क्या अफसोसनाक इत्तेफाक है ये. आठ साल पहले जिसने मुंबई को सबसे बड़ा ज़ख्म दिय़ा, आठ साल बाद उसी कातिल का हिसाब करने की बजाए पाकिस्तान उसे आज़ादी का जश्न मनाने और केक काटने का मौका देता है. आठ साल पहले की 26-11 वो तारीख़ है, जो ग़म और ग़ुस्से की कशमकश के साथ बेचैन करती है. ये दिन मुंबई की आंखों में ठहरे हुए आंसू की तरह लगता है.
बेशर्म पाकिस्तानी सरकार
ये आंसू आंखों से तब बाहर आएंगे, जब मुंबई के सबसे बड़े गुनहगार हाफिज़ सईद का अंत होगा. मगर लश्कर-ए-तैयबा के मुखिय़ा हाफिज़ सईद का हिसाब करने की बजाए पाकिस्तानी सरकार ने पूरी बेशर्मी के साथ दस महीने की नज़रबंदी के बाद 26-11 के सबसे बड़े गुनहगार को 23-11 को रिहा कर दिया.
जश्न मना रहा है आतंकी सईद
आठ साल पहले जो हुआ वो गुज़र चुका है, लेकिन जिस ग़म से मुंबई गुज़री है वो अब भी उसकी ज़िंदगी का हिस्सा है. 26-11 की मुंबई को जिन हज़ारों आंखों ने देखा वो लगातार आपके सामने था. ये पहला मौक़ा था, जब खुले आम चलती गाड़ी से गोलियों की बौछारें हुईं. रेलवे स्टेशन, अस्पताल और होटलों में गोले और गोलियां चलीं और लोग कीड़े मकौड़ों की तरह बिछते चले गए. काश ये झूठ होता. मगर अफ़सोस कि जो हुआ न वो झूठ था और ना ही ये झूठ है कि इस कत्लेआम का सबसे बड़ा कातिल आज आठ साल बाद भी ना सिर्फ आज़ाद है बल्कि अपनी आज़ादी का बाकायदा जश्न मना रहा है.
आधी रात को हुआ आजाद
वो दस लाख मीलियन डॉलर इनामी आतंकवादी हाफिज सईद बिल्कुल आज़ाद है. क्या कीजिएगा. पाकिस्तान में रहता है वो इसलिए सब कुछ मुमकिन है. उसकी आज़ादी भी. 23 नवंबर की रात उसके रिहा होने के बाद जो तस्वीरें सामने आईं, उससे पता चला कि कैसे आतंकवादी हाफिज़ सईद लाहौर में रिहाई का जश्न मना रहा है. इसी साल जनवरी में चौतरफा दबाव के बाद पाकिस्तानी हुकूमत ने सईद को उसी के घर में नज़रबंद कर दिया था. मगर नज़रबंदी के 10 महीने बाद हाफिज़ सईद 23 नवंबर की आधी रात को छूट गया. फिर सुबह होते ही वो अपने आतंकी संगठन जमात-उद-दावा के हेडक्वॉर्टर पहुंचा. मिठाई बांटकर जश्न मनाया गया. केक काटा गया. इसके बाद लश्कर-ए-तैयबा का वो सरगना भारत की तबाही के नारे लगवाने लगा.
पाक सरकार ने छिपाए सबूत
हिंदुस्तान के न जाने कितने ही शहरों के साथ शहर मुंबई के इस सबसे बड़े दुश्मन को ऐसे रिहा करने की बेशर्मी सिर्फ पाकिस्तान ही कर सकता है. वो पाकिस्तानी सरकार ही है, जो भारत की तरफ से हाफिज सईद के खिलाफ सौंपे गए तमाम सबूतों को दबा कर बैठ गई. उसके खिलाफ कोर्ट में एक भी सबूत पेश नहीं किय़ा. अलबत्ता दुनिया को दिखाने के लिए कोर्ट के सामने ये ढकोसला जरूर करती रही कि हाफिज़ सईद की रिहाई पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा देंगी. इसलिए उसे ना छोड़ा जाए. मगर कोर्ट जब पलट कर सईद के खिलाफ सबूत मांगती तो सरकार खामोश हो जाती.
भारत के खिलाफ फिर साजिश
पाकिस्तानी सरकार की मेहरबानी से हाफिज सईद एक बाहर फिर आजाद हो चुका है. जाहिर है अपनी इस आजादी के बदले एक बार फिर वो पारिस्तानी सरकार, सेना, आईएसआई को खुश करने की कोशिश करेगा. तो रिहाई मिलते ही उसने इसका एलान भी कर दिया. उसने आजाद होते ही कड़वे बोल बोले. इसे सिर्फ हाफिज़ सईद के बोल न माने. ये पाकिस्तान के बोल हैं. जिसने हाफिज़ सईद जैसे आतंकवादी को छोड़ा ही इसीलिए कि भारत के खिलाफ आतंक की फुल सप्लाई की जाए.
पुराने आतंकी एजेंडे का विस्तार
दुनिया में ऐसा आतंकी देश कौन होगा, जो इंटरनेशनल आतंकवादियों को कंधे पर बैठाता है. खुलेआम दूसरे देश के खिलाफ ज़हर उगलने की इजाजत देता है. आतंक फैलाने की धमकियां देने की इजाजत देता है. हाफिज़ सईद ने छूटने के बाद फिर यही शुरू कर दिया.
दरअसल, हाफिज़ सईद जो धमकी दे रहा है, वो उसकी धमकियां नहीं बल्कि पाकिस्तान की धमकियां हैं. जो अब बेशर्मी से दुनिया को बता रहा है कि वो इंटरनेशनल आतंकवादियों को पालता है. दुनिया उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी. आतंकी कल भी खुलेआम रैलियां करते थे. आज भी वो बेधड़क होकर खुलेआम आतंकी जेहाद की धमकियां दे रहे हैं. ज़ाहिर है इसे छोड़ा ही इसीलिए गया है. हाफिज़ सईद को रिहा कर पाकिस्तान कश्मीर वाले अपने पुराने आतंकी एजेंडे को भी रफ्तार देना चाहता है.
पाकिस्तान फिर बेनकाब
ये तीसरा मौका है जब पाकिस्तान ने हाफिज सईद को रिहा किया है. 26-11 के मुंबई हमले के बाद भारत के दबाव के चलते उसे दो अलग-अलग मौकों पर गिरफ्तार किया गया था. मगर दोनों ही बार कुछ दिनों बाद उसे रिहा कर दिया गया. तीसरी बार इस साल जनवरी में उसे हिरासत में लेने के बाद लाहौर के जौहर टाउन में उसी के घर में उसे नज़रबंद किया गया था. यानी सईद को जेल नहीं भेजा गया था. बल्कि उसी के घर में आराम से रखा गया था. इस आतंकी की रिहाई ने एक बार फिर पाकिस्तान का चेहरा बेनकाब कर दिया है.