महाराष्ट्र के नागपुर में एक स्थानीय अदालत ने नाबालिग बेटी से रेप के मामले में एक व्यक्ति को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. इस मामले में पीड़िता, उसकी मां और अन्य गवाह गवाही से मुकर गए थे. 14 वर्षीय पीड़िता गर्भवती हो गई थी और बाद में उसने एक बच्चे को जन्म दिया था.
जिला न्यायाधीश प्रथम एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केजी राठी ने बुधवार को आरोपी को दोषी ठहराया था. आरोपी को पूरी तरह डीएनए परीक्षण के आधार पर दोषी ठहराया गया, जिसमें अपराध में उसकी भूमिका साबित हुई. दोषी पिता नागपुर शहर में ही एक झुग्गी बस्ती में रहता था.
अदालत ने उसे 10 साल के कठोर कारावास के साथ ही 10 हजार रूपये के जुर्माने की सजा भी सुनाई. मुकदमे के दौरान पीड़िता, उसकी शिकायतकर्ता मां और सभी गवाह अपने बयानों से मुकर गए. अतिरिक्त लोक अभियोजक ज्योति वजानी ने तर्क दिया कि यदि इसे छोड़ा गया तो गलत संदेश जाएगा.
अभियोजन ने कहा कि आरोपी एक मकान के सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात था. उसके मालिक नांदेड़ में रहते थे. वह अपनी 14 साल की बेटी को मकान की सफाई के बहाने वहां ले जाता था. वह उसके लिए घर से खाना भी लाती थी. मकान में उससे बार-बार रेप किया और किसी को न बताने की धमकी दी.
रेपिस्ट देवर को 7 साल की कैद
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की एक त्वरित न्यायालय ने भाभी से रेप करने के आरोप में सगे देवर को सात साल की कैद और पचास हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. यह जानकारी सहायक शासकीय अधिवक्ता बाबू सिंह यादव ने गुरुवार को दी. पीड़ित महिला का पति साधु हो गया था.
पति साधु हुआ तो कर दिया रेप
पीड़ित महिला ने 12 नवंबर 2014 को अदालत के जरिए दर्ज कराए अभियोग में आरोप लगाया कि उसका पति साधु हो गया था. वह अपने मायके में रह रही थी. उसका सगा देवर रामप्रकाश निषाद मायके आया और पति के गांव आने का बहाना बनाकर उसे ले गया. गांव जाते समय उसने उसके साथ रेप किया.