राजस्थान के अलवर में रकबर उर्फ अकबर खान की मौत के मामले में पुलिस ने अपनी चार्जशीट पेश की है, जिसमें कहा गया है कि अकबर को पुलिस ने नहीं बल्कि भीड़ ने मारा था. जबकि, 24 जुलाई को राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने रामगढ़ पहुंचकर घटनास्थल का दौरा किया था और कहा था कि रघुवर की मौत पुलिस कस्टडी में हुई है, हालांकि पुलिसवालों ने उसे नहीं पीटा है.
पुलिसवाले गायों को गोशाला ले गई और बाद में रकबर को अस्पताल ले गई, लेकिन चार्जशीट में किसी भी पुलिसकर्मी को कहीं भी दोषी नहीं माना गया है.
बता दें कि अलवर जिले के रामगढ़ के ललावंडी गांव मे 21 जुलाई को रकबर खान की मौत मॉब लीचिंग से हुई थी. मामले में 49 दिन बाद रामगढ़ के सिविल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई है.
चार्जशीट में तीन आरोपियों परमजीत सरदार ,धर्मेंद्र यादव और नरेश को अकबर खान की मौत के लिए जिम्मेदार माना गया है. पुलिस ने जांच में जुर्म को प्रमाणित मानते हुए इन्हें कोर्ट में धारा 302 का आरोपी माना है.
पुलि की ओर से दायर 25 पेज की चार्जशीट में कहा है कि तीनों आरोपियों ने देर रात रकबर खान को खेत में पकड़कर उसकी पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई. पुलिस जांच में तीनों आरोपियों के दोषी मानते हुए जांच अधिकारी ने धारा, 302, 341, 323 ओर 334 में जुर्म प्रमाणित माना है.
हालांकि, कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि पुलिस की तरफ से पेश चीर्जशीट अधूरी है. उसमें एफएसएल की रिपोर्ट नहीं लगा हुई है. तब जाकर पुलिस ने कोर्ट में अंडरटेकिंग दी कि एक महीने में विसरा की रिपोर्ट आने के बाद एफएसएल और रिपोर्ट पेश कर दूसरी चार्जशीट पेश करेगी.
इस मामले की जांच 173/8 में जारी है और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच चल रही है. इस मामले में नवल शर्मा का नाम शामिल है, जिसकी भी जांच की जा रही है.
डीएसपी दक्षिण अलवर अशोक चौहान ने बताया कि कोर्ट में एक महीने में स्पेशल रिपोर्ट पेश करने का समय मांगा गया है और इस दौरान ही यह रिपोर्ट पेश कर दी जाएंगी. उन्होंने कहा कि पुलिस थाने में रघुवर खान की मौत के आरोपों के लिए अलग से 176 के तहत मजिस्ट्रेट इंक्वायरी की जा रही है.