलें कि एक सप्ताह पहले यानी 3 दिसंबर की रात लखनऊ के बादशाहनगर इलाके में भाजयूमो नेता प्रत्यूष मणि त्रिपाठी की लाश मिली थी. उसकी हत्या की ख़बर से बीजेपी कार्यकर्ताओं में गुस्सा भड़क गया था. उन लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन भी किया था. मृतक परिजनों ने भी पुलिस पर उसे सुरक्षा न देने का इल्जाम लगाया था.

लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूरे मामले को उजागार कर दिया और असली आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. सिर्फ सुरक्षा हासिल करने की खातिर भाजपा नेता ने अपनी जान गवा दी.

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